नेपाल ने भारत के केले के साथ जो गलती की, अब वही उसने आम के साथ कर दी; रेट जैसे भागा था वैसा फिर हुआ तो पछताना पड़ेगा!

Nepal Bans Indian Mango Imports: कुछ समय पहले भारत से आने वाले केलों पर पाबंदी लगाकर अपनी फजीहत कराने के बाद, अब नेपाल सरकार ने 'भारतीय आम' के इंपोर्ट पर भी कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाली अधिकारियों का दावा है कि भारत से आने वाले आमों में कीटनाशकों की मात्रा बहुत ज्यादा है

अपडेटेड Jun 10, 2026 पर 2:28 PM
नेपाल सरकार ने 'भारतीय आम' के इंपोर्ट पर कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है

Nepal Ban Indian Mango: भारत के साथ रोटी-बेटी का रिश्ता रखने वाले पड़ोसी देश नेपाल ने एक बार फिर ऐसा कदम उठाया है, जिससे वहां के आम उपभोक्ताओं की जेब ढीली होना तय है। कुछ समय पहले भारत से आने वाले केलों पर पाबंदी लगाकर अपनी फजीहत कराने के बाद, अब नेपाल सरकार ने 'भारतीय आम' के इंपोर्ट पर भी कड़ा प्रतिबंध लगा दिया है।

नेपाली अधिकारियों का दावा है कि भारत से आने वाले आमों में कीटनाशकों की मात्रा बहुत ज्यादा है और सीमावर्ती इलाकों में उनके पास क्वालिटी जांच के लिए पर्याप्त क्वारंटाइन सुविधाएं नहीं हैं। लेकिन नेपाल के इस फैसले से वहां के फल कारोबारी और आम जनता बेहद डरी हुई है। उन्हें डर है कि जैसे पिछले साल भारतीय केलों पर बैन लगते ही केलों के दाम आसमान पर पहुंच गए थे, वैसा ही हाल अब आम का भी होने वाला है।

नेपाल सरकार का तर्क: 'लोकल किसानों को बढ़ावा मिलेगा'


नेपाल के मधेस प्रांत के भूमि प्रबंधन, कृषि और सहकारी मंत्रालय के सूचना अधिकारी अजय ज्ञवाली के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में क्वारंटाइन लैब न होने और कीटनाशकों के डर से भारतीय आमों के इंपोर्ट को रोका गया है।

नेपाल सरकार इस फैसले को अपनी पीठ थपथपाने के मौके के रूप में देख रही है। अधिकारियों का कहना है कि भारतीय आमों पर रोक लगने से नेपाल के स्थानीय किसानों को फायदा होगा, क्योंकि इस सीजन में उन्हें भारतीय फलों से कड़ा मुकाबला नहीं करना पड़ेगा। मधेस प्रांत के सिराहा, सप्तरी और धनुषा जिले नेपाल में आम के सबसे बड़े उत्पादक हैं। सरकार का मानना है कि इससे घरेलू उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा, जो कि एक सकारात्मक कदम है।

सिर्फ 2 महीने का सीजन, साल भर कैसे चलेगा काम?

नेपाल सरकार भले ही इसे मास्टरस्ट्रोक मान रही हो, लेकिन खुद उनके अधिकारी और व्यापारी इस फैसले के दुष्परिणामों को लेकर चेतावनी दे रहे हैं। अजय ज्ञवाली ने खुद माना कि देश में आम की मांग को पूरा करने के लिए केवल घरेलू उत्पादन काफी नहीं है। नेपाल में आम का सीजन सिर्फ मिड-मई से मिड-जुलाई यानी केवल दो महीने तक ही होता है।

नेपाल में आम पर आधारित कई उद्योग हैं, जैसे फ्रूट जूस बनाने वाली कंपनियां। भारतीय आमों पर रोक से इन फैक्ट्रियों के सामने कच्चे माल का बड़ा संकट खड़ा हो जाएगा।

जनकपुरधाम के फल और सब्जी व्यवसायी संघ के महासचिव भुवनेश्वर पुर्बे ने कहा कि भारतीय आयात को पूरी तरह रोकना नेपाली बाजार में भारी किल्लत पैदा कर देगा। उन्होंने सरकार को सलाह दी है कि पूरी तरह बैन लगाने के बजाय बॉर्डर पर क्वारंटाइन सिस्टम को मजबूत किया जाए और प्रॉपर क्वालिटी टेस्ट के बाद भारतीय आमों को नेपाल में एंट्री दी जाए।

केले वाला ही हो जाएगा हश्र

नेपाल के स्थानीय व्यापारियों और उपभोक्ताओं ने सरकार को पुरानी गलती याद दिलाते हुए आगाह किया है। दरअसल जब नेपाल ने भारत से आने वाले केलों पर रोक लगाई थी, तब जो केला पिछले साल तक 120 से 150 नेपाली रुपया प्रति दर्जन मिलता था, वह आज सीधे डबल होकर 250 से 300 रुपये प्रति दर्जन पर पहुंच चुका है। फिलहाल लोग इस महंगाई से त्रस्त हैं।

काठमांडू के बाजारों में आजकल आम की कीमत करीब 100 से 150 रुपये प्रति किलो है। व्यापारियों का साफ कहना है कि जनकपुरधाम से काठमांडू और देश के बाकी हिस्सों में सप्लाई होने वाले आमों के लिए अकेले नेपाली बागान काफी नहीं हैं। अगर भारत से आमों की एंट्री तुरंत बहाल नहीं की गई, तो आने वाले दिनों में आम के रेट इतनी तेजी से भागेंगे कि आम जनता को इसे खरीदने से पहले दस बार सोचना पड़ेगा।

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