Iranian Aircraft in Pakistan: पाकिस्तान ने नूर खान एयरबेस पर ईरानी लड़ाकू विमानों को पनाह देने के संबंध में CBS News की रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। पाक ने इसे भ्रामक तथा सनसनीखेज रिपोर्ट बताता है। CBS News की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने अमेरिका को बिना बताए चुपके से ईरानी लड़ाकू विमानों को अपने एयरफील्ड पर अमेरिकी हमलों से बचाने के लिए जगह दी थी। इस खुलासे से पाकिस्तानी आर्मी प्रमुख आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के मध्यस्थता के रोल पर सवाल खड़े हो गए हैं।
ईरान और अमेरिका के बीच पाकिस्तान मुख्य मध्यस्थ देश है। वह खुद को निष्पक्ष दिखाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन अब उसकी पोल खुल गई है। CBS News ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से बताया कि अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने में मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे पाकिस्तान ने ईरानी सैन्य विमानों को अमेरिकी हवाई हमलों से बचाने के लिए अपने हवाई अड्डों में जगह दी थी।
खबर में यह भी दावा किया गया है कि ईरान ने अमेरिकी हवाई हमलों से बचने के लिए अपने सिविलियन एयरक्राफ्ट को अफगानिस्तान में खड़ा किया था। इस खबर पर प्रतिक्रिया देते हुए रिपब्लिकन पार्टी के सांसद लिंडसे ग्राहम ने अमेरिका-ईरान युद्ध को समाप्त कराने के लिए मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान की भूमिका पर फिर से विचार करने की जरूरत पर जोर दिया। यह युद्ध 28 फरवरी को शुरू हुआ था।
साउथ कैरोलिना से सांसद ग्राहम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट में कहा, "अगर यह खबरें सही है तो ईरान, अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही भूमिका पर एक बार फिर पूरी तरह से विचार करने की आवश्यक होगी।"
'सीबीएस न्यूज' ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से खबर में कहा है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अप्रैल में युद्धविराम की घोषणा के तुरंत बाद ईरान ने पाकिस्तान के नूर खान हवाई अड्डे पर एक टोही और खुफिया विमान सहित कई विमान भेजे थे।
पाकिस्तान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नूर खान एयर बेस से जुड़े दावों को खारिज करते हुए सीबीएस न्यूज से कहा, "नूर खान हवाई अड्डा शहर के ठीक बीच में स्थित है, वहां खड़े विमानों के विशाल बेड़े को जनता की नजरों से छिपाया नहीं जा सकता।" अफगानिस्तान के एक नागरिक उड्डयन अधिकारी ने सीबीएस न्यूज को बताया कि 'महान एयर' से संबंधित एक ईरानी नागरिक विमान युद्ध शुरू होने से कुछ समय पहले काबुल में उतरा था। ईरानी हवाई क्षेत्र बंद होने के बाद वह वहीं खड़ा रहा।
पाकिस्तान ने इन खबरों को खारिज करते हुए एक बयान में कहा, "युद्धविराम के बाद और इस्लामाबाद वार्ता के शुरुआती दौर के दौरान बातचीत प्रक्रिया से जुड़े राजनयिक कर्मियों, सुरक्षा टीमों और प्रशासनिक कर्मचारियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए ईरान और अमेरिका से कई विमान पाकिस्तान पहुंचे थे। कुछ विमान और सहायक कर्मी बातचीत के अगले दौर की उम्मीद में अस्थायी रूप से पाकिस्तान में ही रुके रहे।"
इसमें आगे कहा गया, "हालांकि औपचारिक बातचीत अभी तक फिर से शुरू नहीं हुई है। लेकिन उच्च-स्तरीय राजनयिक आदान-प्रदान जारी रहा है। इसी संदर्भ में मौजूदा लॉजिस्टिक और प्रशासनिक व्यवस्थाओं के माध्यम से ईरानी विदेश मंत्री की इस्लामाबाद यात्राओं को सुविधाजनक बनाया गया। पाकिस्तान में इस समय खड़े ईरानी विमान युद्धविराम की अवधि के दौरान ही यहां पहुंचे थे। इनका किसी भी तरह की सैन्य इमरजेंसी स्थिति या सुरक्षा व्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। इसके विपरीत कोई भी दावा केवल अटकलबाज़ी, भ्रामक और तथ्यों से पूरी तरह से परे है।"
पाक सरकार ने कहा, "पाकिस्तान ने बातचीत और तनाव कम करने के प्रयासों के समर्थन में हमेशा एक निष्पक्ष, रचनात्मक और जिम्मेदार मध्यस्थ की भूमिका निभाई है। अपनी इसी भूमिका के अनुरूप पाकिस्तान ने जरूरत पड़ने पर नियमित लॉजिस्टिक और प्रशासनिक सहायता प्रदान की है। साथ ही सभी संबंधित पक्षों के साथ पूरी पारदर्शिता और नियमित संपर्क बनाए रखा है। पाकिस्तान बातचीत को बढ़ावा देने, तनाव कम करने और क्षेत्रीय तथा वैश्विक शांति, स्थिरता और सुरक्षा को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से किए जा रहे सभी ईमानदार प्रयासों का समर्थन करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।"