ट्रंप की ईरान डील पर अमेरिकी नेताओं का ही फूटा गुस्सा, बोले- 'ये अमेरिका फर्स्ट नहीं, तबाही वाली गलती', इन 5 सुलगते मुद्दों पर फंसा है पेंच
US Iran Deal 5 Big Issues: ईरान का कहना है कि वह होर्मुज से बिना किसी टैक्स के जहाजों को गुजरने देगा, लेकिन पहले अमेरिका को अपनी समुद्री नाकेबंदी हटानी होगी। वहीं ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जब तक फाइनल एग्रीमेंट नहीं हो जाता, अमेरिकी नाकेबंदी पूरी ताकत से लागू रहेगी
रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारी प्रस्तावित समझौते की मुख्य शर्तों को बिल्कुल अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं
US-Iran Peace Deal Update: ईरान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा दावा किया है। उनका दावा ये है कि अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने का समझौता अब अंतिम फेज में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, तेहरान ने भी बातचीत में प्रगति के पॉजिटिव संकेत दिए हैं। हालांकि, ट्रंप के इस दावे के पीछे की सच्चाई कुछ और ही है।
न्यू यॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारी प्रस्तावित समझौते की मुख्य शर्तों को बिल्कुल अलग-अलग तरीके से पेश कर रहे हैं। यह लड़ाई सिर्फ परमाणु कार्यक्रम की नहीं, बल्कि मिडिल ईस्ट में दबदबे और 5 बड़े मुद्दों की है। इतना ही नहीं, इस डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को अपनी ही रिपब्लिकन पार्टी के भीतर भारी विरोध और गुस्से का सामना करना पड़ रहा है।
आइए आसान भाषा में समझते हैं कि आखिर वो 5 बड़े मुद्दे कौन से हैं, जिन पर यह डील कभी भी टूट सकती है।
1. ईरान का 'यूरेनियम का कचरा' कौन हटाएगा?
इस पूरी डील की रीढ़ ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, लेकिन दोनों देशों के बीच दावों का बड़ा अंतर है। अमेरिका का कहना है कि ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को नष्ट या सरेंडर करने पर सहमत हो गया है। वहीं, ईरान के तीन वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ कह दिया है कि परमाणु स्टॉक को लेकर अभी कोई समझौता नहीं हुआ है और इस पर अगले 30 से 60 दिनों तक बातचीत होगी।
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के अनुसार, ईरान के पास फिलहाल 60% शुद्धता वाला लगभग 440.9 किलो यूरेनियम है, जो परमाणु बम बनाने से महज एक तकनीकी कदम दूर है। इसके अलावा 11 टन कम संवर्धित यूरेनियम भी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भारत दौरे पर संकेत दिया कि अमेरिका तुरंत पूरी तरह परमाणु कार्यक्रम बंद कराने के बजाय एक अंतरिम व्यवस्था के लिए तैयार है। उन्होंने कहा, 'आप 72 घंटे में नैपकिन के पीछे परमाणु डील फाइनल नहीं कर सकते।'
ट्रंप प्रशासन के इस नरम रुख से उनकी अपनी ही पार्टी के दिग्गज नेता भड़क गए हैं। सीनेटर टेड क्रूज ने चेतावनी दी है कि ईरान को अरबों डॉलर देना और यूरेनियम संवर्धन की छूट देना एक 'तबाही वाली गलती' होगी। वहीं पूर्व विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने इसे अमेरिका फर्स्ट नीति के खिलाफ बताया है।
2. होर्मुज की नाकेबंदी और 'टोल टैक्स' पर रार
होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल सप्लाई रूट है। युद्ध के दौरान ईरान ने यहां जहाजों को निशाना बनाकर ट्रैफिक रोक दिया था, जिससे दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ गए। जवाब में अमेरिकी नौसेना ने ईरानी बंदरगाहों की सख्त नाकेबंदी कर दी थी।
ईरान का कहना है कि वह होर्मुज से बिना किसी टैक्स के जहाजों को गुजरने देगा, लेकिन पहले अमेरिका को अपनी समुद्री नाकेबंदी हटानी होगी। वहीं ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि जब तक फाइनल एग्रीमेंट नहीं हो जाता, अमेरिकी नाकेबंदी पूरी ताकत से लागू रहेगी।
अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान को होर्मुज जलमार्ग पर रणनीतिक बढ़त मिली, तो वह पूरे खाड़ी देश के तेल इन्फ्रास्ट्रक्चर को तबाह करने की ताकत बनाए रखेगा।
3. ईरान के फ्रीज पड़े 25 अरब डॉलर
ईरान इस डील के बदले अंतरराष्ट्रीय बैंकों में फ्रीज पड़े अपने 25 अरब डॉलर की रकम को तुरंत रिलीज कराना चाहता है। अमेरिकी अधिकारी तुरंत पैसा देने के मूड में नहीं हैं। उनका कहना है कि जब ईरान परमाणु वादों को जमीन पर पूरा करेगा, तभी पैसा धीरे-धीरे रिलीज होगा।
ईरान को डर है कि ट्रंप पिछली बार 2015 की ओबामा के समय हुई न्यूक्लियर डील की तरह इस बार भी समझौते से पीछे न हट जाएं। वहीं ट्रंप पर अपनी पार्टी का दबाव है कि वे ईरान को ओबामा की तरह आसानी से कैश न सौंपें।
4. क्या ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप लेबनान और हिजबुल्लाह मानेंगे सीजफायर?
ईरानी अधिकारियों का दावा है कि इस समझौते के बाद हिजबुल्लाह सहित सभी मोर्चों पर जंग पूरी तरह रुक जाएगी। लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने अभी तक सार्वजनिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं की है कि हिजबुल्लाह इस डील का हिस्सा है या नहीं।
सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी के चेयरमैन सीनेटर रोजर विकर ने चेतावनी दी है कि अगर ईरान के इन लड़ाके ग्रुप्स को बिना छुए छोड़ दिया गया, तो अमेरिकी सेना द्वारा चलाया गया 'ऑपरेशन एपिक फ्युरी' पूरी तरह बेअसर और बेकार हो जाएगा।
5. ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलों से इजरायल की बढ़ी धड़कन
शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने कहा था कि डील के लिए ईरान को अपनी मिसाइलों की रेंज कम करनी होगी या उन्हें सरेंडर करना होगा। लेकिन न्यू यॉर्क टाइम्स के मुताबिक, मौजूदा ड्राफ्ट में ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल स्टॉकपाइल का कोई जिक्र ही नहीं है।
इजरायली अधिकारियों और विशेषज्ञों का मानना है कि मिसाइलों को छुए बिना की गई कोई भी डील इजरायल के लक्ष्यों से बहुत दूर होगी। अगर ईरान के पास मिसाइलें रहीं, तो वह भविष्य में कभी भी इजरायल पर दोबारा बड़ा हमला कर सकता है।