60 दिन या टोल टैक्स! ट्रंप की नई धमकी से मिडिल ईस्ट में हड़कंप, होर्मुज में अब वसूली करेगा अमेरिका

Trump Strait of Hormuz: ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम शांति समझौता नहीं हुआ, तो वाशिंगटन कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अपना खुद का समुद्री टोल लगा देगा

अपडेटेड Jun 21, 2026 पर 7:28 AM
ट्रंप की यह धमकी ऐसे समय में आई है जब स्विट्जरलैंड में डील के अगले दौर की बातचीत शुरू होने जा रही है

Trump Threatens Hormuz Toll: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर एक बेहद सख्त चेतावनी जारी की है। ट्रंप ने साफ कहा है कि अगर अगले 60 दिनों के भीतर ईरान के साथ अंतिम शांति समझौता नहीं हुआ, तो वाशिंगटन कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर अपना खुद का समुद्री टोल लगा देगा।

दरअसल, हाल ही में तेहरान के साथ एक अंतरिम समझौता हुआ है, जिसमें केवल दो महीने के लिए इस रूट से बिना किसी टैक्स के जहाजों को आने-जाने की छूट दी गई है। इसी बात को लेकर अमेरिका के भीतर राजनीतिक दबाव बढ़ रहा था, जिसके बाद ट्रम्प ने यह कड़ा रुख अपनाया है।

अमेरिका बनेगा 'गार्जियन एंजेल', वसूलेगा पुराना और नया खर्च


कैंप डेविड से सोशल मीडिया पर जारी एक बयान में राष्ट्रपति ट्रंप ने घरेलू और वैश्विक चिंताओं को शांत करने की कोशिश की। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि 60 दिनों की समयसीमा के दौरान या उसके बाद किसी भी देश को समुद्री टैक्स वसूलने की इजाजत नहीं होगी, जब तक कि वह पैसा सीधे अमेरिका को न मिले।

ट्रंप ने इस संभावित अमेरिकी टोल टैक्स को जायज ठहराते हुए कहा कि अमेरिकी सेना मिडिल ईस्ट के देशों के लिए एक 'गार्जियन एंजेल' की तरह काम करती है। इसलिए, सेना द्वारा दी जा रही सेवाओं के बदले अतीत और भविष्य में होने वाले ऑपरेशनल खर्च की भरपाई के लिए यह टैक्स लिया जाएगा।

स्विट्जरलैंड में महामंथन: पाकिस्तान और कतर बने मध्यस्थ

ट्रंप की यह अचानक आई धमकी ऐसे समय में आई है जब स्विट्जरलैंड में बेहद नाजुक दौर की कूटनीतिक बातचीत शुरू होने जा रही है। इस हाई-प्रोफाइल वार्ता में पाकिस्तान और कतर मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे हैं।

इस बातचीत का मुख्य मकसद एक व्यापक परमाणु समझौते को अंतिम रूप देना और क्षेत्र के तनाव को कम करना है। इस बातचीत को सफल बनाने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर कलीबाफ सहित कई बड़े नेता यूरोप पहुंच रहे हैं।

ईरान ने दी थी समुद्री रास्ता बंद करने की धमकी

इस अंतरिम समझौते की मजबूती पर पहले से ही सवाल उठ रहे हैं। लेबनान में हुए हालिया इजरायली सैन्य हमलों का हवाला देते हुए ईरान के शीर्ष सैन्य कमांड ने शुरू में होर्मुज जलडमरूमध्य को जहाजों के लिए बंद करने का ऐलान कर दिया था। ईरान ने वाशिंगटन पर अपने कूटनीतिक वादों से मुकरने का आरोप लगाया था। तेहरान का तर्क था कि शुरुआती समझौते के तहत सभी मोर्चों पर तुरंत दुश्मनी और जंग रुकनी चाहिए थी।

आर्थिक मोर्चे पर क्या दांव पर लगा है?

ईरान की तीखी बयानबाजी के बावजूद, वाशिंगटन ने अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन पर ईरान के संप्रभु अधिकार के दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने पुष्टि की है कि पश्चिमी नौसेना की कड़ी निगरानी में समुद्री यातायात पूरी तरह सुचारू रूप से चल रहा है। विवाद के तुरंत बाद भी दर्जनों व्यापारिक जहाज लाखों बैरल तेल लेकर सुरक्षित रूप से इस रास्ते से गुजरे हैं।

हालांकि, खाड़ी के अरब देश किसी भी ऐसे नए समुद्री नियम के सख्त खिलाफ हैं जिससे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो। ऐसे में ट्रंप द्वारा अमेरिकी टैक्स लगाने की इस नई शर्त ने बातचीत को और उलझा दिया है। अब राजनयिकों के सामने चुनौती यह है कि वे एक बड़े आर्थिक संकट को भी टालें और अमेरिका की इस आक्रामक मांग को भी संभालें।

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