Video: तालिबान का खौफनाक चेहरा, महिला अधिकार रैली में पहुंचे लोगों को प्वाइंट ब्लैंक रेंज से मारी गोली, सड़क पर बिछीं लाशें!
इसका वीडियो भी सामने आया, जिसमें एक तिलाबानी प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी करता दिख रहा है। तभी वो अचानक आगे बढ़ता है और अपने पास खड़ी दो महिलाओं में से एक बहुत नजदीक से गोली बार देता, जिसके अगले ही पल वो महिला नीचे गिर पड़ती है
तालिबान का खौफनाक चेहरा, महिला अधिकार रैली में पहुंचे लोगों को प्वाइंट ब्लैंक रेंज से मारी गोली (AI PHOTO)
अफगानिस्तान में महिलाओं के पहनावे को लेकर तालिबान की बढ़ती सख्ती के खिलाफ लोगों का गुस्सा अब खुलकर सामने आने लगा है। पश्चिमी प्रांत हेरात में महिलाओं की कथित मनमानी गिरफ्तारियों के विरोध में हुए एक दुर्लभ प्रदर्शन के दौरान तालिबान सुरक्षा बलों ने गोलीबारी कर दी, जिसमें कम से कम दो लोगों की मौत हो गई और कई अन्य घायल हो गए।
इसका वीडियो भी सामने आया, जिसमें एक तिलाबानी प्रदर्शनकारियों पर अंधाधुंध गोलीबारी करता दिख रहा है। तभी वो अचानक आगे बढ़ता है और अपने पास खड़ी दो महिलाओं में से एक बहुत नजदीक से गोली बार देता, जिसके अगले ही पल वो महिला नीचे गिर पड़ती है।
During the protests, Taliban militants killed women by direct firings. This video documents one of the brutal acts of repression carried out by the terrorist militias of the Taliban regime. pic.twitter.com/lZ8aa8VQ5v
रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में तालिबान अधिकारियों ने कई महिलाओं और किशोरियों को "सही हिजाब नहीं पहनने" के आरोप में हिरासत में लिया है। परिजनों का कहना है कि उन्हें यह तक नहीं बताया गया कि गिरफ्तार महिलाओं को कहां ले जाया गया है।
इसी के विरोध में मंगलवार को हेरात में लोगों ने प्रदर्शन किया और महिलाओं की कथित मनमानी गिरफ्तारियों के खिलाफ आवाज उठाई।
डर के बावजूद सड़कों पर उतरे लोग
अफगानिस्तान में तालिबान शासन के दौरान बिना अनुमति किसी भी तरह का प्रदर्शन प्रतिबंधित है। इसके बावजूद करीब 70 लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारी "शिक्षा, रोजगार और आजादी" जैसे नारे लगा रहे थे। एक स्थानीय निवासी ने कहा, "लोग डरे हुए थे, लेकिन फिर भी सड़कों पर उतरने का फैसला किया।"
प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी का आरोप
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शन को रोकने के लिए तालिबान बलों ने गोलियां चलाईं और विशेष सुरक्षा इकाइयों को भी तैनात किया।
स्थानीय सूत्रों का दावा है कि इस कार्रवाई में दो लोगों की मौत हो गई, तीन लोग घायल हुए और कम से कम 13 लोगों को पीटकर हिरासत में लिया गया।
सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ वीडियो में कथित तौर पर हथियारबंद तालिबान लड़ाके प्रदर्शनकारियों की ओर गोली चलाते दिखाई दे रहे हैं। वीडियो में महिलाओं की चीखें और "आजादी, आजादी" के नारे भी सुनाई देते हैं।
मानवाधिकार संगठनों ने जताई चिंता
मानवाधिकार संगठन की अधिकारी फरिश्ता अब्बासी ने घटना की निंदा करते हुए कहा कि लोग तालिबान की नीतियों से नाराज हैं।
उन्होंने कहा, "लोगों को लगता है कि तालिबान उनकी निजी जिंदगी में दखल दे रहा है, जो स्वीकार्य नहीं है।"
वहीं Amnesty International की क्षेत्रीय अभियानकर्ता समीरा हमीदी ने कहा कि इस प्रदर्शन में पुरुषों की भागीदारी यह दिखाती है कि महिलाओं के खिलाफ लगातार हो रहे प्रतिबंधों को लेकर जनता में गुस्सा बढ़ रहा है।
'पूरी तरह ढकी थीं महिलाएं'
स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का दावा है कि जिन महिलाओं को गिरफ्तार किया गया, वे पूरी तरह से हिजाब में थीं।
एक कार्यकर्ता ने कहा, "महिलाएं पूरी तरह ढकी हुई थीं, फिर भी उनके साथ दुर्व्यवहार किया गया और उन्हें हिरासत में लिया गया। इससे परिवारों में भारी नाराजगी है।"
प्रदर्शन आयोजित करने वालों में से एक व्यक्ति ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि लोगों ने व्हाट्सऐप समूहों के जरिए एक-दूसरे से संपर्क कर विरोध प्रदर्शन की योजना बनाई थी।
तालिबान ने आरोपों को बताया झूठा
हालांकि तालिबान प्रशासन ने इन आरोपों को खारिज कर दिया है।
हेरात में तालिबान के एक प्रवक्ता ने सरकारी टीवी से बातचीत में कहा कि हिजाब को लेकर महिलाओं की गिरफ्तारी की खबरें "बेबुनियाद" हैं और किसी भी महिला को इस वजह से हिरासत में नहीं लिया गया है।
महिलाओं पर लगातार बढ़ रहे प्रतिबंध
गौरतलब है कि 2021 में सत्ता में लौटने के बाद से तालिबान ने महिलाओं पर कई कड़े प्रतिबंध लगाए हैं। महिलाओं को स्कूलों, विश्वविद्यालयों, कई नौकरियों और यहां तक कि सार्वजनिक पार्कों तक में जाने से रोका जा चुका है।
ऐसे माहौल में हेरात का यह प्रदर्शन तालिबान शासन के खिलाफ उभरते असंतोष का एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।