Pakistan News: पाकिस्तान में एक स्थानीय व्यवसायी द्वारा 125 साल पुराने ऐतिहासिक गुरुद्वारे को कथित तौर पर गिराए जाने को लेकर आक्रोश का माहौल है। इस घटना पर भारत ने कड़ी आपत्ति जताते हुए बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत ने इस घटना को बर्बरता करार देते हुए इसकी कड़ी निंदा की है। साथ ही पाकिस्तान सरकार से इस मामले की जांच करने, दोषियों को सजा देने और इस ऐतिहासिक सिख धार्मिक स्थल को दोबारा स्थापित करने को कहा है।
हमारी सहयोगी वेबसाइय 'न्यूज 18' की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान सरकार से इस घटना की तुरंत जांच करने, जिम्मेदार लोगों को कानून के कटघरे में लाने और ऐतिहासिक गुरुद्वारे के क्षतिग्रस्त हिस्सों को फिर से बहाल करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही भारत ने इस्लामाबाद से पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके पूजा स्थलों की रक्षा करने का आह्वान किया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस घटना पर बयान देते हुए कहा कि हमने पाकिस्तान के फारूकाबाद में 125 साल पुराने ऐतिहासिक और पवित्र 'गुरुद्वारा श्री गुरु सिंह सभा साहिब' को गिराए जाने से जुड़ी बेहद परेशान करने वाली रिपोर्ट देखी हैं।
उन्होंने आगे कहा कि स्थानीय अधिकारियों और इवेक्यूई ट्रस्ट प्रॉपर्टी बोर्ड (ETPB) द्वारा इस मामले में कोई कार्रवाई न करना गंभीर चिंता का विषय है। जायसवाल ने जोर देकर कहा कि यह घटना पाकिस्तान में धार्मिक अल्पसंख्यकों और उनके पूजा स्थलों पर होने वाले हमलों के निरंतर जारी पैटर्न को दर्शाती है।
पाकिस्तानी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, यह घटना लाहौर से करीब 70 किलोमीटर दूर फारूकाबाद की है। यहां स्थित इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे को 24 जून की रात को एक स्थानीय व्यवसायी ने कथित तौर पर ढहा दिया था।
अधिकारियों ने बताया कि इस गुरुद्वारे को गिराने के लिए संबंधित विभाग से अनिवार्य अनापत्ति प्रमाण पत्र भी नहीं लिया गया था और यह पूरी कार्रवाई अवैध रूप से की गई। यह पूरा मामला अधिकारियों के संज्ञान में तब आया जब स्थानीय सिख समुदाय के सदस्यों ने इस घटना के विरोध में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया।
पाकिस्तान सरकार ने दिए गुरुद्वारे को दोबारा बनाने के आदेश
सिख समुदाय के भारी विरोध प्रदर्शनों के बाद पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की मुख्यमंत्री मरियम नवाज ने इस घटना का संज्ञान लिया है। पंजाब के अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री रमेश सिंह अरोड़ा ने बुधवार को जिला अधिकारियों और औकाफ विभाग के प्रतिनिधियों के साथ घटनास्थल का दौरा किया। उन्होंने ऐलान किया कि इस ऐतिहासिक गुरुद्वारे के जीर्णोद्धार का काम तुरंत शुरू किया जाएगा।
अरोड़ा ने कहा कि प्रांतीय सरकार धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा करने और उनके पूजा स्थलों को सुरक्षित रखने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने औकाफ विभाग को इस जमीन के मालिकाना हक और कानूनी स्थिति की जांच करने के निर्देश भी दिए क्योंकि शुरुआती जानकारी के अनुसार यह जमीन औकाफ संपत्ति के रूप में रजिस्टर्ड नहीं थी।
व्यापारियों ने किया जीर्णोद्धार योजना का विरोध
उस स्थान के आसपास काम करने वाले स्थानीय व्यापारियों ने सरकार के इस जीर्णोद्धार प्रस्ताव पर चिंता व्यक्त की है। व्यापारियों का कहना है कि यह परिसर पिछले करीब 80 वर्षों से लावारिस या परित्यक्त पड़ा हुआ था।
इस लंबी अवधि के दौरान कई परिवार यहां आकर बस गए और कई तरह के व्यवसाय स्थापित हो चुके हैं। व्यापारियों ने सरकार से मांग की है कि यदि गुरुद्वारे के पुनर्निर्माण कार्य के कारण लोगों को वहां से बेदखल किया जाता है तो प्रभावित निवासियों को रहने के लिए वैकल्पिक आवास और आजीविका का साधन दिया जाना चाहिए।