Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही परमाणु समझौते की बातचीत को लेकर बड़ी जानकारी सामने आई है, जिससे अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल बढ़ गई है। इस मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार, 16 अप्रैल को बड़ा बयान दिया है। ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान अब इस बात पर राजी हो गया है कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। उन्होंने कहा कि यह समझौता, जिस पर अभी बातचीत चल रही है, 20 साल से अधिक समय तक चल सकता है।
ट्रंप ने समझौते की संभावनाओं को "बहुत अच्छा" बताया और संकेत दिया कि ईरानी अधिकारियों के साथ बातचीत का अगला दौर इस हफ्ते के अंत में हो सकता है।
ईरान को लेकर ट्रंप के नए दावे
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच समझौता होने के काफी करीब हैं। उन्होंने दावा किया कि तेहरान ने “लगभग हर बात” मान ली है। ट्रंप के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते के तहत ईरान अपने समृद्ध यूरेनियम के भंडार को भी सौंपने पर सहमत हो गया है। हालांकि, इन दावों की अभी तक ईरान की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और दोनों देशों के बीच बातचीत अभी जारी है।
ट्रंप ने एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान कहा, “ईरान परमाणु हथियार न रखने पर सहमत हो गया है; उन्होंने इस पर सहमति जताई है। वे हमें ‘न्यूक्लियर डस्ट’ वापस देने पर सहमत हुए हैं। ईरान के साथ हमारी कई बातों पर सहमति बनी है, और मुझे लगता है कि कुछ बहुत सकारात्मक होने वाला है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि समझौते पर इस्लामाबाद में औपचारिक रूप से हस्ताक्षर किए जा सकते हैं, और कहा कि अगर बातचीत सफल रही तो वे पाकिस्तानी की राजधानी का दौरा कर सकते हैं। अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत का अगला दौर इस हफ्ते के अंत में होने की उम्मीद है, जो राजनयिक प्रयासों में तेजी का संकेत देता है।
होर्मुज पर अमेरिकी नाकाबंदी अच्छी तरह से कायम
ट्रंप ने संकेत दिया कि मौजूदा सीजफायर, जो 21 अप्रैल को खत्म होने वाला है, अगर समय पर समझौता हो जाता है तो इसे बढ़ाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, उन्होंने चेतावनी दी कि "समझौता न होने पर" लड़ाई फिर से शुरू हो सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि होर्मुज स्ट्रेट पर अमेरिकी नाकाबंदी "अच्छी तरह से कायम है", जिससे साफ है कि बातचीत के बीच भी ईरान पर दबाव बना हुआ है।
हाल के दिनों में, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत, जिसमें इस्लामाबाद में पाकिस्तान ने काफी हद तक मध्यस्थता की है - कुछ हद तक सीमित हो गई है, लेकिन तेहरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर विवाद बना हुआ है।
वाशिंगटन चाहता है कि ईरान करीब 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन बंद करे और अपने अधिक समृद्ध यूरेनियम के भंडार को हटा दे। साथ ही, अमेरिका इस बात पर भी जोर दे रहा है कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार हासिल न करे।
बिजली या रिसर्च के लिए यूरेनियम जरूरी
ईरान का कहना है कि वह परमाणु हथियार बनाना नहीं चाहता। वह अपनी नीति और धार्मिक मान्यताओं का हवाला देते हुए यह बात दोहराता रहा है। साथ ही, ईरान यह भी कहता है कि उसे शांतिपूर्ण कामों (जैसे बिजली या रिसर्च) के लिए यूरेनियम को तैयार करने का अधिकार है।
ईरान ने समझौते के लिए 3 से 5 साल की छोटी समय-सीमा का प्रस्ताव रखा है। इसके साथ ही उसने कहा है कि वह अपने ज्यादा शुद्ध यूरेनियम का कुछ हिस्सा कम ताकतवर बना सकता है या दूसरे देश को दे सकता है। इसके बदले में ईरान चाहता है कि उस पर लगे प्रतिबंध (सैंक्शन) हटाए जाएं।