Chinese Naval Ships: ताइवान और चीन के बीच जारी तनाव एक बार फिर गहरा गया है। ताइवान के रक्षा मंत्रालय ने बुधवार सुबह जानकारी दी कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के विमानों और युद्धपोतों ने उनके इलाके में घुसपैठ की है। ताइवान की सेना अब हाई-अलर्ट पर है और हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही है।
आसमान में लड़ाकू विमान, समंदर में युद्धपोत
ताइवान के रक्षा मंत्रालय (MND) के अनुसार, बुधवार सुबह 6 बजे तक के पिछले 24 घंटों में चीन के 6 सैन्य विमानों को ताइवान के आसपास देखा गया। समंदर में चीन के 5 नौसैनिक जहाज (PLAN Vessels) और 1 आधिकारिक सरकारी जहाज गश्त करते मिले। इन 6 विमानों में से 4 ने ताइवान की 'मीडियन लाइन' यानी दोनों देशों के बीच की सीमा को पार किया और ताइवान के दक्षिण-पश्चिमी और पूर्वी एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) में घुस गए।
मंगलवार को भी हुई थी घुसपैठ
यह घुसपैठ केवल बुधवार तक सीमित नहीं थी। इससे एक दिन पहले यानी मंगलवार को चीन ने और भी बड़ी ताकत दिखाई थी। मंगलवार सुबह तक ताइवान के पास चीन के 24 सैन्य विमान, 7 युद्धपोत और 1 सरकारी जहाज देखे गए थे। ताइवान की सेना ने बताया कि उन्होंने स्थिति पर नजर रखने के लिए अपने 'ROC आर्म्ड फोर्सेज' को तैनात किया है और स्थिति के अनुसार जवाब दिया है।
आखिर ताइवान पर अपना हक क्यों जताता है चीन?
चीन और ताइवान का विवाद सदियों पुराना है और इसके पीछे कई ऐतिहासिक कारण हैं। चीन का दावा है कि ताइवान उसका अभिन्न अंग है। इसकी शुरुआत 1683 के किंग राजवंश से होती है। 1895 में चीन-जापान युद्ध के बाद ताइवान 50 सालों तक जापान के कब्जे में रहा। 1949 में चीन में गृहयुद्ध खत्म हुआ। मुख्य भूमि पर कम्युनिस्टों (PRC) का कब्जा हो गया, जबकि पुरानी सरकार (ROC) ताइवान भाग गई। तब से ताइवान खुद को स्वतंत्र मानता है, जबकि चीन उसे अपना हिस्सा कहता है।
ताइवान आज एक स्वतंत्र देश की तरह काम करता है। उसकी अपनी सरकार है, अपनी सेना है और अपनी अर्थव्यवस्था है। लेकिन ताइवान ने कभी खुद को आधिकारिक तौर पर स्वतंत्र घोषित नहीं किया है, क्योंकि चीन ने धमकी दी है कि ऐसा होने पर वह हमला कर देगा। ताइवान का मुद्दा आज पूरी दुनिया के लिए संप्रभुता और मानवाधिकारों की परीक्षा बन गया है।