अमेरिका ने समंदर में फंसा रूसी तेल खरीदने की फिर दी इजाजत, प्रतिबंधों में 30 दिन के लिए छूट

इससे पहले भी अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के मामले में 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। यह 11 अप्रैल 2026 को खत्म हो गई। यह छूट वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों का एक हिस्सा है

अपडेटेड Apr 18, 2026 पर 8:45 AM
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देशों को 16 मई 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति होगी।

अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने रूसी तेल को खरीदने की छूट को फिर से लागू कर दिया है। इससे देशों को लगभग एक महीने तक समुद्र में फंसे प्रतिबंधित रूसी तेल और पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने की अनुमति मिल गई। बता दें कि हाल ही में अमेरिका की ओर से कहा गया था कि रूसी तेल खरीदने की छूट फिर देने का उसका कोई इरादा नहीं है। लेकिन अब उसका इरादा बदल चुका है। रॉयटर्स के मुताबिक, अमेरिका के ट्रेजरी विभाग ने शुक्रवार देर रात अपनी वेबसाइट पर यह लाइसेंस जारी किया।

इसके तहत, देशों को 16 मई 2026 तक जहाजों पर लदे रूसी तेल को खरीदने की अनुमति होगी। यह लाइसेंस वैश्विक ऊर्जा कीमतों को नियंत्रित करने के अमेरिकी प्रशासन के प्रयासों का एक हिस्सा है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध की वजह से कच्चे तेल और गैस की कीमतें काफी बढ़ गईं। इससे पहले भी अमेरिका ने रूसी तेल की खरीद के मामले में 30 दिन की अस्थायी छूट दी थी। यह 11 अप्रैल 2026 को खत्म हो गई।

रूस के राष्ट्रपति के विशेष दूत किरिल दिमित्रीव ने कहा था कि पहली छूट के कारण 100 मिलियन बैरल रूसी कच्चा तेल (क्रूड ऑयल) बिक्री के लिए उपलब्ध हो जाएगा। यह वैश्विक स्तर पर एक दिन में होने वाले कच्चे तेल के कुल उत्पादन के लगभग बराबर है।


अस्थायी रूप से बढ़ सकती है वैश्विक तेल आपूर्ति

प्रतिबंधों में मिली इस राहत से वैश्विक तेल आपूर्ति में अस्थायी रूप से वृद्धि हो सकती है, लेकिन यह तेल की कीमतों में बेतहाशा बढ़ोतरी को रोकने में नाकाम रही है। ईरान की ओर से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) को लगभग बंद किए जाने से कच्चे तेल और गैस की सप्लाई बाधित हुई और कीमतें बढ़ीं। युद्ध से पहले, दुनिया को होने वाली तेल और गैस की कुल सप्लाई का लगभग 20% इसी रूट से होकर गुज़रता था।

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अमेरिका, भारत से हटा चुका है रूस से तेल खरीद को लेकर टैरिफ

2022 में रूस और यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत डिस्काउंटेड रूसी समुद्री कच्चे तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया। लेकिन पश्चिमी देश इसके विरोध में हैं। उन्होंने रूस के एनर्जी सेक्टर पर प्रतिबंध लगाए हैं। उनका कहना है कि तेल से होने वाली कमाई रूस के युद्ध प्रयासों की फंडिंग में मदद करती है। अमेरिका ने रूस से तेल की खरीद को लेकर सजा के तौर पर भारतीय सामानों के इंपोर्ट पर अगस्त 2025 में 25 प्रतिशत का एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया था। इसके बाद भारत से अमेरिका जाने वाले सामान पर टैरिफ की दर 25 प्रतिशत के रेसिप्रोकल टैरिफ को मिलाकर 50 प्रतिशत हो गई।

लेकिन फिर इस साल फरवरी में अमेरिका ने कहा कि भारत ने डायरेक्ट या इनडायरेक्ट तरीके से रूस से कच्चे तेल का आयात बंद करने की प्रतिबद्धता जताई है। इसके कारण अमेरिका ने रूस से तेल खरीद को लेकर भारतीय सामान पर लगाया गया अतिरिक्त 25 प्रतिशत का टैरिफ 7 फरवरी 2026 से हटा दिया।

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