ईरान का यूरेनियम दिलाने में पुतिन ने ट्रंप को दिया मदद का ऑफर! 90 मिनट फोन पर हुई दोनों की बात

यूरेनियम कम मात्रा में बिजली बनाने के काम आता है, लेकिन ज्यादा शुद्ध होने पर यह परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल हो सकता है। ईरान के पास मौजूद यूरेनियम 60% तक शुद्ध बताया गया है, जबकि परमाणु बम के लिए लगभग 90% शुद्धता जरूरी होती है

अपडेटेड Apr 30, 2026 पर 2:22 PM
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ईरान का यूरेनियम दिलान में पुतिन ने ट्रंप को दिया मदद का ऑफर, 90 मिनट फोन पर हुई दोनों की बात

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फोन कॉल के दौरान उन्हें ईरान के “एनरिचमेंट” (यानी यूरेनियम को ज्यादा ताकतवर बनाने की प्रक्रिया) में मदद करने की पेशकश की। ट्रंप के मुताबिक, उन्होंने यह मदद लेने से मना कर दिया और कहा कि वह चाहते हैं कि पुतिन पहले यूक्रेन युद्ध खत्म करने पर ध्यान दें।

संयुक्त राष्ट्र की परमाणु निगरानी संस्था IAEA ने भी बताया है कि रूस अभी भी ईरान से यूरेनियम का भंडार हटाने को तैयार है। यह वही यूरेनियम है जो परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल हो सकता है।

ट्रंप ने ईरान के इस यूरेनियम को “न्यूक्लियर डस्ट” कहा है और कहा है कि यही वजह है कि अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ने ईरान की सैन्य ताकत को काफी कमजोर किया है।


ईरान के पास कितना यूरेनियम है?

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ सालों में ईरान ने लगभग 11 टन (22,000 पाउंड) तक समृद्ध यूरेनियम जमा कर लिया है। यह बड़ी मात्रा है, जो चिंता का कारण बनी हुई है।

IAEA का मानना है कि इसका बड़ा हिस्सा ईरान के इस्फहान न्यूक्लियर सेंटर में हो सकता है, लेकिन इसकी पूरी पुष्टि नहीं हो पाई है क्योंकि वहां पूरी तरह से जांच नहीं हो सकी है।

खतरा क्यों है?

यूरेनियम कम मात्रा में बिजली बनाने के काम आता है, लेकिन ज्यादा शुद्ध होने पर यह परमाणु हथियार बनाने में इस्तेमाल हो सकता है। ईरान के पास मौजूद यूरेनियम 60% तक शुद्ध बताया गया है, जबकि परमाणु बम के लिए लगभग 90% शुद्धता जरूरी होती है।

पूरा विवाद कैसे शुरू हुआ?

2015 में ईरान और दुनिया के कई देशों के बीच एक समझौता हुआ था, जिसमें ईरान को अपने यूरेनियम को सीमित स्तर तक रखने की शर्त थी। लेकिन 2018 में अमेरिका ने इस समझौते से बाहर निकलने का फैसला किया।

इसके बाद ईरान ने भी यूरेनियम संवर्धन बढ़ाना शुरू कर दिया और स्तर लगातार ऊपर जाता गया।

2025 में अमेरिका और इज़राइल के बीच तनाव और हमलों के बाद ईरान ने IAEA के साथ सहयोग भी रोक दिया, जिससे उसके परमाणु कार्यक्रम पर निगरानी और मुश्किल हो गई।

असल चिंता क्या है?

सबसे बड़ी समस्या यह है कि अब अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों को ठीक से पता नहीं है कि ईरान का पूरा यूरेनियम भंडार कहाँ है, और इसी वजह से दुनिया में परमाणु खतरे को लेकर चिंता बनी हुई है।

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