बड़ी मुश्किल में फंसा पाकिस्तान, इस 'डर' के मारे आनन-फानन में सऊदी अरब निकलें पीएम शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर!

Shehbaz Sharif Asim Munir Saudi Arabia: वाशिंगटन और उसके सहयोगियों द्वारा इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए बनाए जा रहे दबाव से पाकिस्तानी हुकूमत इस वक्त 'गहरे तनाव' में है। इसी भारी दबाव के बीच प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर आनन-फानन में सऊदी अरब के दौरे पर जा रहे हैं, ताकि इस बड़े संकट का कोई रास्ता निकाला जा सके

अपडेटेड May 29, 2026 पर 1:59 PM
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कई संगठनों ने अल्टीमेटम दिया है कि इजरायल से हाथ मिलाने पर देश में महा-संग्राम शुरू हो जाएगा

Pakistan Abraham Accords: मिडिल ईस्ट में 'अब्राहम अकॉर्ड्स' के विस्तार की आहट ने पाकिस्तान के हुक्मरानों की नींद उड़ा दी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से बढ़ रहे भारी कूटनीतिक दबाव के बीच पाकिस्तान के नागरिक और सैन्य नेतृत्व में एक नया महा-संग्राम छिड़ गया है।

अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक, वाशिंगटन और उसके सहयोगियों द्वारा इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने के लिए बनाए जा रहे दबाव से पाकिस्तानी हुकूमत इस वक्त 'गहरे तनाव' में है। इसी भारी दबाव के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फील्ड मार्शल आसिम मुनीर आनन-फानन में सऊदी अरब के दौरे पर जा रहे हैं, ताकि इस बड़े संकट का कोई रास्ता निकाला जा सके।

ट्रंप की 'पीस डील' से क्यों कांप रहा है पाकिस्तान?


अब्राहम अकॉर्ड्स की शुरुआत साल 2020 में ट्रंप के पहले कार्यकाल में हुई थी, जिसके तहत यूएई और बहरीन जैसे अरब देशों ने इजरायल के साथ अपने राजनयिक संबंध बहाल किए थे। अब ट्रंप प्रशासन इसके अगले चरण पर काम कर रहा है।

डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में अबाहम अकॉर्ड्स के भविष्य को ईरान के साथ चल रही व्यापक क्षेत्रीय वार्ताओं से जोड़ दिया है। इसके बाद से पाकिस्तान के हाइब्रिड शासन यानी सेना और सरकार में खलबली मची है कि वे खुद को इस नए जियोपॉलिटिकल सिनेरियो में कहां फिट करें।

राष्ट्रपति ट्रंप की 'बोर्ड ऑफ पीस' पहल में पाकिस्तान की भागीदारी को लेकर देश के भीतर पहले से ही शहबाज सरकार और सेना को तीखी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है।

रियाद के कंधे पर बंदूक रखने की तैयारी

शीर्ष सुरक्षा सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, पाकिस्तान के लिए अकेले दम पर इजरायल को मान्यता देने का फैसला करना राजनीतिक और धार्मिक रूप से पूरी तरह आत्मघाती साबित होगा।

इस्लामाबाद इस वक्त सऊदी अरब के अगले कदम पर पैनी नजर रखे हुए है। पाकिस्तानी अधिकारियों का मानना है कि सऊदी अरब की मंजूरी और समर्थन के बिना पाकिस्तान इस मोर्चे पर एक कदम भी आगे नहीं बढ़ सकता।

क्या है पाकिस्तान का रणनीतिक गेम प्लान

एक शीर्ष सुरक्षा सूत्र ने कहा कि, 'पहले सऊदी अरब, फिर पाकिस्तान'। यानी इस्लामाबाद चाहता है कि इजरायल को मान्यता देने के बाद होने वाले शुरुआती कूटनीतिक और धार्मिक विवादों को पहले सऊदी अरब झेले, ताकि उसके बाद पाकिस्तान अपनी रणनीति तय कर सके। पीएम शहबाज और जनरल आसिम मुनीर की सऊदी यात्रा का मेन एजेंडा भी यही है।

पाकिस्तान के भीतर फतवों की बौछार, गृहयुद्ध जैसे हालात की चेतावनी

भले ही पाकिस्तानी सेना और सरकार पर्दे के पीछे कूटनीतिक दबाव को मैनेज करने की कोशिश कर रहे हों, लेकिन देश के भीतर इसका विरोध बेहद हिंसक और उग्र रूप ले चुका है।

हाल ही में ईद के खुतबों के दौरान देश भर के विभिन्न संप्रदायों के मौलवियों और कट्टरपंथियों ने इजरायल के साथ किसी भी तरह के समझौते या अब्राहम अकॉर्ड्स में शामिल होने के खिलाफ सख्त चेतावनी और 'फतवे' जारी किए हैं।

धार्मिक पार्टियों और रूढ़िवादी संगठनों ने सेना और सरकार को साफ अल्टीमेटम दिया है कि अगर इजरायल की तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाने की थोड़ी भी कोशिश की गई, तो पूरे देश में ऐसा उग्र आंदोलन शुरू होगा जिसे संभालना नामुमकिन हो जाएगा।

कूटनीतिक दबाव बनाम घरेलू गुस्सा

सुरक्षा विश्लेषकों का कहना है कि पाकिस्तानी नेतृत्व इस समय केवल इस बात पर ध्यान केंद्रित कर रहा है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिल रहे भू-राजनीतिक दबाव को कैसे कम किया जाए और घरेलू स्तर पर भड़क रही धार्मिक ताकतों से सीधे टकराव से कैसे बचा जाए। फिलहाल, पाकिस्तान की रणनीति इस पूरे विवाद का पूरा बोझ सऊदी अरब पर डालने की है, ताकि वह खुद को इस आग से बचा सके।

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