भारतीय वोटिंग सिस्टम के मुरीद हुए ट्रंप, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने अमेरिका को इलेक्शन कराने के तरीके सिखाए

India elections: अमेरिका में चुनावी नियमों को और सख्त करने की मांग के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण दिया है। मंगलवार 18 अगस्त को तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ बातचीत का जिक्र करते हुए अमेरिकी चुनावों में अनिवार्य फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की जरूरत पर जोर दिया

अपडेटेड Aug 18, 2026 पर 7:47 AM
India elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था की जमकर तारीफ की है

India elections: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था की जमकर तारीफ की है। ट्रंप का कहना है कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिका को चुनाव कराने का तरीका सिखाया। कुमार ने ट्रंप प्रशासन से पूछा, "बिना वैध फोटो आईडी के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं?" अमेरिका में चुनावी नियमों को और सख्त करने की मांग के बीच ट्रंप ने भारत की चुनाव व्यवस्था का उदाहरण दिया है।

मंगलवार (18 अगस्त) तड़के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म Truth Social पर एक पोस्ट में ट्रंप ने भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के साथ कथित बातचीत का जिक्र करते हुए अमेरिकी चुनावों में अनिवार्य फोटो पहचान पत्र (Photo ID) की जरूरत पर जोर दिया।

बिना वैध फोटो ID के चुनाव कैसे?


'ट्रुथ सोशल' पर एक पोस्ट में ट्रंप ने अपनी सरकार और कुमार के बीच इस महीने की शुरुआत में हुई बातचीत का जिक्र किया। ट्रंप ने कहा कि CEC ने सवाल किया था कि बिना अनिवार्य फोटो पहचान पत्र के अमेरिका में चुनाव कैसे हो सकते हैं। ट्रंप ने लिखा, "इस महीने की शुरुआत में भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने हमारी सरकार से पूछा- आप बिना वैध फोटो ID के US में चुनाव कैसे करा सकते हैं?"

भारतीय चुनाव का जिक्र

इसके बाद ट्रंप ने भारत के 2024 के लोकसभा चुनाव का ज़िक्र करते हुए कहा कि इसमें 64.6 करोड़ (646 मिलियन) मतदाताओं ने हिस्सा लिया। इस दौरान 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट दिया। उन्होंने दावा किया कि हर मतदाता के लिए वैध फोटो पहचान पत्र दिखाना जरूरी था।

उन्होंने कहा, "भारत के पिछले चुनाव में 64.6 करोड़ (646,000,000) मतदाता थे! 1% से भी कम लोगों ने डाक से वोट दिया। हर मतदाता के पास वैध फोटो पहचान पत्र होना जरूरी था।"

ट्रंप ने इस तुलना का इस्तेमाल अपनी उस मांग को फिर से उठाने के लिए किया जिसमें वे चाहते हैं कि कानून बनाने वाले 'Save America Act' को पास करें।

Save America Act पर जोर

ट्रंप ने कहा, "हमें अभी 'SAVE अमेरिका एक्ट' पास करने की जरूरत है!" ट्रंप का यह तर्क वॉशिंगटन में वोटर पहचान, नागरिकता के सबूत और डाक से वोट (मेल-इन बैलेट) की सुविधा को लेकर चल रहे लंबे राजनीतिक विवाद के बीच आया है। राष्ट्रपति का तर्क है कि वोटर ID एक बुनियादी जरूरत होनी चाहिए। उन्होंने रिपब्लिकन और डेमोक्रेट्स से इस कानून का समर्थन करने को कहा है।

'SAVE एक्ट' 29 जनवरी को अमेरिकी संसद में पेश किया गया था। हालांकि, इसके पास होने की संभावना अनिश्चित बनी हुई है, क्योंकि डेमोक्रेट्स इस उपाय का विरोध कर रहे हैं। संसद में वोटिंग नियमों को लेकर मतभेद जारी हैं। सीनेट भी इस कानून को आगे बढ़ाए बिना इस महीने की शुरुआत में पांच हफ्ते की छुट्टी पर चली गई थी। व्हाइट हाउस ने प्रस्तावित कानून को चुनाव की निष्पक्षता बनाए रखने वाला कदम बताया है।

क्या है 'SAVE एक्ट'?

यह कानून संघीय चुनावों के लिए वोटर रजिस्ट्रेशन और चुनाव संबंधी जरूरतों को कड़ा करने के मकसद से लाया गया है। व्हाइट हाउस के अनुसार, इस कानून के तहत वोटरों को फेडरल चुनाव के लिए रजिस्टर करने से पहले वैध पहचान-पत्र और अमेरिकी नागरिकता का सबूत देना होगा। इसमें मेल-इन बैलेट (डाक से वोटिंग) पर पाबंदी लगाने का भी प्रस्ताव है। हालांकि बीमारी, विकलांगता, मिलिट्री सर्विस और यात्रा जैसी स्थितियों में छूट दी जाएगी। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि यह कानून राज्यों को वोटर लिस्ट से गैर-नागरिकों के नाम हटाने का निर्देश भी देगा।

इन देशों के चुनावी प्रक्रिया का जिक्र

ट्रंप प्रशासन ने भारत और ब्राजील समेत दूसरे देशों की चुनाव प्रक्रियाओं से अमेरिकी चुनाव प्रक्रियाओं की तुलना करके अपनी बात को मजबूत करने की कोशिश की है। उनका कहना है कि ये दोनों देश वोटर की पहचान को बायोमेट्रिक डेटाबेस से जोड़ते हैं। जबकि अमेरिका नागरिकता के लिए ज्यादातर खुद के दावे (सेल्फ-अटेस्टेशन) पर निर्भर रहता है। प्रशासन ने जर्मनी और कनाडा का भी जिक्र किया है।

उन्होंने कहा है कि उनके वोट-गिनती के सिस्टम में कागज-आधारित प्रक्रियाएं और 'चेन-ऑफ-कस्टडी' (सुरक्षा और जवाबदेही) के बेहतर उपाय हैं। उन्होंने डेनमार्क और स्वीडन का उदाहरण भी दिया है, जहां मेल वोटिंग पर ज्यादा पाबंदियां हैं। खास बात यह है कि व्हाइट हाउस की यह तुलना अमेरिकी चुनाव नियमों में बदलाव के लिए ट्रंप के बड़े कैंपेन का हिस्सा बन गई है।

उनके प्रशासन ने बार-बार कहा है कि वोटर की पहचान और नागरिकता के सबूत की ज़रूरतें बुनियादी सुरक्षा उपाय हैं जो पूरे देश में लागू होने चाहिए। यह कानून 29 जनवरी को संसद में पेश किया गया था। यह चुनाव के कड़े नियमों के लिए ट्रंप के बड़े कैंपेन का हिस्सा बन गया है। ट्रंप द्वारा भारत का ज़िक्र किए जाने से भारत का चुनाव सिस्टम वोटिंग प्रक्रियाओं को लेकर अमेरिका में चल रही तीखी राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

भारतीय चुनाव सिस्टम क्या है?

भारत का 2024 का लोकसभा चुनाव सात चरणों में हुआ था। इसमें देश भर से करोड़ों वोटरों ने हिस्सा लिया था। भारत का चुनाव आयोग वोटर लिस्ट-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल करता है। साथ ही पोलिंग स्टेशन पर आने वाले वोटरों के लिए तय पहचान-पत्रों की जरूरत होती है। 'सेव अमेरिका एक्ट' (SAVE America Act) फेडरल चुनाव नियमों में बड़े बदलाव लाने की ट्रंप की कोशिश का एक अहम हिस्सा बना हुआ है।

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