UAE Demand Repayment from Pakistan: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच पाकिस्तान को एक बड़ा झटका लगा है। पाक और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच दरार अब खुलकर सामने आ गई है। UAE ने अचानक पाकिस्तान से अपने 3.45 अरब डॉलर यानी करीब 28,000 करोड़ रुपये वापस मांग लिए, जिससे इस्लामाबाद और IMF दोनों ही सदमे में आ गए है। एक तो पाकिस्तान पहले से ही कंगाली का सामना कर रहा है उसी बीच इस आर्थिक झटके ने उसे झकझोर कर रख दिया है। वैसे इस फैसले के पीछे UAE का भारत के प्रति बढ़ते झुकाव को एक बड़ी वजह माना जा रहा है।
UAE ने पाकिस्तान से मांगा अपना उधार
स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) के मुताबिक, उसने 23 अप्रैल को 1 अरब डॉलर अबू धाबी फंड फॉर डेवलपमेंट (ADFD) को चुकाए हैं, जबकि 2.45 अरब डॉलर पहले ही दिए जा चुके थे। UAE ने पहले वादा किया था कि वह 2027 में पाकिस्तान के IMF प्रोग्राम खत्म होने से पहले पैसे वापस नहीं मांगेगा। इस अचानक आए बदलाव ने कूटनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है।
ईरान-US के बीच पाकिस्तान की 'मध्यस्थता' से नाराजगी
'फाइनेंशियल टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, UAE इस बात से नाराज है कि पाकिस्तान ईरान-अमेरिका युद्ध में तटस्थ रहने की कोशिश कर रहा है। खाड़ी देशों पर हुए ईरानी हमलों के खिलाफ पाकिस्तान की प्रतिक्रिया 'दब्बू' रही। पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ के रूप में पेश कर रहा है, जबकि UAE का मानना है कि इस स्थिति में 'मिडल ग्राउंड' जैसी कोई चीज नहीं है, या तो आप साथ हैं या खिलाफ।
सऊदी अरब बनाम UAE: पाकिस्तान बना अखाड़ा
पाकिस्तान की इस मुश्किल घड़ी में सऊदी अरब मसीहा बनकर उभरा है। सऊदी अरब ने पाकिस्तान को 2 अरब डॉलर दिए ताकि वह UAE का कर्ज चुका सके। यमन के गृहयुद्ध और क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर सऊदी अरब और UAE के बीच पहले से ही मतभेद हैं। अब पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार का आधा हिस्सा अकेले सऊदी अरब की मदद पर टिका है, जो उसकी कूटनीतिक स्वतंत्रता को कम कर सकता है।
'भारत से बढ़ती नजदीकी' बनी सबसे बड़ा फैक्टर
चैथम हाउस के विशेषज्ञ नील क्विलियम ने संकेत दिया है कि UAE अब पाकिस्तान के बजाय भारत में ज्यादा निवेश कर रहा है। UAE को पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच बनता नया रक्षा गठबंधन पसंद नहीं आ रहा है। भारत के साथ UAE के मजबूत होते व्यापारिक और रणनीतिक रिश्तों ने पाकिस्तान की अहमियत को कम कर दिया है।
पाकिस्तान ने क्या दी सफाई?
पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने इसे 'नियमित वित्तीय लेनदेन' बताकर मामले को शांत करने की कोशिश की है, लेकिन पर्दे के पीछे अधिकारी डरे हुए हैं। IMF और पाकिस्तानी सलाहकार इस बात से हैरान हैं कि द्विपक्षीय संबंधों में इतनी गिरावट आ जाएगी कि पैसे वापस मांगने के लिए समयसीमा का भी इंतजार नहीं किया गया।