पाकिस्तान-चीन को UN में बड़ा झटका, BLA को आतंकी घोषित कराने की कोशिश नाकाम, US ने लगाई रोक

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का कहना है कि इन दोनों संगठनों के अल-कायदा और ISIS से सीधे संबंधों के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत किसी संगठन को सूचीबद्ध करने के लिए उसका इन आतंकी नेटवर्क से जुड़ा होना जरूरी माना जाता है

अपडेटेड Jun 06, 2026 पर 5:18 PM
पाकिस्तान-चीन को UN में बड़ा झटका, BLA को आतंकी घोषित कराने की कोशिश नाकाम, US ने लगाई रोक

पाकिस्तान और चीन को बड़ा झटका देते हुए अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध समिति के तहत बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (BLA) और मजीद ब्रिगेड को वैश्विक आतंकी संगठन घोषित करने के प्रस्ताव को रोक दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका का कहना है कि इन दोनों संगठनों के अल-कायदा और ISIS से सीधे संबंधों के पर्याप्त सबूत नहीं हैं। संयुक्त राष्ट्र की 1267 प्रतिबंध व्यवस्था के तहत किसी संगठन को सूचीबद्ध करने के लिए उसका इन आतंकी नेटवर्क से जुड़ा होना जरूरी माना जाता है।

पाकिस्तान क्या चाहता था?


पाकिस्तान लंबे समय से BLA और मजीद ब्रिगेड को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आतंकी घोषित करवाने की कोशिश कर रहा था। पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर कई बार बलूच संगठनों को "फितना-ए-हिंदुस्तान" बताते हुए भारत पर उन्हें समर्थन देने का आरोप लगा चुके हैं।

पहलगाम आतंकी हमला और ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तान ने इन संगठनों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की मांग और तेज कर दी थी।

चीन ने दिया था पाकिस्तान का साथ

अमेरिका द्वारा पहले द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को विदेशी आतंकी संगठन घोषित किए जाने के बाद पाकिस्तान को उम्मीद थी कि BLA और मजीद ब्रिगेड के खिलाफ भी ऐसी ही कार्रवाई होगी। इसी उद्देश्य से उसने चीन के साथ मिलकर संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पेश किया।

हालांकि अमेरिका ने साफ कर दिया कि संयुक्त राष्ट्र की 1267 सूची केवल उन संगठनों के लिए है जिनका संबंध अल-कायदा या ISIS से हो, और BLA तथा मजीद ब्रिगेड इस कानूनी कसौटी पर खरे नहीं उतरते।

चीन पर दोहरे मापदंड के आरोप

दिलचस्प बात यह है कि चीन पहले कई बार भारत और अमेरिका द्वारा पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों के खिलाफ लाए गए प्रस्तावों को रोक चुका है।

बताया जाता है कि साजिद मीर, शाहिद महमूद और तल्हा सईद जैसे नाम अब तक संयुक्त राष्ट्र की 1267 सूची में शामिल नहीं हो पाए हैं क्योंकि चीन ने आपत्ति जताई थी।

इसके अलावा अब्दुल रऊफ असगर को 2023 में वैश्विक आतंकी घोषित करने के भारत-अमेरिका के संयुक्त प्रस्ताव पर भी चीन ने तकनीकी रोक लगा दी थी।

भारत के लिए क्यों अहम है फैसला?

विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका का यह रुख भारत के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। इससे यह संदेश गया है कि वॉशिंगटन आतंकवाद से जुड़े मामलों में केवल राजनीतिक दबाव के बजाय संयुक्त राष्ट्र के कानूनी मानकों को आधार बना रहा है। साथ ही पाकिस्तान की उस कोशिश को भी झटका लगा है, जिसमें वह बलूच विद्रोही संगठनों को भारत समर्थित आतंकवादी समूह साबित करने की कोशिश कर रहा था।

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