Trump Tariff Refund: ट्रंप ने बीते साल भारत, चीन समेत दुनिया के कई देशों पर 25 से 50% तक टैरिफ लगा दिया था। बाद में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के उन फैसलों को असंवैधानिक करार दे दिया। यही वजह है कि अब अमेरिकी सरकार 20 अप्रैल यानी आज से अरबों डॉलर के टैरिफ वापस करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रही है। यह अमेरिकी इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा 'टैरिफ रिफंड' अभियान होने वाला है।
यूएस कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल लॉन्च किया है। इसके जरिए इम्पोर्टर्स सोमवार सुबह से अपने रिफंड के दावे फाइल करना शुरू कर सकते हैं। यह रिफंड प्रक्रिया का पहला चरण है।
क्यों वापस हो रहा है यह पैसा?
फरवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि ट्रंप ने 1977 के एक 'आपातकालीन कानून' का गलत इस्तेमाल कर ये टैरिफ लगाए थे। कोर्ट के अनुसार, ट्रंप ने कांग्रेस की शक्तियों का उल्लंघन किया था। बाद में 'यूएस कोर्ट ऑफ इंटरनेशनल ट्रेड' ने आदेश दिया कि कंपनियों को उनका पैसा वापस मिलना चाहिए।
किसे मिलेगा पैसा और कौन है पात्र?
इसके तहत दावे करने के बाद सभी को तुरंत पैसा नहीं मिलेगा। शुरुआती चरण में कुछ नियम तय किए गए हैं। फिलहाल केवल वे आयातक और कस्टम ब्रोकर ही दावा कर सकते हैं जिन्होंने ट्रंप की 'आपातकालीन शक्तियों' के तहत शुल्क चुकाया था। पहले चरण में केवल वे एंट्रीज शामिल हैं जिनका हिसाब-किताब फाइनल नहीं हुआ है या जो फाइनल अकाउंटिंग के 80 दिनों के भीतर हैं। आंकड़ों के मुतबिक, लगभग 3.30 लाख आयातकों ने 53 मिलियन शिपमेंट पर करीब ₹14 लाख करोड़ का शुल्क चुकाया था। हालांकि, अभी तक केवल 56,500 आयातकों ने ही इसके लिए जरूरी इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन पूरा किया है।
वैसे इतने बड़े पैमाने पर रिफंड में तकनीकी दिक्कतों की आशंका जताई जा रही है। एक साथ हजारों दावों के कारण पोर्टल में गड़बड़ी हो सकती है। छोटे व्यापारियों का कहना है कि रिफंड में महीनों की देरी उनकी कैश फ्लो को खराब कर सकती है।
रिफंड की प्रक्रिया क्या है?
कंपनियों को नए CAPE सिस्टम के माध्यम से अपनी शिपमेंट और चुकाए गए टैरिफ की पूरी जानकारी देनी होगी। अगर दावा सही पाया जाता है, तो ब्याज सहित पैसा 60 से 90 दिनों के भीतर मिल सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि फॉर्म भरने में छोटी सी गलती भी पूरे दावे को खारिज करा सकती है।
क्या आम उपभोक्ताओं को भी मिलेगा लाभ?
यह एक बड़ा सवाल है कि, क्या आम उपभोक्ताओं को भी टैरिफ रिफंड का लाभ मिलेगा? दरअसल टैरिफ का भुगतान कंपनियां करती हैं, लेकिन वे इसकी वसूली ग्राहकों से बढ़ी हुई कीमतों के जरिए करती हैं। वैसे रिफंड सीधे कंपनियों को मिलेगा और वे इसे ग्राहकों को देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य नहीं हैं। FedEx जैसी बड़ी कंपनियों ने कहा है कि वे रिफंड मिलने पर इसका लाभ ग्राहकों को देंगे। वहीं, कॉस्टको जैसी कंपनियों पर ग्राहकों ने मुकदमा किया है ताकि उन्हें भी हिस्सा मिले।