ईरान से 'डील' या 'नो डील'? बार-बार क्यों बदल रहे हैं ट्रंप के सुर, समझिए उनकी उत्तर कोरिया वाली ये 'सीक्रेट' चाल

Trump Iran Peace Deal Analysis: ट्रंप की जुबान हिलते ही दुनिया भर के बाजारों में अरबों डॉलर का उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है। जब ट्रंप ने कहा कि 'डील होने वाली है', तो कच्चे तेल की कीमतें तुरंत धड़ाम से गिर गईं और एशियाई बाजारों में भारी तेजी आई। जैसे ही उन्होंने 'कोई जल्दी नहीं है' वाला बयान दिया बाजार पलट गया

अपडेटेड May 25, 2026 पर 1:26 PM
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क्या ऐसा करने के पीछे ट्रंप की कोई सोची-समझी कूटनीति है या असली खेल कुछ और है? समझिए

Trump-Iran Peace Deal: ट्रंप और ईरान के बीच होने वाले संभावित शांति समझौते को लेकर इस समय पूरी दुनिया की नजरें वाशिंगटन और तेहरान पर टिकी हैं। लेकिन इस बीच सबसे बड़ा रहस्य खुद ट्रंप का रुख बन गया है। महज 24 घंटे के भीतर उन्होंने पहले तो यह बयान दिया कि ईरान के साथ समझौता 'लगभग तय' हो चुका है, जिससे दुनिया भर के शेयर बाजारों में तेजी आ गई। लेकिन इसके कुछ ही घंटों बाद उन्होंने यू-टर्न लेते हुए कह दिया कि समझौता करने की 'कोई जल्दी नहीं' है और जब तक ईरान उनकी सभी शर्तें नहीं मानता, तब तक पाबंदियां जारी रहेंगी।

आखिर ट्रंप ऐसा क्यों कर रहे हैं? क्या यह कोई सोची-समझी कूटनीति है या इसके पीछे का खेल कुछ और है? आइए विस्तार से समझते हैं इसके पीछे की इनसाइड स्टोरी।

1. ट्रंप की 'आर्ट ऑफ स्ट्रेटेजिक केओस'


जानकारों का कहना है कि ट्रंप की यह रणनीति उनके पहले कार्यकाल की उत्तर कोरिया नीति जैसी ही है, जिसे 'आर्ट ऑफ स्ट्रेटेजिक केओस' या रणनीतिक भ्रम कहा जाता है। इसके तहत एक ही दिन के भीतर अत्यधिक उम्मीद और कड़ी सैन्य कार्रवाई की धमकी दोनों का इस्तेमाल किया जाता है।

ट्रंप के समर्थक मानते हैं कि इस अनिश्चितता से सामने वाले देश पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनता है और वह बातचीत की टेबल पर झुकने को मजबूर होता है। वहीं आलोचकों का कहना है कि इससे सिर्फ भ्रम और असमंजस की स्थिति पैदा होती है।

2. भू-राजनीति से ज्यादा वित्तीय बाजारों पर असर

इस पूरी कहानी का सबसे दिलचस्प और हैरान करने वाला पहलू यह है कि ट्रंप की जुबान हिलते ही दुनिया भर के बाजारों में अरबों डॉलर का उतार-चढ़ाव शुरू हो जाता है। जब ट्रंप ने कहा कि 'डील होने वाली है', तो निवेशकों को लगा कि दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होर्मुज का रास्ता खुल जाएगा और तेल की सप्लाई सामान्य हो जाएगी। इस उम्मीद में कच्चे तेल की कीमतें तुरंत धड़ाम से गिर गईं और एशियाई बाजारों में भारी तेजी आई।

जैसे ही उन्होंने 'कोई जल्दी नहीं है' वाला बयान दिया, वॉल स्ट्रीट और वैश्विक बाजारों में फिर से सतर्कता का माहौल बन गया। यानी उनके बयान बदलते ही बाजार पलट गया।

अमेरिकी मीडिया और वित्तीय विश्लेषकों ने अब इस बात पर चिंता जाहिर करना शुरू कर दिया है कि कैसे अमेरिकी राष्ट्रपति का महज एक बयान तेल की कीमतों, शेयरों और निवेशकों के सेंटिमेंट को पलक झपकते ही बदल देता है। हालांकि किसी भी गलत गतिविधि के सबूत नहीं मिले हैं, लेकिन मार्केट की इस भारी वोलैटिलिटी पर बहस तेज हो गई है।

3. 'रियालिटी चेक': कहां फंसा है असली पेंच?

भले ही ट्रंप इस समझौते को 'लगभग पूरा' बता रहे हों, लेकिन वाशिंगटन और तेहरान के बीच जमीन पर अभी भी कई बड़े मतभेद बरकरार हैं, जिन्हें सुलझाना आसान नहीं है।

अमेरिका और उसके विदेश मंत्री मार्को रुबियो का साफ कहना है कि ईरान को अपने समृद्ध यूरेनियम का वो हिस्सा छोड़ना होगा, जिसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में हो सकता है।

दूसरी तरफ, ईरान ने अमेरिकी दावों को खारिज कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ईरानी सूत्रों ने साफ किया है कि वे अपना यूरेनियम भंडार सौंपने के लिए बिल्कुल भी तैयार नहीं हैं। ईरान की सरकारी न्यूज एजेंसी 'फार्स' ने तो अमेरिकी दावों को 'हकीकत से परे' करार दिया है।

'डील' हो न हो, ट्रंप पर टिकी रहेंगी सभी की नजरें

इस समय ट्रंप प्रशासन की ईरान नीति दो समानांतर पटरियों पर चल रही है। एक तरफ दुनिया को जल्द ही शांति स्थापना का भरोसा दिया जा रहा है, तो दूसरी तरफ सख्त लहजे में चेतावनी भी दी जा रही है। इस अनिश्चितता का नतीजा यह है कि ईरान भी लगातार कयास लगाने पर मजबूर है। वैश्विक बाजार भी हर पल उनके बयानों पर रिएक्ट कर रहा है, और पूरी दुनिया का ध्यान इस बात पर केंद्रित है कि ट्रंप का अगला कदम या अगला सोशल मीडिया पोस्ट क्या होगा।

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