पाकिस्तान ने पलटी मिडिल ईस्ट की बाजी! ट्रंप के 'महाप्लान' को लेकर इस्लामाबाद से तेहरान तक भारी हलचल

US Iran Peace Deal Update: इस्लामाबाद इस पूरी बातचीत का मुख्य मध्यस्थ रहा है, जबकि ट्रंप के मुताबिक तुर्की उन मिडिल ईस्ट देशों में शामिल है जिनसे लगातार सलाह ली जा रही है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने तुर्की के अपने समकक्ष दोनों देशों ने इस क्षेत्र की बदलती स्थिति पर चर्चा की और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की दिशा में हो रही 'उत्साहजनक प्रगति' का स्वागत किया है

अपडेटेड Jun 14, 2026 पर 3:36 PM
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर इस डील को लेकर भारी हलचल शुरू हो गई है

US Iran Peace Deal Update: मिडिल ईस्ट में आज एक ऐतिहासिक डील साइन होने वाली है। महीनों से जारी भीषण सैन्य टकराव को खत्म करने के लिए अमेरिका और ईरान के बीच आज यानी रविवार को एक बड़ा 'शांति समझौता' फाइनल होने वाला है। ट्रंप ने खुद दावा किया है कि इस फ्रेमवर्क समझौते पर आज ही हस्ताक्षर होने वाले हैं। इस डील पर फाइनल मुहर लगने के लिए पाकिस्तान हाइपर एक्टिव मूड में नजर आ रहा है।

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच पर भी इसे लेकर भारी हलचल शुरू हो गई है। जहां एक तरफ मध्यस्थ देश कतर की एक हाई-लेवल टीम तेहरान पहुंच चुकी है, वहीं मुख्य मध्यस्थ पाकिस्तान और तुर्की के विदेश मंत्रियों ने भी फोन पर इस 'महाडील' को लेकर बड़ी चर्चा की है।

कतर की टीम ने तेहरान में डाला डेरा, फाइनल बातचीत जारी


अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कतर के प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के एक बेहद खास और सीधे सलाहकार के नेतृत्व में कतर का प्रतिनिधिमंडल रविवार सुबह ही ईरान की राजधानी तेहरान पहुंच गया है। सूत्रों का कहना है कि यह कतर की टीम अमेरिका के साथ तालमेल बिठाकर इस समझौते की आखिरी और सबसे नाजुक कड़ियों को सुलझाने के लिए तेहरान पहुंची है।

पिछले हफ्ते जब कुवैत, बहरीन और जॉर्डन में हमलों के बाद तनाव चरम पर था, तब भी कतर ने दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थता को टूटने से बचाने के लिए अपनी टीम भेजी थी।

पाकिस्तान और तुर्की के विदेश मंत्रियों के बीच 'इमरजेंसी' कॉल

इस महाडील के बीच पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार ने तुर्की के अपने समकक्ष हाकान फिदान से फोन पर लंबी बातचीत की है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने इस क्षेत्र की बदलती स्थिति पर चर्चा की और अमेरिका-ईरान के बीच समझौते की दिशा में हो रही 'उत्साहजनक प्रगति' का स्वागत किया है।

आपको बता दें कि पाकिस्तान इस पूरी बातचीत का मुख्य मध्यस्थ रहा है, जबकि ट्रंप के मुताबिक तुर्की उन मिडिल ईस्ट देशों में शामिल है जिनसे लगातार सलाह ली जा रही है।

इतनी आसानी से होर्मुज पर से दबदबा नहीं छोड़ेगा ईरान

भले ही समझौते के तहत दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को बिना किसी टोल टैक्स के सभी अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए दोबारा खोलने की बात चल रही है, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इसे इतनी आसानी से हाथ से नहीं जाने देगा।

ऑस्ट्रियाई सरकार के पूर्व रक्षा अताशे वोल्फगैंग पुसजताई ने अल जजीरा से बातचीत में कहा, 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नियंत्रण रखने की धमकी देना ईरान के लिए उसके परमाणु कार्यक्रम की तरह ही एक बड़ा सौदेबाजी का जरिया है। यह ईरान के लिए परमाणु बम जैसा ही एक हथियार है, जिसका इस्तेमाल वह अमेरिका, क्षेत्रीय देशों और परोक्ष रूप से इजरायल पर दबाव बनाने के लिए करता है। अगर वे आज कह भी रहे हैं कि इसे बिना किसी शुल्क के सबके लिए खोल देंगे, तो भी इसका मतलब यह नहीं है कि वे भविष्य में भी इस पर टिके रहेंगे'।

ट्रंप का दावा बनाम ईरान की चाल

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर पोस्ट लिखते हुए कहा कि यह एक 'महान और मजबूत डील' बनने जा रही है और आज ही इस पर इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर हो सकते हैं। हालांकि, ईरान के भीतर मचे राजनीतिक बवाल और कट्टरपंथियों के भारी विरोध को देखते हुए ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने थोड़ा सावधान रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि रविवार को ही तुरंत हस्ताक्षर नहीं होंगे, लेकिन आने वाले कुछ ही दिनों में समझौता पूरी तरह फाइनल होने की संभावना बहुत ज्यादा है।

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