'झूठ बोल रहा है अमेरिका...', ट्रंप के दावे पर बुरी तरह भड़का ईरान; डील टूटने से बढ़ सकता है तेल संकट!

Iran Rejects Nuclear Concessions: ट्रंप के दावों को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। इसके साथ ही तेहरान ने बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। उनका कहना है कि 'हम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करने जा रहे हैं' और जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि डील करीब है, वे सफेद झूठ बोल रहे हैं'

अपडेटेड May 25, 2026 पर 5:12 PM
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ईरान ने कहा है कि 'हम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करने जा रहे हैं'

Trump-Iran Deal Updates: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के बीच होने वाली पीस डील पूरी तरह खटाई में पड़ती नजर आ रही है। ईरान ने अमेरिका के दावों को सिरे से खारिज करते हुए बेहद आक्रामक रुख अपना लिया है। ईरान ने दोटूक कहा है कि 'हम अमेरिका के साथ किसी भी समझौते पर दस्तखत नहीं करने जा रहे हैं' और जो लोग यह दावा कर रहे हैं कि डील करीब है, वे सफेद झूठ बोल रहे हैं।

तेहरान और वाशिंगटन के बीच जारी यह तनातनी अब इस हद तक बढ़ चुकी है कि ईरानी अधिकारियों ने साफ संकेत दिए हैं कि ईरान इस पूरी बातचीत को ही रद्द करने की कगार पर पहुंच गया है। 8 अप्रैल को हुए सीजफायर के बाद से इसे कूटनीति का सबसे नाजुक दौर माना जा रहा है।

यूरेनियम पर ईरान ने किया झुकने से इनकार


इस विवाद की सबसे बड़ी वजह परमाणु कार्यक्रम और यूरेनियम भंडार को लेकर दोनों देशों के अलग-अलग दावे हैं। अमेरिकी मीडिया में आ रही उन खबरों को ईरान के विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से खारिज कर दिया है, जिनमें कहा गया था कि तेहरान अपने समृद्ध यूरेनियम का भंडार अमेरिका को सौंपने पर राजी हो गया है। ईरान ने इसे 'सरासर झूठ' बताया है।

ईरान का कहना है कि किसी भी ड्राफ्ट में यूरेनियम सौंपने जैसी कोई शर्त न तो शामिल है और न ही कभी होगी। ईरान का रुख साफ है कि यूरेनियम संवर्धन पर कोई भी बात शुरुआती समझौता होने के बाद ही की जाएगी, उससे पहले नहीं।

होर्मुज में टोल पर आर-पार की जंग

परमाणु विवाद के अलावा 'होर्मुज' पर ईरान का नियंत्रण दूसरा सबसे बड़ा तनाव का केंद्र बना हुआ है। अप्रैल में युद्धविराम के बावजूद ईरान ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से 'सर्विस फीस' और पर्यावरण सुरक्षा के नाम पर टैक्स वसूलना जारी रखा है। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने इस नीति का बचाव किया है।

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने नई दिल्ली दौरे के समय साफ कहा था कि ईरान का यह टोल सिस्टम किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। अमेरिका का मानना है कि जब तक ईरान इस समुद्री मार्ग को पूरी तरह प्रतिबंध मुक्त नहीं करता, तब तक कोई कूटनीतिक समझौता असंभव है।

ट्रंप और नेतन्याहू की जुगलबंदी: 'परमाणु खतरा पूरी तरह खत्म हो'

ईरान की यह तल्खी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बयानों के बाद और ज्यादा बढ़ गई है। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर लिखा था कि उन्होंने अपने वातार्कारों से कहा है कि वे 'डील के लिए जल्दबाजी न करें, क्योंकि समय हमारे साथ है।' साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक कोई ठोस समझौता नहीं होता, अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी जारी रहेगी।

इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि उनके और ट्रंप के बीच सहमति बनी है कि ईरान के साथ होने वाले किसी भी अंतिम समझौते का मतलब सिर्फ और सिर्फ 'ईरान के परमाणु खतरे का पूरी तरह खात्मा' होना चाहिए।

पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता भी बेअसर!

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब पाकिस्तान और चीन मिलकर दोनों देशों के बीच बीच-बचाव करने की कोशिशों में जुटे हैं। सोमवार को ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने बीजिंग में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात कर शांति बहाली पर चर्चा की थी। लेकिन ईरान के ताजा रुख ने इन कोशिशों पर पानी फेर दिया है।

क्रूड ऑयल मार्केट में हड़कंप

ईरान की इस आक्रामक प्रतिक्रिया के बाद वैश्विक तेल बाजारों में एक बार फिर अनिश्चितता का माहौल है। इससे पहले जब ट्रंप ने डील के संकेत दिए थे, तब ब्रेंट क्रूड और डब्ल्यूटीआई (WTI) की कीमतों में 5 फीसदी की भारी गिरावट आई थी। लेकिन अब बातचीत टूटने के डर से होर्मुज जलमार्ग पर दोबारा संकट के बादल मंडराने लगे हैं, जिससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।

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