Pakistan Economic Survey: पाकिस्तान में 7 करोड़ कंगाल! सिंध से बलूचिस्तान तक गरीबी की पोल आर्थिक सर्वे ने खोली

पाकिस्तान में संघीय बजट पेश होने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को पाकिस्तान आर्थिक सर्वे 2025-26 लॉन्च किया गया। इस सालाना कवायद का मकसद देश के प्रमुख आर्थिक संकेतकों को जनता और संसद के सामने रखना होता है, लेकिन इस बार के सर्वे ने वहां के हालात की भयावहता को उजागर किया है

अपडेटेड Jun 12, 2026 पर 8:08 PM
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Pakistan Economic Survey: पाकिस्तान में 7 करोड़ कंगाल! सिंध से बलूचिस्तान तक गरीबी की पोल आर्थिक सर्वे ने खोली

पड़ोसी देश पाकिस्तान की बदहाल अर्थव्यवस्था और वहां के लोगों की कंगाली को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला आधिकारिक आंकड़ा सामने आया है। पाकिस्तान सरकार द्वारा जारी किए गए ताजा आर्थिक सर्वे ने देश में पैर पसारती भयंकर गरीबी की पोल खोलकर रख दी है। इसके मुताबिक पिछले छह सालों के भीतर पाकिस्तान में गरीबी की दर में 7 फीसदी का भारी उछाल आया है। इस दौरान करीब 2.7 करोड़ नए लोग कंगाली के दलदल में धंस गए हैं, जिसके बाद अब पाकिस्तान में कुल गरीबों की संख्या बढ़कर 7 करोड़ (70 मिलियन) के पार पहुंच गई है।

बजट से पहले सामने आई कड़वी सच्चाई

पाकिस्तान में संघीय बजट पेश होने से ठीक एक दिन पहले गुरुवार को पाकिस्तान आर्थिक सर्वे 2025-26 लॉन्च किया गया। इस सालाना कवायद का मकसद देश के प्रमुख आर्थिक संकेतकों को जनता और संसद के सामने रखना होता है, लेकिन इस बार के सर्वे ने वहां के हालात की भयावहता को उजागर किया है।


इस आधिकारिक सर्वे के आंकड़े बताते हैं कि वर्ष 2018-19 में पाकिस्तान में गरीबी की दर 21.9 फीसदी थी। वर्ष 2024-25 तक आते-आते यह बढ़कर 28.9 फीसदी पर पहुंच गई है।

गांव से लेकर शहर तक बढ़ा कंगाली का ग्राफ

आर्थिक सर्वे के मुताबिक पाकिस्तान के ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में गरीबी का ग्राफ बहुत तेजी से ऊपर भागा है। गांवों में रहने वाली आबादी सबसे ज्यादा प्रभावित हुई है। यहां गरीबी का स्तर 28.2 प्रतिशत से बढ़कर 36.2 प्रतिशत हो गया है। शहरों में भी हालात बदतर हुए हैं। शहरी इलाकों में गरीबी 11 फीसदी से सीधे उछलकर 17.4 फीसदी पर पहुंच गई है।

सिंध से बलूचिस्तान तक: चारों प्रांतों का राज्यवार आंकड़ा

पंजाब प्रांत में गरीबी दर 16.5 फीसदी से बढ़कर 23.3 फीसदी हो गई। सिंध में यह 24.5 फीसदी से बढ़कर 32.6 फीसदी पर पहुंच गई। खैबर पख्तूनख्वा में गरीबी दर 28.7 फीसदी से बढ़कर 35.3 फीसदी हो गई, जबकि बलूचिस्तान में यह 41.8 फीसदी से बढ़कर 47 फीसदी हो गई। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बलूचिस्तान प्रांत इस सूची में सबसे शीर्ष पर यानी सबसे बदहाल स्थिति में है, जबकि पंजाब प्रांत में इन चारों के मुकाबले सबसे कम गरीबी दर्ज की गई है।

आखिर क्यों कंगाल हुआ पाकिस्तान? सर्वे में बताई ये मुख्य वजहें

पाकिस्तान सरकार के इस आर्थिक सर्वे में गरीबी के इस कदर बढ़ने के पीछे कई लंबे समय से चले आ रहे आर्थिक झटकों को जिम्मेदार ठहराया गया है। देश में इतिहास की सबसे ऊंची महंगाई दर का होना, पाकिस्तानी रुपये की कीमत का लगातार गिरना, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के स्थिरीकरण उपायों के कड़े फैसले, देश में आई विनाशकारी बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाएं और मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष इसकी मुख्य वजहें मानी गई हैं।

अमीरी-गरीबी की खाई हुई और चौड़ी

पाकिस्तान के इस सर्वे से एक और चिंताजनक बात सामने आई है कि पाकिस्तान में न सिर्फ गरीबी बढ़ी है, बल्कि अमीर और गरीब के बीच की असमानता भी गहरी हुई है। आय की असमानता को मापने वाला पैमाना यानी नेशनल गिनी कोफिशिएंट वर्ष 2018-19 में 28.4 पर था, जो वर्ष 2024-25 में बढ़कर 32.7 हो गया है। यह साफ दर्शाता है कि देश में गरीबी बढ़ने के साथ-साथ कमाई और संसाधनों के बंटवारे में भी भारी विसंगति आई है।

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