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PoK Bandh: पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत! फुल शटडाउन और खाली पड़ीं सड़कें, क्यों सुलग रहा है ये इलाका?

PoK Protests: आज यानी बुधवार 9 सितंबर को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में बड़े पैमाने पर चक्का-जाम और शटडाउन (दुकानें बंद रखने) की हड़ताल हुई। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान के प्रशासन वाले इस इलाके की सरकार और जिसे वे राज्य का बढ़ता दमन कहते हैं। उसके खिलाफ अपना आंदोलन तेज कर दिया है

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Sep 09, 2026 पर 2:03 PM
PoK Bandh: पीओके में पाकिस्तान सरकार के खिलाफ बगावत! फुल शटडाउन और खाली पड़ीं सड़कें, क्यों सुलग रहा है ये इलाका?
PoK Protests: पाकिस्तान सरकार के अत्याचार के खिलाफ पीओके में बगावत का आगाज हो चुका है

PoK Protests: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के लोगों ने शहबाज शरीफ की सरकार के अत्याचार के खिलाफ अब खुलकर मोर्चा खोल दिया है। PoK में बुधवार (9 सितंबर) को एक बार फिर विरोध प्रदर्शन तेज हो गया। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के ऐलान पर पूरे क्षेत्र में शटर-डाउन और व्हील-जाम हड़ताल का व्यापक असर देखने को मिला। कई इलाकों में दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद रहे। जबकि सड़कों पर सार्वजनिक परिवहन भी प्रभावित हुआ। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के सड़कों पर उतरने से सामान्य जनजीवन प्रभावित रहा।

JAAC लंबे समय से पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर की सरकार और इस्लामाबाद की नीतियों के खिलाफ आंदोलन चला रही है। संगठन में व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और विभिन्न सामाजिक संगठनों से जुड़े लोग शामिल हैं। आंदोलन अब केवल आर्थिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहा। बल्कि राजनीतिक प्रतिनिधित्व, स्थानीय शासन और पाकिस्तान के कथित हस्तक्षेप जैसे मुद्दे भी इसके केंद्र में आ गए हैं।

12 आरक्षित सीटों को खत्म करने की मांग

JAAC की प्रमुख मांगों में क्षेत्रीय विधानसभा में पाकिस्तान में बसे कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित 12 सीटों को खत्म करना शामिल है। प्रदर्शनकारियों का तर्क है कि इन सीटों की वजह से स्थानीय आबादी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व का संतुलन प्रभावित होता है और पाकिस्तान समर्थित राजनीतिक प्रभाव को बढ़ावा मिलता है। यह मुद्दा हालिया विधानसभा चुनावों के दौरान भी काफी विवादित रहा। चुनाव हिंसा, सुरक्षा प्रतिबंधों और JAAC के बहिष्कार के बीच हुए। कुछ क्षेत्रों में बिगड़ती कानून-व्यवस्था के कारण मतदान भी टालना पड़ा।

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