मैक्सिको, चीन से लेकर भारत तक फैला था 'एल मेंचो' के कार्टेल का जाल, जानिए अंडमान सागर में ₹6,000 करोड़ के ड्रग्स जब्ती की पूरी कहानी

El Mencho Killing: एल मेंचो के कार्टेल द्वारा सप्लाई की जाने वाली ड्रग्स की शुद्धता बहुत अधिक थी। एक अधिकारी के अनुसार, एल मेंचो की ड्रग्स दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट द्वारा बेची जाने वाली ड्रग्स की तुलना में कहीं बेहतर थी, जिससे बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा थी

अपडेटेड Feb 24, 2026 पर 7:44 AM
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भारतीय एजेंसियां पहले से ही ISI और दाऊद नेटवर्क से जूझ रही थीं, ऐसे में मैक्सिकन और चीनी कार्टेल की एंट्री ने सुरक्षा के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी थी

El Mencho’s Cartel: मैक्सिकन ड्रग किंग नेमेसियो ओसेगुएरा सरवेंटेस यानी एल मेंचो की मौत से मैक्सिको में हिंसा भड़क गई है। हालांकि, भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के लिए भी यह एक बड़ी राहत की खबर बनकर आई है। एल मेंचो का 'जलिस्को न्यू जेनरेशन कार्टेल' (CJNG) दुनिया के सबसे शक्तिशाली आपराधिक संगठनों में से एक था। भारतीय एजेंसियों ने पहले ही पहचान कर ली थी कि यह कार्टेल भारत की समुद्री सुरक्षा और नशीली दवाओं के नियंत्रण के प्रयासों के लिए एक उभरता हुआ खतरा बन गया है।

भारत में 'एल मेंचो' का नाम तब प्रमुखता से उभरा, जब 25 नवंबर 2024 को भारतीय तटरक्षक बल ने अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में एक बड़ी कार्रवाई की। एक मछली पकड़ने वाले ट्रॉलर से 6,000 किलोग्राम मेथामफेटामाइन बरामद की गई, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ₹6,000 करोड़ आंकी गई। जांच में पता चला कि यह खेप केवल स्थानीय नहीं थी, बल्कि इसमें मैक्सिको और चीन के ड्रग माफियाओं का हाथ था। यह पहली बार था जब भारतीय एजेंसियों को पता चला कि मैक्सिकन कार्टेल और चीनी सिंडिकेट मिलकर भारतीय जलक्षेत्र में सक्रिय हैं।

चीन-मैक्सिको नेक्सस और 'चीनी एल चापो' का साथ


भारतीय सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एल मेंचो ने त्से ची लोप के साथ हाथ मिलाया था, जिसे 'चीनी एल चापो' कहा जाता है। त्से ची लोप 'द कंपनी' नाम का कार्टेल चलाता है, जिसका एशिया-प्रशांत क्षेत्र के ड्रग व्यापार पर कब्जा है। इस गठबंधन ने अंडमान सागर का इस्तेमाल एक ट्रांजिट जोन के रूप में किया। यहां से ड्रग्स न केवल भारत, बल्कि थाईलैंड और अन्य दक्षिण-पूर्वी एशियाई देशों में भेजी जा रही थी। इस काम में म्यांमार के गुर्गों की मदद भी ली जा रही थी।

दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क से भी ज्यादा खतरनाक

जांच में एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ कि एल मेंचो के कार्टेल द्वारा सप्लाई की जाने वाली ड्रग्स की शुद्धता बहुत अधिक थी। एक अधिकारी के अनुसार, एल मेंचो की ड्रग्स दाऊद इब्राहिम के सिंडिकेट द्वारा बेची जाने वाली ड्रग्स की तुलना में कहीं बेहतर थी, जिससे बाजार में इसकी मांग बहुत ज्यादा थी। भारतीय एजेंसियां पहले से ही ISI और दाऊद नेटवर्क से जूझ रही थीं, ऐसे में मैक्सिकन और चीनी कार्टेल की एंट्री ने सुरक्षा के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी थी।

भारत के लिए बड़ी राहत क्यों?

भारतीय अधिकारियों का मानना है कि एल मेंचो की मौत से इस खतरनाक अंतरराष्ट्रीय नेक्सस को करारा झटका लगेगा। मेंचो के खात्मे से 'चीनी एल चापो' के ऑपरेशंस की गति धीमी हो जाएगी, जो भारतीय एजेंसियों के लिए एक बड़ी जीत है। हालांकि ड्रग नेटवर्क दोबारा सक्रिय होने की कोशिश करेंगे, लेकिन फिलहाल एक मुख्य रणनीतिकार के हटने से अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ियों की भूमिका कम होगी।

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