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Pakistan-Afghan War: दोस्त से बने कट्टर दुश्मन, 5 साल में कैसे युद्ध के मुहाने पर खड़े हो गए पाकिस्तान और अफगानिस्तान?

Afghanistan-Pakistan War: दशकों तक पाकिस्तान ने कोशिश की कि काबुल पर सिर्फ उसका प्रभाव रहे और भारत वहां से बाहर रहे। लेकिन तालिबान की भारत के साथ बढ़ती दोस्ती ने पाकिस्तान के इस 'एकाधिकार' को खत्म कर दिया है। जैसे-जैसे अफगानिस्तान अपनी साझेदारियां बढ़ा रहा है, पाकिस्तान का उस पर दबाव कम होता जा रहा है

Curated By: Abhishek Guptaअपडेटेड Feb 27, 2026 पर 4:19 PM
Pakistan-Afghan War: दोस्त से बने कट्टर दुश्मन, 5 साल में कैसे युद्ध के मुहाने पर खड़े हो गए पाकिस्तान और अफगानिस्तान?
आज दोनों देशों की सेनाएं डूरंड लाइन पर एक-दूसरे पर गोले बरसा रही हैं और हालात युद्ध जैसे हो गए है

Pakistan-Afghan War: अगस्त 2021 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया था, तब पाकिस्तान में जश्न का माहौल था। इस्लामाबाद को लगा था कि उसने अफगानिस्तान में अपनी पसंद की सरकार बनवाकर 'मास्टरस्ट्रोक' खेल दिया है। लेकिन 2026 तक आते-आते तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है। आज दोनों देशों की सेनाएं डूरंड लाइन पर एक-दूसरे पर गोले बरसा रही हैं और हालात युद्ध जैसे हो गए है। आखिर ऐसा क्या हुआ कि पाकिस्तान का 'रणनीतिक दोस्त' उसके लिए 'एक बुरा ख्वाब' बन गया? आइए आपको बताते हैं इसके पीछे के तीन प्रमुख कारण।

1. TTP का हमला और पाकिस्तान की दोहरी नीति का अंजाम

सबसे बड़ा विवाद तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) को लेकर है। पाकिस्तान का आरोप है कि TTP के आतंकी अफगान जमीन का इस्तेमाल कर पाकिस्तान में हमले कर रहे हैं और उन्हें तालिबान का संरक्षण प्राप्त है। जिस आतंकी इकोसिस्टम को पाकिस्तान ने दशकों तक पाला-पोसा, वही अब उसके सुरक्षा बलों पर भारी पड़ रहा है। वहीं जनरल असीम मुनीर के नेतृत्व में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के अंदर एयरस्ट्राइक और क्रॉस-बॉर्डर ऑपरेशन तेज कर दिए हैं, जिससे काबुल नाराज है। तालिबान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी नाकामियों का ठीकरा उन पर फोड़कर उनकी संप्रभुता का उल्लंघन कर रहा है।

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