अमेरिका ने फिर कर दी पाकिस्तान की खुले में बेइज्जती! उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया क्यों हुई ईरान शांति समझौते में देरी

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वेंस ने खुद इन वार्ताओं में शामिल होने की योजना रद्द कर दी थी। लेबनान में बढ़ी हिंसा के कारण बातचीत भी कुछ समय के लिए टाल दी गई थी। पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी को तब बढ़ गया था, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत ठप पड़ने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई हुई

अपडेटेड Jun 20, 2026 पर 3:01 PM
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अमेरिका ने फिर कर दी पाकिस्तान की खुले में बेइज्जती, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया क्यों हुई ईरान शांति समझौते में देरी

अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने पाकिस्तान की प्रेस फ्रीडम यानी मीडिया की आजादी को लेकर मजाकिया अंदाज में टिप्पणी की है। ईरान शांति समझौते की शर्तों को सार्वजनिक करने में हुई देरी पर सवाल पूछे जाने पर वेंस ने कहा कि पाकिस्तान और कतर में अमेरिका जैसा First Amendment और प्रेस की पूरी आजादी नहीं है।

उन्होंने कहा, "पाकिस्तान और कतर की व्यवस्था में प्रेस की स्वतंत्रता और फर्स्ट अमेंडमेंट जैसी व्यवस्था नहीं है।" यह टिप्पणी उन्होंने हल्के-फुल्के अंदाज में की, जब उनसे समझौते के विवरण जारी करने में हुई देरी के बारे में पूछा गया।

लेबनान में सीजफायर, शांति प्रयासों को मिली राहत


इसी बीच, इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच शुक्रवार को संघर्षविराम (सीजफायर) पर सहमति बन गई। हालिया हिंसा ने पश्चिम एशिया में व्यापक शांति समझौते की कोशिशों को खतरे में डाल दिया था।

स्विट्जरलैंड पहुंचे अमेरिकी दूत

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विशेष दूत स्टीव विटकोफ ईरान के साथ संभावित परमाणु समझौते पर बातचीत के लिए स्विट्जरलैंड रवाना हो गए हैं।

यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब वेंस ने खुद इन वार्ताओं में शामिल होने की योजना रद्द कर दी थी। लेबनान में बढ़ी हिंसा के कारण बातचीत भी कुछ समय के लिए टाल दी गई थी।

अमेरिका-ईरान समझौते में क्या है?

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने हाल ही में एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष को समाप्त करना है।

14 बिंदुओं वाले इस समझौते के तहत:

  • ईरान अपने समृद्ध (Enriched) यूरेनियम को कम करने पर सहमत हुआ है।
  • बदले में उसे व्यापक आर्थिक राहत मिलेगी।
  • पूरे पश्चिम एशिया में तत्काल संघर्ष विराम लागू करने की बात कही गई है।
  • सीजफायर को 60 दिनों तक बढ़ाने का प्रावधान है।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य से व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी।
  • ईरान पर लगे कई आर्थिक प्रतिबंधों में राहत दी जाएगी।
  • विदेशों में जमे ईरानी फंड जारी किए जाएंगे।
  • अमेरिका, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर के फंड की व्यवस्था में मदद करेगा।

कैसे शुरू हुआ था संघर्ष?

पश्चिम एशिया में यह तनाव 28 फरवरी को तब बढ़ गया था, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत ठप पड़ने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य कार्रवाई हुई। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी हितों से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही बाधित कर दी, जिससे वैश्विक तेल और व्यापार बाजारों में उथल-पुथल मच गई।

अब स्विट्जरलैंड में होने वाली नई वार्ताओं पर दुनिया की नजरें टिकी हैं, क्योंकि इन्हें क्षेत्र में स्थायी शांति और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की बहाली के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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