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कभी बनाया PM, अब क्यों बालेन शाह के ही खिलाफ सड़कों पर उतर गए नेपाल के Gen Z? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी

नेपाल की राजनीति में युवाओं और Gen-Z के दम पर पारंपरिक पार्टियों को उखाड़ फेंकने वाले प्रधानमंत्री बालेंद्र 'बालेन' शाह अब खुद उसी युवा पीढ़ी के निशाने पर आ गए हैं। जिस पीढ़ी ने उन्हें राजनीतिक बदलाव का प्रतीक मानकर सत्ता के शीर्ष पर बैठाया था आज वही उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आई है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jul 13, 2026 पर 2:35 PM
कभी बनाया PM, अब क्यों बालेन शाह के ही खिलाफ सड़कों पर उतर गए नेपाल के Gen Z? जानें पूरी इनसाइड स्टोरी
नेपाल के PM बालेन शाह के खिलाफ सड़कों पर उतरे Gen Z?

Nepal Balen Shah News: नेपाल की राजनीति में युवाओं और Gen-Z के दम पर पारंपरिक पार्टियों को उखाड़ फेंकने वाले प्रधानमंत्री बालेंद्र 'बालेन' शाह अब खुद उसी युवा पीढ़ी के निशाने पर आ गए हैं। जिस पीढ़ी ने उन्हें राजनीतिक बदलाव का प्रतीक मानकर सत्ता के शीर्ष पर बैठाया था आज वही उनके खिलाफ सड़कों पर उतर आई है। नेपाल में हुई आत्मदाह की एक चर्चित घटना, बस्तियों को उजाड़ा जाना और मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों ने नेपाल के युवाओं में बालेन शाह सरकार के खिलाफ भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। रविवार को काठमांडू में सिंहदरबार सचिवालय के बाहर सैकड़ों लोग इकट्ठा हुए। प्रदर्शनकारियों ने भूमिहीन प्रवासियों के खिलाफ सरकार के बेदखली अभियान, कथित मानवाधिकारों के उल्लंघन और युवा कार्यकर्ताओं के साथ हुए बर्ताव की कड़े शब्दों में आलोचना की।

आपको बता दें कि बालेन शाह की राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी (RSP) ने प्रतिनिधि सभा में करीब दो-तिहाई बहुमत हासिल कर सरकार बनाई थी। सत्ता में आने के बाद से उनके खिलाफ हो रहे ये प्रदर्शन पहली सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आए हैं। आइए समझते हैं इस पूरे विवाद की इनसाइड स्टोरी और उन वजहों को जिससे नेपाल का युवा वर्ग अपनी ही चुनी सरकार के खिलाफ खड़ा होता नजर आ रहा है-

Gen-Z के विरोध से शुरू हुआ था बालेन शाह का सफर

पिछले साल सितंबर में नेपाल एक तरह से Gen-Z रिवोल्यूशन का गवाह बना। युवाओं के नेतृत्व में हुए बड़े विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को इस्तीफा देना पड़ा था। ये प्रदर्शन भ्रष्टाचार, बेरोजगारी और पारंपरिक राजनीतिक दलों के प्रति देश के युवाओं के बढ़ते गुस्से का नतीजा माने गए थे। काठमांडू के मेयर के रूप में अपनी लोकप्रियता स्थापित कर चुके बालेन शाह इस स्थापित राजनीति से अलग एक नए चेहरे के रूप में उभरे। उनकी पार्टी RSP ने चुनाव जीता और 27 मार्च को बालेन शाह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। उन्होंने 100 सूत्रीय एजेंडे के माध्यम से शासन, अर्थव्यवस्था और सार्वजनिक संस्थानों में बड़े सुधारों का वादा किया था। हालांकि सरकार के करीब 100 दिन पूरे होने के बाद अब उनके युवा समर्थकों के एक बड़े हिस्से का मानना है कि जमीन पर कोई खास बदलाव नहीं आया है और सरकार जनता की चिंताओं को नजरअंदाज कर रही है।

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