अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप को दिया बड़ा झटका, कहा-ट्रंप का टैरिफ गैरकानूनी

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को डोनाल्ड ट्रंप को बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यूएस सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से दिए अपने फैसले में निचले कोर्ट के उस फैसले को सही करार दिया, जिसने टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले को गैरकानूनी बताया था

अपडेटेड Feb 20, 2026 पर 9:27 PM
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मेरिका के सबसे बड़े कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने कई तरह के टैरिफ लगाने का फैसला किया था, जो उनके अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन था।

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 20 फरवरी को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ पर अपना फैसला सुना दिया। उसने ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने के फैसले को रद्द कर दिया। अमेरिका के सबसे बड़े कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने कई तरह के टैरिफ लगाने का फैसला किया था, जो उनके अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन था। कोर्ट ने कहा कि इससे वैश्विक व्यापार में बाधा आई।

सुप्रीम कोर्ट 6-3 से दिया फैसला

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को डोनाल्ड ट्रंप के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। यूएस सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 से दिए अपने फैसले में निचले कोर्ट के उस फैसले को सही करार दिया, जिसने टैरिफ लगाने के ट्रंप के फैसले को गैरकानूनी बताया था।


 इमर्जेंसी एक्ट का इस्तेमाल करना गलत

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने के लिए इंटरनेशनल इमर्जेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट का इस्तेमाल किया। यह एक्ट अमेरिकी राष्ट्रपति को दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इसका मतलब है कि कोर्ट ने इस टैरिफ लगाने के लिए इस एक्ट के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है।

ट्रंप ने दुनिया के ज्यादातर देशों पर लगाया था टैरिफ

ट्रंप ने पिछले साल 20 जनवरी को राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी। उसके बाद से ही उन्होंने दूसरे देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी देनी शुरू कर दी थी। ट्रंप का यह बतौर राष्ट्रपति दूसरा कार्यकाल है। उन्होंने चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देशों पर रेसिप्रोकल टैरिफ लगाने का ऐलान किया। फिर बाद में कई देशों से समझौता कर टैरिफ कम किया।

3 फरवरी को भारत पर टैरिफ घटाया था

अमेरिका ने सबसे ज्यादा 50 फीसदी का टैरिफ भारत पर लगाया था। इसमें 25 फीसदी का टैरिफ रूस से तेल खरीदने पर पेनाल्टी के रूप में लगाया था। हालांकि, 3 फरवरी को ट्रंप ने भारत पर टैरिफ घटाकर 18 फीसदी करने का ऐलान किया। रूस से तेल खरीदने पर लगाया गया 25 फीसदी टैरिफ वापस ले लिया। उन्होंने भारत से अंतरिम व्यापार समझौते का भी ऐलान किया।

चीफ जस्टिस ने कहा काग्रेंस की मंजूरी जरूरी

चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने अपने फैसले में लिखा, "राष्ट्रपति ने असिमित अमाउंट, अवधि और दायरा वाला एक तरफा टैरिफ लगाने में असाधारण शक्तियों का इस्तेमाल किया। ऐसा करने के लिए उन्हें कांग्रेस के सदस्यों की मंजूरी हासिल करनी चाहिए थी। उन्होंने जिस तरह से इमर्जेंसी अथॉरिटी का इस्तेमाल किया, वह गलत था"

ट्रंप ने टैरिफ को बनाया था अपना बड़ा हथियार

पिछले साल की शुरुआत में राष्ट्रपति पद की शपथ लेते ही ट्रंप ने दूसरे देशों पर दबाव बनाने के लिए टैरिफ को हथियार के रूप में इस्तेमाल करना शुरू कर दिया था। उन्होंने करीब उन सभी देशों पर टैरिफ लगाया था, जो अमेरिका के साथ व्यापार करते हैं। उन्होंने दलील दी थी कि दूसरे देश अमेरिकी गुड्स पर काफी ज्यादा टैरिफ लगाते हैं, जबकि अमेरिका में बगैर टैरिफ या बहुत कम टैरिफ पर अपने माल बेचते हैं।

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