Trump-Putin meet: कोई एग्रीमेंट नहीं, मीडिया से बातचीत नहीं, फिर भी इस मीटिंग ने दुनिया के लिए जगाई बड़ी उम्मीद

पुतिन बीते 10 सालों में पहली बार अमेरिका गए थे। वहां उनका रेड कॉर्पेट वेलकम हुआ। ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति के बीच तीन घंटों तक बातचीत हुई। लेकिन, क्या बातचीत हुई कोई नहीं बता रहा। खास बात यह कि ट्रंप और पुतिन इस बातचीत से संतुष्ट नजर आए

अपडेटेड Aug 16, 2025 पर 1:39 PM
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पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस को अब पन्ना पलटने की जरूरत है। इसका मतलब है कि शीत युद्ध के बाद से खराब द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार करने का वक्त आ गया है।

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15 अगस्त को होने वाली बातचीत पर दुनियाभर की नजरें लगी थीं। माना गया था कि बातचीत में साढ़े तीन साल से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध का समाधान निकल आएगा। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। करीब तीन घंटे तक चली बातचीत के बाद ट्रंप और पुतिन मीडिया के सामने आए। लेकिन, उन्होंने मीडिया के किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। पहले कहा गया था कि बातचीत के बाद दोनों नेता संयुक्त रूप से मीडिया से बातचीत करेंगे। सवाल है कि क्या यह बातचीत बेनतीजा रही?

कई मसलों पर सहमति बनने का दावा

ट्रंप और पुतिन की मानें तो यह बातचीत बेनतीजा नहीं रही। दोनों नेताओं ने इसे सार्थक बताया है। ट्रंप ने कहा, "हमारी बातचीत काफी सार्थक रही। दोनों के बीच कई मसलों पर सहमति बनी। सिर्फ कुछ मसलें बच गए हैं। हम उन पर सहमति नहीं बना पाए। लेकिन, उन पर सहमित बनने की काफी ज्यादा संभावना है।" खास बात यह है कि पुतिन का अमेरिका में भव्य स्वागत हुआ। इसे 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमलों के बाद पश्चिम के साथ रूस के रिश्ते में बदलाव का संकेत माना जा रहा है।


ट्रप को मिला रेड कॉर्पेट वेलकम

पुतिन इस मीटिंग के लिए ट्रंप को शुक्रिया कहा है। हंसते हुए उन्होंने कहा कि अगली बार दोनों की मुलाकात की जगह मास्को हो सकती है। पुतिन को अमेरिका में रेड कार्पेट वेलकम मिला। इस बैठक के दौरान दोनों नेताओं के साथ उनके टॉप ऑफिशियल्स भी मौजूद थे। मीटिंग के बाद पहले पुतिन ने अपनी प्रतिक्रिया जताई। उन्होंने अमेरिका, रूस और पूर्व सोवियत संघ के बीच के ऐतिहासिक रिश्ते की तारीफ की। सेकेंड वर्ल्ड वॉर के दौरान दोनों से देशों के संयुक्त मिशन की याद दिलाई।

यूक्रेन युद्ध रोकने पर एग्रीमेंट नहीं होने से निराशा

उन्होंने कहा कि अमेरिका और रूस एक जैसी वैल्यू शेयर करते हैं। उन्होंने कहा कि ट्रंप कई बार कह चुके हैं कि अगर उन्होंने 2020 का चुनाव जीता होता तो यूक्रेन युद्ध शुरू नहीं होता। उन्होंने कहा कि मुझे भी ऐसा लगता है। सच यह है कि ट्रंप इस बातचीत का हिस्सा इस उम्मीद में बने थे कि पुतिन यूक्रेन के खिलाफ लड़ाई रोकने को तैयार हो जाएंगे। इतना नहीं तो कम से कम पुतिन युद्ध खत्म करने के लिए बातचीत शुरू करने को तैयार हो जाएंगे।

तीन घंटे की बातचीत की डिटेल नहीं आई

भले ही इस बातचीत में रूस-यूक्रेन के बीच लड़ाई खत्म होने का रास्ता नहीं निकला, लेकिन यह तय है कि दोनों नेता बातचीत से संतुष्ट दिखें। ट्रंप ने कहा कि मेरा मानना है कि यह मीटिंग काफी सार्थक रही। हालांकि, उन्होंने इस बारे में कुछ नहीं बताया कि आखिर तीन घंटे तक दोनों के बीच में क्या बातचीत हुई। फॉक्स न्यूज चैनल से बातचीत में भी उन्होंने यह नहीं बताया कि पुतिन के साथ आखिर क्या बातचीत हुई। उधर, पुतिन ने भी बातचीत के विषयों के बारे में कुछ नहीं कहा है।

पुतिन की वैश्विक मंच पर वापसी

अलास्का में दोनों नेताओं की बातचीत से ज्यादा फायदा पुतिन को मिलता दिख रहा है। इससे रूसी सेना को बढ़त मिल गई है, जिन्होंने अपनी संख्या बल की बदौलत ईस्टर्न यूक्रेन के डिफेंस को पिछले साढ़े तीन साल से जारी लड़ाई में काफी कमजोर कर दिया है। इधर, 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले शुरू होने के बाद पहली बार अमेरिकी राष्ट्रपति से पुतिन की मुलाकात हुई है। दोनों इस मुलाकात से काफी संतुष्ट हैं। ट्रंप ने बातचीत के बाद यह कहा है कि अगर दोनों नेता मिल जाए तो हर हफ्ते होने वाली 7000 मौतों को रोका जा सकता है।

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अमेरिका और रूस के रिश्तों में बदलाव के संकेत

पुतिन ने कहा कि अमेरिका और रूस को अब पन्ना पलटने की जरूरत है। इसका मतलब है कि शीत युद्ध के बाद से खराब द्विपक्षीय रिश्तों में सुधार करने का वक्त आ गया है। बीते 10 सालों में पुतिन पहली बार अमेरिका गए। उनका वहां रेड कार्पेट वेलकम हुआ। यह बताता है कि अब वैश्विक मंच पर रूस के अलगथलग पड़ने के दिन खत्म हो चुके हैं। खासकर यूक्रेन पर हमलों के बाद से रूस को काफी अलगाव झेलना पड़ा है। अब उसके लिए अपनी खोई साख फिर से हासिल करने का मौका है।

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