US Iran War: ट्रंप का 15 पॉइंट प्लान, लेकिन कुछ और मांगे ईरान, ऐसे में क्या हो पाएगी बातचीत या विश्व युद्ध निश्चित?

US Iran War Talks ट्रंप ने कहा कि इस हफ्ते वाशिंगटन और तेहरान के बीच “बहुत अच्छी और फायदेमंद बातचीत” हुई है, जिसका मकसद जंग खत्म करना है। लेकिन ईरान बार-बार इनकार कर रहा है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत कर रहा है। ट्रंप के दावे के जवाब में ईरानी नेताओं ने कहा कि “अमेरिका खुद से ही बात कर रहा है”

अपडेटेड Mar 25, 2026 पर 6:45 PM
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US Iran War: ट्रंप का 15 पॉइंट प्लान, लेकिन कुछ और मांगे ईरान (IMAGE- AI Generated)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ चल रही जंग खत्म करने के लिए एक 15 पॉइंट का प्लान बनाया है। इसमें अमेरिका और इजराइल की मांगें और कुछ ऑफर शामिल हैं। यह प्लान पाकिस्तान के जरिए ईरान को भेज भी दिया गया है। पाकिस्तान ने इस हफ्ते कहा है कि वह दोनों देशों के बीच शांति बातचीत की मेजबानी करने को तैयार है।

ट्रंप ने कहा कि इस हफ्ते वाशिंगटन और तेहरान के बीच “बहुत अच्छी और फायदेमंद बातचीत” हुई है, जिसका मकसद जंग खत्म करना है। लेकिन ईरान बार-बार इनकार कर रहा है कि वह अमेरिका से कोई बातचीत कर रहा है। ट्रंप के दावे के जवाब में ईरानी नेताओं ने कहा कि “अमेरिका खुद से ही बात कर रहा है”।

जंग की शुरुआत और उसका भारी नुकसान


यह जंग अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को शुरू की थी, जबकि उस समय ईरान से बातचीत चल रही थी। जंग की वजह से पूरी दुनिया में तेल और शेयर बाजार हिल गए हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है और पूरे मध्य पूर्व में कई लोगों की जान गई है।

ईरान के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, मंगलवार तक सिर्फ ईरान में ही 1,500 लोग मारे गए और 18,551 लोग घायल हो गए।

जंग शुरू होने के कुछ दिन बाद ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने घोषणा की कि होर्मुज का जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जहाजों के लिए बंद कर दिया गया है। बाद में उन्होंने कुछ चुने हुए जहाजों को गुजरने की इजाजत दे दी, जिनमें ज्यादातर भारतीय, पाकिस्तानी और चीन के झंडे वाले जहाज शामिल थे।

ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी इलाके में पावर प्लांट पर हमले भी किए। इससे तेल की कीमतें आसमान छू गईं- $100 प्रति बैरल से ऊपर चली गईं। जंग से पहले ब्रेंट क्रूड तेल की कीमत करीब $65 थी।

जब बुधवार को ट्रंप प्रशासन के 15 सूत्रीय शांति प्लान की खबर आई, तो दुनिया के शेयर बाजार थोड़े ऊपर चढ़ गए और तेल की कीमतें थोड़ी नीचे आईं। लेकिन विशेषज्ञ कहते हैं कि अभी साफ नहीं है कि बातचीत हो रही है या नहीं, और अगर हो भी रही है तो दोनों पक्षों की मांगें इतनी अलग हैं कि समझौता होना मुश्किल लग रहा है।

अमेरिका का 15 प्वाइंट का प्लान क्या कहता है?

अमेरिकी-इजराइली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका ने पाकिस्तान के रास्ते ईरान को 15 सूत्री शांति प्लान भेजा है। इसमें एक महीने का युद्धविराम (सीजफायर) शामिल है, जिस दौरान दोनों पक्ष जंग खत्म करने की शर्तों पर बात करेंगे।

पाकिस्तान, मिस्र और तुर्किये इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच शांति बैठक कराने की कोशिश कर रहे हैं, जो गुरुवार तक हो सकती है।

अमेरिकी प्रशासन शांति की बात तो कर रहा है, लेकिन साथ ही युद्ध की भी तैयारी कर रहा है। खबर है कि अमेरिका 82nd एयरबोर्न डिवीजन से 3,000 सैनिकों को मध्य पूर्व भेजने वाला है।

अभी तक किसी भी पक्ष- अमेरिका, ईरान, इजराइल या मध्यस्थ देशों ने प्लान की पूरी डिटेल की पुष्टि नहीं की है। लेकिन इजराइल के चैनल 12 ने प्लान के कुछ हिस्से जारी किए हैं, जो ट्रंप प्रशासन की पुरानी बातों से काफी मिलते-जुलते हैं। वे मुख्य पॉइंट्स हैं:

  • 30 दिन का युद्धविराम।
  • ईरान के नतांज, इस्फहान और फोर्डो में मौजूद परमाणु सुविधाओं को तोड़ना।
  • ईरान को हमेशा के लिए परमाणु हथियार न बनाने का लिखित वादा।
  • ईरान के पास जो एनरिच यूरेनियम का स्टॉक है, उसे अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) को सौंपना और बाकी परमाणु सुविधाओं पर IAEA की निगरानी की इजाजत देना। ईरान को अपने देश में
  • यूरेनियम समृद्ध (एनरिचमेंट) बंद करना होगा।
  • ईरान की मिसाइलों की रेंज और संख्या पर रोक।
  • ईरान को अपने क्षेत्रीय प्रॉक्सी (समर्थक गुटों) जैसे- हमास, हिजबुल्ला को सपोर्ट बंद करना।
  • क्षेत्रीय ऊर्जा सुविधाओं पर ईरानी हमले बंद करना।
  • होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खोलना।
  • ईरान पर लगी सारी पाबंदियां हटाना और संयुक्त राष्ट्र के उस तंत्र को खत्म करना, जिससे दोबारा सैंक्शंस लगाए जा सकते हैं।
  • ईरान के बूशहर सिविल न्यूक्लियर प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए अमेरिका का सहयोग।

इजराइल को अमेरिका-ईरान बातचीत पर पूरी सहमति नहीं है। बंद दरवाजों के पीछे इजराइल इन 15 पॉइंट्स से सहमत है, लेकिन उसे डर है कि ट्रंप कितना समझौता कर लेंगे। वे चिंतित हैं कि एक महीने का युद्धविराम होने से कुछ पॉइंट्स मान लिए जाएंगे, लेकिन सारे नहीं।

जंग शुरू होने के बाद अमेरिका की मांगें कैसे बदलीं?

परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी कुछ मांगें पहले जैसी ही हैं। जून 2025 में ईरान-इजराइल के 12 दिन के युद्ध में अमेरिका ने नतांज, इस्फहान और फोर्डो पर हमला किया था- ये यूरेनियम एनरिच करने की जगहें हैं।

लेकिन इस बार की जंग में अमेरिका और इजराइल ने ईरान में सत्ता बदलने की कोशिश की। जंग के पहले दिन ही ईरानी मीडिया ने बताया कि सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई तेहरान में अपने ऑफिस में मारे गए। एक हफ्ते बाद उनके दूसरे बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना गया, जिससे अमेरिका नाखुश है।

ट्रंप ने कहा था कि “उन्होंने बड़ी गलती की है। मुझे नहीं लगता यह टिकेगा।” लेकिन रिपोर्ट किए गए 15 सूत्री प्लान में रेजीम चेंज का कोई जिक्र नहीं है।

ईरान की प्रतिक्रिया क्या है?

ईरानी नेता बार-बार कह रहे हैं कि अमेरिका से कोई बातचीत नहीं हो रही। ईरान की सेना कहती है कि पिछले दो साल में बातचीत के दौरान अमेरिका दो बार ईरान पर हमला कर चुका है, इसलिए अब बातचीत नहीं हो सकती।

ईरान के ज्वाइंट मिलिट्री कमांड के प्रमुख प्रवक्ता एब्राहिम जोल्फाकारी ने टीवी पर ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए कहा, “क्या आपकी अंदरूनी लड़ाई इतनी बढ़ गई है कि अब आप खुद से ही बात कर रहे हैं?”

उन्होंने कहा, “हम जैसे लोग आप जैसे लोगों के साथ कभी नहीं मिल सकते। न अब, न कभी।” बुधवार को भी ईरान और इजराइल ने एक-दूसरे पर हमले जारी रखे।

ईरान की शर्तें क्या हैं जंग खत्म करने के लिए?

ईरान की IRGC बातचीत नहीं चाहती, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने 11 मार्च को कुछ शर्तें रखीं। उन्होंने X पर लिखा कि उन्होंने रूस और पाकिस्तान के नेताओं से बात की और “ईरान की शांति के प्रति प्रतिबद्धता” दोहराई। उनकी मांगें हैं:

  • ईरान के वैध अधिकारों को मान्यता दो।
  • इस लड़ाई में हुए नुकसान की भरपाई करो।
  • भविष्य में कोई हमला न हो, इसके लिए मजबूत अंतरराष्ट्रीय गारंटी दो।

इसके अलावा ईरान चाहता है कि उस पर लगी सारी पाबंदियां हटा दी जाएं। इसके अलावा, वह खाड़ी इलाके में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद करवाना चाहता है और होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण कानूनी रूप से मजबूत करना चाहता है।

क्या बातचीत हो पाएगी?

कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान सीमित स्तर पर बातचीत के लिए तैयार हो सकता है। CNN ने एक गुप्त ईरानी सूत्र के हवाले से कहा कि “पूरी बातचीत नहीं, बल्कि संपर्क” हुआ है। ईरान कह रहा है कि वह परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अधिकार चाहता है। साथ ही सैंक्शंस हटाने की मांग कर रहा है।

ईरानी-अमेरिकी अर्थशास्त्री नादेर हबीबी ने कहा कि बातचीत होने की संभावना 60 प्रतिशत है। इसकी कुछ वजहें हैं- जंग से सभी पक्षों को भारी नुकसान हुआ है। ट्रंप पर खाड़ी देशों, बड़े आर्थिक साझेदारों और अमेरिकी मतदाताओं का दबाव है (नवंबर में मिडटर्म चुनाव हैं)। ईरान पर भी पड़ोसी देशों का दबाव है कि वह हमले बंद करे। मिस्र, सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये जैसे देश ईरान से संपर्क बना चुके हैं।

शुरू में अमेरिका और इजराइल सोच रहे थे कि जंग छोटी होगी और ईरानी सत्ता गिर जाएगी। अब वे अपनी उम्मीदें बदल रहे हैं, क्योंकि लंबी जंग बहुत महंगी पड़ रही है और ईरान इजराइल तक अपने टारगेट भेदने में सक्षम है।

दोनों तरफ से बातचीत की कोशिशें हो रही हैं, लेकिन मांगें अभी बहुत दूर हैं। ईरान कह रहा है “हम बात नहीं कर रहे”, जबकि अमेरिका कह रहा है “बात हो रही है”। दुनिया देख रही है कि क्या एक महीने का युद्धविराम हो पाता है या जंग और बढ़ती है। फिलहाल स्थिति काफी तनावपूर्ण बनी हुई है।

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