Pakistan Rejects Abraham Accords: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पाकिस्तान ने एक बड़ा झटका दिया है। ट्रंप की ओर से मिडिल ईस्ट और दक्षिण एशिया में शांति बहाली के लिए बढ़ाए गए एक बहुत बड़े कूटनीतिक कदम को पाकिस्तान ने सिरे से खारिज कर दिया है। पाकिस्तान ने ट्रंप के उस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है, जिसमें उसे इजरायल के साथ रिश्ते सामान्य करने वाले 'अब्राहम अकॉर्ड' का हिस्सा बनने के लिए कहा गया था।
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने मीडिया से बातचीत में साफ कर दिया है कि इस्लामाबाद ऐसे किसी भी समझौते का समर्थन नहीं करेगा, जो पाकिस्तान की 'मूल विचारधारा और बुनियादी सिद्धांतों' के खिलाफ जाता हो। अमेरिकी दबाव के आगे झुकने से इनकार करते हुए पाकिस्तान ने साफ कहा है कि वह इजरायल पर भरोसा नहीं कर सकता।
ट्रंप का क्या था 'मेगा प्लान'? जिसने बढ़ाई पाकिस्तान की टेंशन
यह पूरा विवाद डोनाल्ड ट्रंप के एक सोशल मीडिया पोस्ट के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने एक ऐतिहासिक क्षेत्रीय समझौते का खाका खींचा था। ट्रंप ने 'ट्रुथ सोशल' पर एक लंबी पोस्ट लिखकर दावा किया कि ईरान के साथ अमेरिकी परमाणु समझौते को लेकर बातचीत सही दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि ईरान के साथ डील फाइनल होते ही कई बड़े मुस्लिम और अरब देशों को एक साथ 'अब्राहम अकॉर्ड' पर दस्तखत करने चाहिए।
ट्रंप ने अपनी इस पोस्ट में सऊदी अरब, कतर, पाकिस्तान, तुर्की, मिस्र, जॉर्डन और बहरीन जैसे देशों का नाम लेते हुए कहा कि वे इस ऐतिहासिक समझौते का हिस्सा बनें। उन्होंने यह भी दावा किया कि इस सिलसिले में उनकी पाकिस्तान के आर्मी चीफ जनरल आसिम मुनिर सहित कई वैश्विक नेताओं से बातचीत हुई है।
इजरायल पर बरसे पाकिस्तानी रक्षा मंत्री
ट्रंप के इस बड़े दांव पर पाकिस्तानी टीवी चैनल 'समा टीवी' को दिए इंटरव्यू में रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने बेहद तीखा रुख अपनाया। आसिफ ने कहा, 'व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि हमें किसी भी ऐसे समझौते में शामिल नहीं होना चाहिए जो हमारी बुनियादी विचारधारा से टकराता हो। हमारा रुख इस मामले पर हमेशा से बिल्कुल साफ रहा है और यह समझौता हमें किसी भी कीमत पर मंजूर नहीं है'।
इजरायल के साथ किसी भी कूटनीतिक जुड़ाव की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा, 'आप उन लोगों के साथ मेज पर कैसे बैठ सकते हैं, जिनकी बातों पर एक दिन के लिए भी भरोसा नहीं किया जा सकता?'
इजरायल को देश मानने से इनकार
पाकिस्तान ने अपनी बात को मजबूत करने के लिए अपनी दशकों पुरानी पासपोर्ट नीति का भी जिक्र किया। ख्वाजा आसिफ ने याद दिलाया कि इजरायल को मान्यता न देने की पाकिस्तान की नीति कितनी सख्त है। उन्होंने कहा, 'हम दुनिया के एकमात्र ऐसे देश हैं जिसके पासपोर्ट पर साफ तौर पर लिखा होता है कि यह इजरायल की यात्रा के लिए वैध नहीं है, वहां इजरायल का नाम तक शामिल नहीं है'।
अब्राहम अकॉर्ड साल 2020 में अमेरिका की मध्यस्थता में हुआ एक ऐतिहासिक समझौता है। इसके तहत इजरायल और कई अरब देशों जैसे- संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, मोरक्को और सूडान के बीच राजनयिक, आर्थिक और सुरक्षा संबंधों को सामान्य किया गया था।
ट्रंप का दावा है कि इस समझौते से जुड़ने वाले देशों को 'आर्थिक, वित्तीय और सामाजिक बूम' मिला है और अगर पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे देश इससे जुड़ते हैं, तो यह मिडिल ईस्ट के इतिहास की सबसे बड़ी डील होगी। ट्रंप ने चेतावनी भी दी कि अगर यह समझौता नहीं हुआ, तो क्षेत्र में पहले से भी बड़ा युद्ध छिड़ सकता है। हालांकि, पाकिस्तान के इस सख्त इनकार के बाद ट्रंप के इस 'मेगा मिडल ईस्ट प्लान' को एक बड़ा झटका लगा है।