Trump Tariffs: डोनाल्ड ट्रंप ने रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने के ऑर्डर पर हस्ताक्षर किया, जानिए भारत सहित दूसरे देशों पर इसका क्या पड़ेगा असर

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये रेसिप्रोकल टैरिफ 2025 और 2026 में लगाए थे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रख ट्रेड से जुड़े दूसरे कई तरह के कदम भी उठाए थे। अमेरिकी सरकार की एजेंसियों को दूसरे देशों के गुड्स पर टैरिफ का कलेक्शन तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है

अपडेटेड Feb 21, 2026 पर 12:02 PM
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डोनाल्ड ट्रंप ने इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत एक के बाद एक कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 20 फरवरी को रेसिप्रोकल एडिशनल एड-वेलोरम टैरिफ खत्म करने के एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर कर दिया। उन्होंने इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) के तहत एक के बाद एक कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। हालांकि, ट्रेड से जुड़े उन्होंने जो दूसरे तरह के कदम उठाए थे, वे बने रहेंगे।

एक्सपोर्ट्स को नहीं चुकाना होगा रेसिप्रोकल टैरिफ

एग्जिक्यूटिव ऑर्डर में कहा गया है, "हाल के घटनाक्रम के आलोक में पहले के एग्जिक्यूटिव्स ऑर्डर के जरिए जो रेसिप्रोकल ड्यूटी लगाई गई थी, वह अब प्रभावी नहीं होगी और जितना जल्द हो सके अब उसे कलेक्ट नहीं किया जाएगा।" इसका मतलब है कि ट्रंप ने दूसरे देशों के गुड्स पर जो टैरिफ लगाए थे, उसे अब एक्सपोर्ट्स का नहीं चुकाना होगा।


ट्रंप ने 2025 और 2026 में कई देशों पर लगाए थे टैरिफ

अमेरिकी राष्ट्रपति ने ये रेसिप्रोकल टैरिफ 2025 और 2026 में लगाए थे। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा को ध्यान में रख ट्रेड से जुड़े दूसरे कई तरह के कदम भी उठाए थे। इनमें नॉर्दर्स और सदर्न अमेरिकी सीमाओं के जरिए ड्रग्स की सप्लाई रोकने के उपाय शामिल थे। ट्रंप ने कहा था कि दूसरे देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने का मकसद अमेरिकी व्यापार घाटे में कमी लाना है। हालांकि, इससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बड़ा झटका लगा था।

अमेरिका ने सभी देशों पर लगाया 10 फीसदी टैरिफ

अमेरिकी सरकार की तरफ से कहा गया है कि IEEPA आधारित टैरिफ हटाए जा रहे हैं, लेकिन इससे अलग इमर्जेंसी ऑर्डर्स अपनी जगह बने रहेंगे। उन पर इस ऑर्डर (रेसिप्रोकल टैरिफ हटाने का) का असर नहीं पड़ेगा। यह ऑर्डर सभी देशों पर 10 फीसदी टैरिफ लगाने वाले एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर ट्रंप के हस्ताक्षर के तुरंत बाद आया। इससे पहले 20 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया था।

नया 10 फीसदी टैरिफ 1974 के एक्ट के तहत लगाया गया

ट्रंप ने 10 फीसदी का नया टैरिफ 1974 के ट्रेड एक्ट के सेक्शन 122 के तहत लगाया है। यह एक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति को 150 दिनों तक के लिए अस्थायी, गैरभेदभावपूर्ण टैरिफ लगाने का अधिकार देता है। इस टैरिफ की अवधि बढ़ाने के लिए अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी होगी। इसका मतलब है कि अगर ट्रंप दूसरे देशों पर 10 फीसदी टैरिफ को लगाए रखना चाहते हैं तो उन्हें अमेरिकी संसद की मंजूरी हासिल करनी होगी।

सरकारी एजेंसियों को टैरिफ की वसूली तुरंत रोकने का निर्देश

इस बीच अमेरिकी सरकार की एजेंसियों को दूसरे देशों के गुड्स पर टैरिफ का कलेक्शन तुरंत बंद करने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब है कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला जल्द लागू हो जाएगा। इससे अमेरिका से व्यापार करने वाले एक्सपोर्ट्स को काफी राहत मिलेगी। उन्हें अपने गुड्स पर रेसिप्रोकल टैरिफ नहीं चुकाना होगा। चीन सहित दुनिया के कई देश अमेरिका को रोजमर्रा की चीजों सहित कई तरह के गुड्स का निर्यात करते हैं।

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भारत सहित दूसरे देशों के एक्सपोर्ट्स को बड़ी राहत

रेसिप्रोकल टैरिफ हटने से भारत को भी बड़ी राहत मिलेगा। हालांकि, फरवरी की शुरुआत में ट्रंप ने भारत पर टैरिफ 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया था। उन्होंने भारत के साथ अंतरिम व्यापार समझौते का भी ऐलान किया था। अभी दोनों देशों के अधिकारी इस समझौते के फ्रेमवर्क को अंतिम रूप दे रहे हैं। इस पर अगले महीने दोनों देशों के हस्ताक्षर होने की संभावना है।

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