बांग्लादेश में भारत विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं, खासकर भारत विरोधी छात्र नेता उस्मान हादी की हत्या के बाद से। अब, उनके छात्र संगठन, इंकलाब मंचो ने भारतीयों के वर्क परमिट रद्द करने की मांग की है। इस संगठन ने सरकार को चार मांगों के साथ 24 घंटे का अल्टीमेटम भी दिया है। इस कट्टरपंथी समूह ने सरकार पर दबाव डाला है कि वो उसके नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या में शामिल सभी लोगों के मुकदमे को 24 दिनों के भीतर पूरा करे।
इंकलाब मंचो के सदस्य सचिव अब्दुल्ला अल जाबेर ने रविवार रात ढाका के शाहबाग से इस अल्टीमेटम की घोषणा की। पार्टी ने फेसबुक पर एक बयान में कहा था, "हत्यारे, मुख्य साजिशकर्ता, सहयोगी, भागने में मदद करने वाले और उन्हें शरण देने वाले सहित पूरे हत्यारे गिरोह का मुकदमा अगले 24 दिनों के भीतर पूरा किया जाना चाहिए।"
इस पोस्ट में इंकलाब मोनचो ने अपनी चार मांगें रखीं:
इंकलाब मोनचो की यह मांग ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस (DMP) के इस दावे के बीच आई है कि उस्मान हादी हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्ध मेघालय से जुड़े मयमनसिंह जिले के हलुआघाट सीमा मार्ग से भारत भाग गए हैं।
यह संगठन हादी की हत्या के मामले में आरोपियों के खिलाफ न्याय की मांग करते हुए देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन और नाकाबंदी जारी है।
भारत विरोधी भावनाएं बढ़ रही हैं
भारत ने शुक्रवार को बांग्लादेश में दो हिंदू पुरुषों की हत्या पर चिंता जताई और दोषियों को दंडित करने की मांग की। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि नई दिल्ली इस हालिया हत्या से व्याकुल है और इस बात पर जोर दिया कि दोषियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।
जायसवाल ने कहा, “बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी दुश्मनी बेहद चिंता का विषय है। हम बांग्लादेश में हाल ही में एक हिंदू युवक की हत्या की कड़ी निंदा करते हैं और उम्मीद करते हैं कि इस अपराध के दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।”
बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने भारत की चिंताओं को खारिज कर दिया, जिसमें अल्पसंख्यकों पर निशाना बनाकर हमले होने की बात कही गई थी।
मंत्रालय के बयान में कहा गया, "हम देख रहे हैं कि कुछ लोग अपराध की अलग-अलग घटनाओं को हिंदुओं पर व्यवस्थित अत्याचार के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहे हैं। इन्हें भारत के अलग-अलग हिस्सों में बांग्लादेश के खिलाफ नफरत फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। कुछ जगहों पर चुनिंदा और गलत रवैया अपनाया जा रहा है, जहां ऐसी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है और आम भारतीयों को बांग्लादेश, उसके दूतावासों और संस्थानों के खिलाफ भड़काया जाता है।"