Donald Trump: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध जैसे हालात बनते दिख रहे है। ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है कि अगर शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग किया गया, तो अमेरिका हस्तक्षेप करेगा। ट्रंप के इस बयान पर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों को तबाह करने की धमकी दी है।
ट्रंप की चेतावनी: 'हम तैयार हैं'
ईरान में बिगड़ते हालातों पर डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए सीधा संदेश दिया। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरानी अधिकारियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की, तो अमेरिका उनके बचाव में आएगा। ट्रंप ने अपने चिर-परिचित अंदाज में लिखा, 'हमारा हथियार लोड है और हम कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार हैं'। हालांकि हस्तक्षेप का स्वरूप सैन्य या कूटनीतिक होगा ये स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन 'Locked and Loaded' जैसे शब्दों ने मध्य-पूर्व की सुरक्षा एजेंसियों में खलबली मचा दी है।
'रेड लाइन पार न करें अमेरिका': ईरान का पलटवार
ईरानी नेतृत्व ने ट्रंप की धमकी को संप्रभुता पर हमला बताया है। ईरान के संसद अध्यक्ष ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने कोई आक्रामक कदम उठाया, तो क्षेत्र में मौजूद तमाम अमेरिकी सैन्य ठिकाने और बल 'जायज निशाना' होंगे। सुप्रीम लीडर के वरिष्ठ सलाहकार अली शमखानी ने ट्रंप का मजाक उड़ाते हुए कहा कि ईरान की सुरक्षा हमारी 'रेड लाइन' है और हस्तक्षेप करने वाले हाथ को ऐसा सबक मिलेगा कि उसे पछताना पड़ेगा।
आखिर क्यों जल रहा है ईरान?
ईरान में विरोध प्रदर्शनों की आग के पीछे मुख्य कारण आर्थिक बदहाली है।आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर में महंगाई दर 42.5% तक पहुंच गई है। मुद्रा की गिरती कीमत और कमजोर विकास दर ने आम जनता को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है। आर्थिक मुद्दों से शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब सत्ता विरोधी नारों और बड़े राजनीतिक बदलाव की मांग में तब्दील हो चुका है।
ईरान सरकार ने इस बार प्रदर्शनों को दबाने के लिए एक नया तर्क दिया है। सरकारी एजेंसियों का दावा है कि सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ विरोध प्रदर्शन के वीडियो और नारों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जरिए तैयार या मैनिपुलेट किया गया है। इस दावे के जरिए ईरान सरकार वैश्विक स्तर पर प्रदर्शनों की प्रमाणिकता को चुनौती दे रही है।