Nepal Flood Trishuli 3A Tunnel Rescue: विनाशकारी बाढ़ और तबाही से जूझ रहे नेपाल से आखिरकार राहत और उम्मीद की एक बहुत बड़ी खबर सामने आई है। 26 अगस्त को आई भयंकर बाढ़ के नौ दिन बाद, शुक्रवार 4 सितंबर को त्रिशूली 3A हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंग से दो मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है।
CNN-News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, रेस्क्यू टीम द्वारा बचाए गए मजदूरों की पहचान संजय साह (मेकेनिक फॉरमैन) और कबीर महर्जन (मेकेनिक सुपरवाइजर) के रूप में हुई है। 60 मेगावाट की इस जलविद्युत परियोजना में भोटेकोशी नदी के उफान के बाद कम से कम 42 कर्मचारी और मजदूर टनल के अंदर फंस गए थे।
'घबराओ मत, हम आ रहे हैं'... टनल से अब भी आ रही हैं इंसानी आवाजें
दोनों मजदूरों को सुरक्षित निकाले जाने के बाद रेस्क्यू टीमों का हौसला दोगुना हो गया है। राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद और इंजीनियर श्रीराम न्यौपाने ने सोशल मीडिया पर अपडेट साझा करते हुए बताया कि सुरंग के भीतर से और भी इंसानी आवाजें सुनाई दे रही हैं। जब नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने टनल के मुहाने से आवाज लगाई कि 'घबराओ मत, हम तुम्हें बचा रहे हैं', तो अंदर फंसे अन्य लोगों ने जवाब दिया।
मलबे और कीचड़ को हटाने के लिए भारी मशीनरी और विशेषज्ञ उपकरणों को तैनात किया गया है। खराब मौसम और क्षतिग्रस्त रास्तों के बावजूद सेना और पुलिस के जवान युद्ध स्तर पर राहत कार्य में जुटे हैं।
1250 से ज्यादा मौतें, 5,000+ लापता
यह रेस्क्यू ऑपरेशन एक ऐसे समय पर चल रहा है जब नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा का भयानक मंजर देखने को मिल रहा है। हिमालय में ग्लेशियर टूटने की वजह से झीलों का निर्माण हुआ, जो बाद में नेपाल-तिब्बत सीमा पर भयंकर बाढ़ बनकर कई गांवों को बहा ले गई।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस बाढ़ में अब तक 1,259 लोगों की जान जा चुकी है, जबकि 5,083 लोग अभी भी लापता हैं। कई प्रभावित इलाकों में लोग अपनों का शव न मिलने पर कुश के पुतलों से प्रतीकात्मक अंतिम संस्कार कर रहे हैं।
भारत से 5वां विमान रेस्क्यू टीम के साथ नेपाल रवाना
नेपाल में मची इस तबाही के बाद भारत सबसे पहले मदद के लिए आगे आने वाले देशों में शामिल रहा है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर जानकारी साझा करते हुए लिखा कि 'भारत का 5वां विमान नेपाल के लिए रवाना हो चुका है।' इस विमान में 11 सदस्यीय विशेष रेस्क्यू टीम और मानवीय सहायता सामग्री भेजी गई है ताकि खोज और बचाव अभियान को और गति दी जा सके।