US-Iran War: अमेरिका-ईरान के बीच मध्यस्थता करा रहे पाकिस्तान ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बड़ा धोखा दिया है। ईरान और अमेरिका संघर्ष के दौरान खुद को एक निष्पक्ष देश और मध्यस्थ के रूप में पेश करने के बावजूद पाकिस्तान ने चुपके से ईरानी सैन्य और सर्विलांस एयरक्राफ्ट को अपने एयरबेस पर पार्क करने की इजाजत दे दी है। इससे संभवतः ईरान को अमेरिकी हवाई हमलों से सुरक्षा मिल गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने CBS News को बताया कि पाकिस्तान ने संभवतः इन विमानों को संभावित अमेरिकी हवाई हमलों से प्रभावी ढंग से बचाया होगा।
अधिकारियों ने दावा किया कि ईरान ने पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भी सिविलियन एयरक्राफ्ट भेजे हैं। हालांकि यह अभी भी यह साफ नहीं है कि उन एयरक्राफ्ट में कोई सैन्य विमान भी शामिल हैं या नहीं। रिपोर्ट के अनुसार, विमानों की यह आवाजाही एक व्यापक ईरानी प्रयास का हिस्सा प्रतीत होती है। इसका उद्देश्य संघर्ष बढ़ने के साथ-साथ अपनी शेष सैन्य और विमानन संपत्तियों की रक्षा करना था।
अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया कि तेहरान ने रावलपिंडी के पास स्थित पाकिस्तान वायु सेना के नूर खान एयरबेस पर कई विमान तैनात किए हैं। इनमें ईरानी वायु सेना का एक RC-130 विमान भी शामिल है। यह लॉकहीड C-130 हरक्यूलिस स्टेरेजेटिक ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट का एक टोही और खुफिया जानकारी जुटाने वाला वर्जन है। इस एयरबेस को 2025 में 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान भारी नुकसान पहुंचा था। यह पाकिस्तान के सैन्य मुख्यालय के पास स्थित है।
पाकिस्तान ने दावों को खारिज किया
हालांकि, CBS News से बात करते हुए एक वरिष्ठ पाकिस्तानी अधिकारी ने इन आरोपों का खंडन किया है। अधिकारी के हवाले से कहा गया, "नूर खान बेस शहर के ठीक बीच में स्थित है। वहां पार्क किए गए विमानों के इतने बड़े बेड़े को आम जनता की नजरों से छिपाया नहीं जा सकता।"
हालांकि, अफगानिस्तान के नागरिक उड्डयन विभाग के एक अधिकारी ने अमेरिकी चैनल को बताया कि संघर्ष शुरू होने से कुछ ही समय पहले 'महान एयर' (Mahan Air) का एक ईरानी नागरिक विमान काबुल में उतरा था। रिपोर्ट के अनुसार, ईरान द्वारा अपना एयरस्पेस बंद किए जाने के बाद भी यह विमान काबुल एयरपोर्ट पर ही पार्क रहा।
इस बीच पश्चिम एशिया संघर्ष से वैश्विक सप्लाई चैन बुरी तरह प्रभावित होने के बीच, ईरान के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा है कि तेहरान इस संकट से भारत और अन्य देशों को होने वाले नुकसान से खुश नहीं है। लेकिन इसके लिए अमेरिका और इजरायल जिम्मेदार हैं।
'इंडिया टुडे' को दिए एक इंटरव्यू में ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय को अमेरिका-इजरायल को उनके कृत्यों के लिए जवाबदेह ठहराना चाहिए, क्योंकि उन्होंने जो शुरू किया वह अभी भी जारी है।