'युद्ध खत्म'... ट्रंप ने 12 बार किया ईरान पर जीत का दावा, फिर अभी तक क्यों चल रही जंग?

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान युद्ध को खत्म बताने का दावा कई बार किया, लेकिन जमीनी हकीकत अलग है। जानिए क्यों बिना युद्धविराम, समझौते या आत्मसमर्पण के यह संघर्ष अब भी जारी है।

अपडेटेड Mar 31, 2026 पर 8:18 PM
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ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि युद्ध लगभग खत्म हो चुका है, जबकि सैन्य कार्रवाई जारी है।

एक महीने से ज्यादा समय बीतने के बाद भी अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई बार दावा कर चुके हैं कि ईरान के साथ युद्ध खत्म हो चुका है या खत्म होने वाला है। अमेरिकी न्यूज साइट Axios के मुताबिक, उन्होंने कम से कम दर्जन भर बार ऐसा कहा है।

लेकिन जमीन पर तस्वीर अलग है। युद्ध जारी है, ईरान पीछे हटने को तैयार नहीं है और न ही कोई युद्धविराम या समझौता हुआ है। बयान और हकीकत के बीच का यही फर्क इस पूरे संघर्ष को समझने की कुंजी बन गया है।

बार-बार जीत का दावा, साथ में धमकी भी


Axios के अनुसार, ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि युद्ध लगभग खत्म हो चुका है, जबकि सैन्य कार्रवाई जारी है। उनके बयानों में एक पैटर्न दिखता है- एक तरफ जीत का दावा, दूसरी तरफ आगे हमले की चेतावनी।

26 मार्च को कैबिनेट मीटिंग में उन्होंने कहा, 'ईरान हार चुका है, अब वापसी नहीं कर सकता।' 24 मार्च को उन्होंने कहा, 'हम यह युद्ध जीत चुके हैं।' 23 मार्च को उन्होंने बातचीत को 'अच्छा और प्रोडक्टिव' बताया, लेकिन साथ ही कहा कि अगर बातचीत विफल हुई तो 'हम बमबारी जारी रखेंगे।'

इससे पहले 13 मार्च को उन्होंने कहा था कि युद्ध कब खत्म होगा, यह उन्हें 'अंदर से महसूस होगा,' और यह ज्यादा लंबा नहीं चलेगा। 12 मार्च को उन्होंने कहा कि ईरान लगभग खत्म होने की स्थिति में है और अब सिर्फ समय का सवाल है। उन्होंने इसी तरह के कई दावे 2 से 11 मार्च के बीच भी किए।

फिर भी युद्ध क्यों जारी है?

इतने दावों के बावजूद युद्ध इसलिए खत्म नहीं हुआ, क्योंकि उसकी बुनियादी शर्तें पूरी नहीं हुई हैं। ईरान ने आत्मसमर्पण नहीं किया है, कोई युद्धविराम नहीं हुआ है, कोई समझौता नहीं हुआ है और न ही सत्ता परिवर्तन जैसी कोई स्थिति बनी है।

इसके उलट, ईरान लगातार मिसाइल हमलों, अपने क्षेत्रीय नेटवर्क और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण के जरिए अपनी ताकत दिखा रहा है, जो दुनिया के लिए अहम तेल सप्लाई रूट है। यानी एक तरफ अमेरिका जीत का दावा कर रहा है, दूसरी तरफ ईरान अब भी सक्रिय और मजबूत है।

बयान और रणनीति में साफ फर्क

इस संघर्ष के जारी रहने की एक बड़ी वजह यह भी है कि ट्रंप के बयान और असली रणनीति में तालमेल नहीं दिखता। कभी वे जीत की बात करते हैं, तो कभी और हमले की चेतावनी देते हैं। इससे यह साफ नहीं होता कि अमेरिका का असली मकसद क्या है- सरकार बदलना, दबाव बनाना या समझौता करना।

विश्लेषकों का मानना है कि ये बयान तेल बाजार और घरेलू राजनीति को प्रभावित करने के लिए भी हो सकते हैं। जीत का संदेश देकर बाजार को स्थिर रखने और लोगों को भरोसा देने की कोशिश की जा रही हो सकती है। लेकिन जब तक ठोस नतीजे नहीं आते, ऐसे बयान युद्ध खत्म नहीं कर सकते।

युद्ध खत्म करने के लिए क्या जरूरी है?

इस संघर्ष को खत्म करने के दो ही रास्ते हैं। पहला, एक समझौता- जिसमें प्रतिबंध, ईरान का परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा जैसे मुद्दों का हल निकले, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर।

दूसरा, युद्ध में ऐसा बड़ा बदलाव, जिससे ईरान झुकने पर मजबूर हो जाए। लेकिन एक्सपर्ट मानते हैं कि इसके लिए बड़े स्तर पर सैन्य कार्रवाई करनी पड़ सकती है, जिसमें जमीनी सेना भी शामिल हो सकती है। और यह काफी जोखिम भरा होगा।

दावों के बावजूद खत्म नहीं हुआ युद्ध

फिलहाल, ट्रंप के बार-बार किए गए दावे जमीन पर कोई बदलाव नहीं ला पाए हैं। युद्ध जारी है, ईरान डटा हुआ है और जब तक कोई स्पष्ट समझौता या निर्णायक नतीजा नहीं निकलता, तब तक यह संघर्ष खत्म होने वाला नहीं है। चाहे इसे कितनी ही बार खत्म बताया जाए।

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