पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार के साथ रविवार को एक छोटा सा अजीब वाकया हुआ। वे इस्लामाबाद में मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलाती का स्वागत कर रहे थे, तभी उनका बैलेंस बिगड़ गया। यह घटना पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय में हुई। इशाक डार जैसे ही मेहमान का स्वागत करने आगे बढ़े, वे अचानक लड़खड़ा गए और गिर पड़े। वहां मौजूद कर्मचारियों और सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें संभाला और मदद की।
बाद में अधिकारियों ने बताया कि उन्हें किसी तरह की चोट नहीं आई और वे तय कार्यक्रम के अनुसार द्विपक्षीय बैठक में भी शामिल हुए। इस घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, हालांकि इसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है।
इस्लामाबाद में अहम कूटनीतिक हलचल जारी
इस्लामाबाद में यह छोटी सी घटना उस समय हुई, जब एक बड़ा कूटनीतिक कार्यक्रम चल रहा था। पाकिस्तान ने मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों की एक अहम बैठक की मेजबानी की।
यह बातचीत पाकिस्तान के उन लगातार प्रयासों का हिस्सा है, जिनके जरिए वह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के माहौल में खुद को एक “कूटनीतिक पुल” के रूप में पेश करना चाहता है।
इस बैठक का मुख्य मकसद दोनों देशों के बीच तनाव को कम करना और वॉशिंगटन और तेहरान के बीच बातचीत फिर से शुरू कराने के रास्ते तलाशना है।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही अप्रत्यक्ष बातचीत में शामिल कुछ लोग भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इस बातचीत में ईरान की ओर से आधिकारिक रूप से कौन शामिल है।
यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि अमेरिका के वरिष्ठ अधिकारी इन बातचीतों में किसी न किसी रूप में शामिल हो सकते हैं, लेकिन अभी तक इसकी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। पिछले कुछ हफ्तों में पाकिस्तान ने अपनी कूटनीतिक गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। इसी दिशा में, प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हाल ही में मसूद पेज़ेशकियान के साथ विस्तार से बातचीत की, ताकि क्षेत्र में बढ़ते तनाव को कम करने के रास्ते तलाशे जा सकें।
हालांकि, अभी भी कुछ मुश्किलें बनी हुई हैं। ईरान ने अमेरिका के प्रस्तावों पर शक जताया है। उसका कहना है कि वॉशिंगटन “बेवजह और गैर-तर्कसंगत मांगें” कर रहा है, और साथ ही ऐसे कदम भी उठा रहा है जिनसे दोनों देशों के बीच भरोसा कम हो रहा है। वहीं दूसरी तरफ, खबरें हैं कि अमेरिका ने तनाव कम करने के लिए एक विस्तृत योजना भी पेश की है। इस योजना में ईरान के परमाणु कार्यक्रम और उसकी क्षेत्रीय भूमिका से जुड़ी कुछ शर्तें शामिल बताई जा रही हैं।