कंगाली से जूझ रहे पाकिस्तान को अब शराब का सहारा! 50 सालों बाद अब उठाने जा रहा ये कदम

Pakistan Alcohol Export: पाकिस्तान में हमेशा से शराब बैन नहीं थी। 1977 तक यह सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध थी। पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस्लामी दलों के दबाव में आकर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध के बाद से कंपनी केवल गैर-मुस्लिमों और विदेशी नागरिकों को ही सीमित मात्रा में आपूर्ति कर पाती है

अपडेटेड May 06, 2026 पर 3:03 PM
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1977 में जुल्फिकार अली भुट्टो द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद, यह पहली बार है जब यह कंपनी विदेशी मुद्रा कमाने के लिए ऐसा कर रही है

Pakistan Murree Brewery: शराब और पाकिस्तान? सुनने में थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन सरहद पार से एक ऐसी खबर आई है जिसने सबको चौंका दिया है। वैसे तो इस्लाम में शराब को हराम माना जाता है लेकिन कंगाली के दौर में पाकिस्तान अब इससे भी परहेज करने से नहीं कतरा रहा है। पाकिस्तान की एकमात्र शराब कंपनी, मरी ब्रुअरी (Murree Brewery) ने करीब 50 साल के लंबे 'वनवास' के बाद फिर से अंतरराष्ट्रीय बाजारों में शराब का एक्सपोर्ट शुरू कर दिया है। 1977 में जुल्फिकार अली भुट्टो द्वारा लगाए गए कड़े प्रतिबंधों के बाद, यह पहली बार है जब यह कंपनी विदेशी मुद्रा कमाने के लिए ऐसा कर रही है।

किन देशों को भेजी जा रही है शराब की खेप?

मरी ब्रुअरी को पाकिस्तान सरकार से मादक पेयों के निर्यात की अनुमति वर्ष 2025 में मिली थी। कंपनी ने विशेष रूप से उन देशों को निर्यात शुरू किया है जो इस्लामिक सहयोग संगठन (OIC) के सदस्य नहीं हैं। अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को शराब का निर्यात किया गया।


1860 में अंग्रेजों ने रखी थी नींव

मरी ब्रुअरी का इतिहास ब्रिटिश भारत से जुड़ा है। इसकी शुरुआत 1860 के दशक में ब्रिटिश उद्यमियों एडवर्ड डायर और एडवर्ड व्हिम्पर ने मरी हिल स्टेशन पर की थी। इसे खास तौर पर ब्रिटिश सैनिकों के लिए बीयर की आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए बनाया गया था। 1947 के विभाजन से पहले इसे एक पारसी परिवार ने खरीदा था। वर्तमान में इसके प्रमुख इस्फनयार भंडारा हैं, जो पाकिस्तान की नेशनल असेंबली के सदस्य भी हैं।

जुल्फिकार अली भुट्टो ने किया था बैन

पाकिस्तान में हमेशा से शराब बैन नहीं थी। 1977 तक यह सभी नागरिकों के लिए उपलब्ध थी। पर तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो ने इस्लामी दलों के दबाव में आकर इस पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया था। इस प्रतिबंध के बाद से कंपनी केवल गैर-मुस्लिमों और विदेशी नागरिकों को ही सीमित मात्रा में आपूर्ति कर पाती है।

विदेशी मुद्रा जुटाने को लेकर किया फैसला

आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह कदम विदेशी मुद्रा जुटाने का एक जरिया बन सकता है। पिछले वित्त वर्ष में कंपनी ने गैर-मादक पेयों के जरिए 10 करोड़ अमेरिकी डॉलर की आय दर्ज की थी। पाकिस्तान की इकॉनमी का हाल बेहाल है। कर्ज के बोझ से बुरी तरह दबी हुई पाक सरकार ने विदेशों से होने वाले मुनाफे को और बढ़ाने के लिए ये फैसला लिया है जो उन्हें थोड़ी राहत दे सकता है।

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