China Silent Winner: जब पूरी दुनिया की नजरें मिडिल ईस्ट के बारूद और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते सैन्य टकराव पर टिकी हैं, तब पर्दे के पीछे से चीन इस पूरे संकट का सबसे बड़ा 'साइलेंट विनर' बनकर उभरा है। Axios और Yahoo Finance की रिपोर्ट के अनुसार, राष्ट्रपति शी जिनपिंग बिना किसी सैन्य हस्तक्षेप के अमेरिका की हर कमजोरी का फायदा उठा रहे हैं।
अमेरिका की 'मजबूरी' और चीन की 'रणनीति'
अमेरिका इस समय ईरान के साथ संघर्ष में पूरी तरह उलझा हुआ है, और यही चीन के लिए सबसे बड़ा अवसर है। अमेरिका का पूरा ध्यान और सैन्य ताकत मिडिल ईस्ट में फंसी है, जिससे चीन को एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पकड़ मजबूत करने का मौका मिल गया है। अमेरिका इस जंग में अपने सबसे उन्नत हथियार जैसे JASSM-ER मिसाइलें, टॉमहॉक और पैट्रियट सिस्टम इस्तेमाल कर रहा है। वहीं चीन घर बैठे अमेरिका की युद्ध तकनीक, रसद और मिसाइल इस्तेमाल करने के पैटर्न का लाइव 'मास्टरक्लास' देख रहा है।
डगमगाते अमेरिकी गठबंधन का मिलेगा फायदा
राष्ट्रपति ट्रंप के हालिया बयानों ने अमेरिका के पुराने दोस्तों के मन में डर पैदा कर दिया है। ट्रंप ने यूरोप की रक्षा तैयारी को 'कागजी शेर' करार दिया है। इससे जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया जैसे सहयोगियों को लगने लगा है कि संकट के समय अमेरिका की सुरक्षा गारंटी 'शर्तों के साथ' आती है। जब अमेरिकी सहयोगियों को वाशिंगटन पर शक होता है, तो वे मजबूरी में बीजिंग की ओर हाथ बढ़ाते हैं। इन सब के बीच चीन खुद को एक 'भरोसेमंद और स्थिर' विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।
ऊर्जा बाजार में चीन का दबदबा
होर्मुज की खाड़ी में तेल की सप्लाई रुकने से पूरी दुनिया डरी हुई है, लेकिन चीन ने खुद को सुरक्षित कर लिया है। चीन आज दुनिया के 70% सोलर, विंड और बैटरी सप्लाई चेन को कंट्रोल करता है। चीन की ऊर्जा खपत में रिन्यूएबल और न्यूक्लियर पावर का हिस्सा 20% से ऊपर निकल गया है, जो तेल से भी ज्यादा है। इसके अलावा, उसके पास तेल का विशाल सुरक्षित भंडार भी मौजूद है।
AI और तकनीक की दौड़ में बहुत आगे
मिडिल ईस्ट की अस्थिरता का असर सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों पर भी पड़ रहा है। माइक्रोसॉफ्ट, एनवीडिया और ओरेकल जैसे दिग्गजों के मिडिल ईस्ट में होने वाले निवेश युद्ध के कारण थम सकते हैं। वहीं चीन के पास पहले से ही दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी AI कंप्यूटिंग क्षमता है। उसे खाड़ी देशों के निवेश की उतनी जरूरत नहीं है, जितनी पश्चिमी देशों को है। साथ ही युद्ध में इस्तेमाल होने वाले हथियारों के लिए 'रेयर अर्थ' खनिजों की जरूरत होती है, जिसके 90% मार्केट पर चीन का एकाधिकार है।
बीजिंग बना कूटनीति का नया केंद्र
जहां अमेरिका मिसाइलें दाग रहा है, वहीं चीन बातचीत की मेज पर अपनी जगह बना रहा है। पाकिस्तान के इस्लामाबाद में हो रही बातचीत के पीछे भी चीन एक साइलेंट मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। वह खुद को एक 'शांतिदूत' के रूप में प्रमोट कर रहा है।