भारत की तरक्की से पाकिस्तानियों को हो रही जलन! अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर पाक मीडिया ने शहबाज सरकार को घेरा

Pakistan On India-US Trade Deal: पाकिस्तान के लिए चिंता की बात यह है कि उसके सामानों पर अब भी 19% का टैरिफ लग रहा है। ट्रेड डील के बाद भारत को मिलने वाली रियायतें सीधे तौर पर पाकिस्तान के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को चोट पहुंचा सकती हैं, क्योंकि भारतीय कपड़े अमेरिकी बाजार में पाकिस्तानी माल से सस्ते हो जाएंगे

अपडेटेड Feb 09, 2026 पर 3:58 PM
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6 फरवरी को हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है

Pakistan On India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच हुए ऐतिहासिक अंतरिम व्यापार समझौते ने न केवल वैश्विक बाजारों में हलचल मचाई है, बल्कि सरहद पार पाकिस्तान में भी एक नई बहस छेड़ दी है। पाकिस्तान के 'डॉन' (Dawn) अखबार में छपे एक तीखे लेख में वरिष्ठ व्यापार विशेषज्ञ डॉ. मंजूर अहमद ने शहबाज शरीफ सरकार की नीतियों की जमकर आलोचना की है। लेख में कहा गया है कि जहां भारत ने अपनी पुरानी व्यापारिक नीतियों को छोड़कर अमेरिका के साथ एक मजबूत रणनीतिक साझेदारी की है, वहीं पाकिस्तान आज भी 'खानापूर्ति' वाले समझौतों के भरोसे बैठा है। डॉ. अहमद के अनुसार, इस्लामाबाद ने कभी भी वाशिंगटन के साथ एक व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लिए 'गंभीर प्रयास' ही नहीं किए।

भारत का मास्टरस्ट्रोक और पाकिस्तान का डर

6 फरवरी को हुए व्यापार समझौते के तहत अमेरिका ने भारतीय सामानों पर टैरिफ 25% से घटाकर 18% कर दिया है। इसके बदले भारत ने $500 अरब के अमेरिकी सामान खरीदने और रूसी तेल का आयात बंद करने का बड़ा फैसला लिया है। डॉ. अहमद ने इसे भारत की पुरानी सोच से एक 'बड़ा अलगाव' बताया है। पाकिस्तान के लिए चिंता की बात यह है कि उसके सामानों पर अब भी 19% का टैरिफ लग रहा है। अमेरिका, पाकिस्तान का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है, जहां सालाना $5 अरब से अधिक का एक्सपोर्ट करता है। अब भारत को मिलने वाली रियायतें सीधे तौर पर पाकिस्तान के टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को चोट पहुंचा सकती हैं, क्योंकि भारतीय कपड़े अमेरिकी बाजार में पाकिस्तानी माल से सस्ते हो जाएंगे।


शहबाज सरकार पर 'प्रतीकात्मक' समझौतों का आरोप

लेख में शहबाज सरकार की व्यापारिक दूरदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। डॉ. अहमद का कहना है कि पाकिस्तान हमेशा से एकतरफा टैरिफ छूट या बहुत ही सीमित उत्पादों के लिए प्रतीकात्मक समझौतों की भीख मांगता रहा है, जिससे न तो बाजार में स्थायी पहुंच मिली और न ही निर्यात में विविधता आई। हालांकि, पाकिस्तान ने जुलाई 2025 में अमेरिका के साथ एक ऊर्जा साझेदारी की थी, जिसमें बलूचिस्तान और पंजाब के तेल भंडारों को विकसित करने और क्रिप्टोकरेंसी जैसे क्षेत्रों में सहयोग की बात थी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की हालिया ट्रेड डील के मुकाबले यह समझौता काफी छोटा और अपर्याप्त है।

भारत ने कहां मारी बाजी?

दिलचस्प बात यह है कि जहां पाकिस्तानी मीडिया इस ट्रेड डील को भारत का 'समर्पण' बता रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां करती है। भारतीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने स्पष्ट किया है कि भारत ने अमेरिकी दबाव के बावजूद अपने डेयरी और संवेदनशील कृषि उत्पादों को पूरी तरह सुरक्षित रखा है। भारत ने केवल उन्हीं क्षेत्रों में दरवाजे खोले हैं जहां घरेलू किसानों के हितों को कोई खतरा नहीं है। पाकिस्तान के लिए सबक यह है कि वैश्विक व्यापार में बने रहने के लिए कूटनीतिक और आर्थिक संतुलन बनाना जरूरी है।

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