What Happens After US-Iran Deal: अमेरिका और ईरान के बीच आज एक बड़ी डील होने वाली है। इसी के साथ महीनों से जारी भीषण सैन्य टकराव आज खत्म हो सकता है। दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक शांति समझौता अपने आखिरी चरण में पहुंच चुका है। पूरी दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि इस महाडील के आधिकारिक रूप से साइन होने के बाद आखिर क्या-क्या बदलाव होंगे और इसे जमीन पर कैसे लागू किया जाएगा।
वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते के लागू होते ही न सिर्फ रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोल दिया जाएगा, बल्कि ईरान पर लगे अमेरिकी प्रतिबंधों में भी चरणबद्ध तरीके से ढील दी जाएगी। आइए समझते हैं कि इस महाडील के तुरंत बाद क्या होने जा रहा है।
बिना किसी टैक्स के तुरंत खुलेगा 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज'
इस पूरे समझौते के केंद्र में दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऑयल कॉरिडोर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को दोबारा सुरक्षित खोलना है। एक वरिष्ठ अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारी के मुताबिक, वाशिंगटन ने एक मजबूत और बेहतरीन डील तैयार की है।
जैसे ही ईरान इस रास्ते को खोलेगा, वैसे ही अमेरिका भी ईरान के बंदरगाहों पर की गई अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा लेगा। इस समझौते के तहत तेहरान को बिना कोई ट्रांजिट फीस या टोल टैक्स लगाए इस रणनीतिक समुद्री रास्ते को अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए तुरंत खोलना होगा।
समंदर से साफ की जाएंगी बारूदी माइंस
समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद का अगला चरण सबसे चुनौतीपूर्ण और महत्वपूर्ण होगा। अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि शुरुआती समझौते के तुरंत बाद जलमार्ग को सुरक्षित बनाने का काम शुरू होगा।
इसके तहत 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में बिछाई गई घातक बारूदी माइंस को हटाने का अभियान युद्ध स्तर पर चलाया जाएगा। इस कदम का मुख्य उद्देश्य वैश्विक तेल और प्राकृतिक गैस की शिपमेंट को बिना किसी डर के दोबारा बहाल करना और समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
ईरान को मिलेगी बड़ी राहत, हटेंगे कड़े आर्थिक प्रतिबंध
इस फ्रेमवर्क का एक और सबसे बड़ा हिस्सा ईरान को मिलने वाली प्रतिबंधों से राहत है। ड्राफ्ट प्रस्तावों के मुताबिक, इस डील के बाद वैश्विक स्तर पर फ्रीज की गई ईरानी संपत्तियों को दोबारा जारी किया जाएगा। इसके साथ ही ईरान के तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में बड़ी छूट दी जाएगी। हालांकि, क्षेत्रीय अधिकारियों का कहना है कि ईरान को यह राहत एक बार में नहीं, बल्कि चरणबद्ध तरीके से दी जाएगी।
60 दिनों का 'विंडो पीरियड' और न्यूक्लियर एजेंडा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने संकेत दिए हैं कि इस फ्रेमवर्क पर जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर हो जाएंगे, जिसके बाद तकनीकी स्तर की बातचीत शुरू होगी। हालांकि, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने थोड़ा सतर्क रुख अपनाते हुए रविवार को तुरंत साइन होने की बात से इनकार किया है, लेकिन आने वाले दिनों में डील फाइनल होने की पूरी उम्मीद जताई है।
एक बार फ्रेमवर्क फाइनल होने के बाद 60 दिनों का इम्प्लीमेंटेशन पीरियड यानी लागू करने की अवधि शुरू होगी। इस 60 दिनों के भीतर दोनों देशों के बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम, उसके पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के स्टॉक और अन्य परमाणु प्रतिबंधों को लेकर आगे की गंभीर बातचीत जारी रहेगी।