'भारत बांग्लादेश-विरोधी किसी भी गतिविधि में शामिल नहीं', ढाका के आरोपों पर MEA ने दिया जवाब

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि नई दिल्ली को भारत में अवामी लीग के सदस्यों द्वारा किसी भी बांग्लादेश-विरोधी गतिविधि की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार भारतीय धरती से अन्य देशों के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देती है

अपडेटेड Aug 20, 2025 पर 9:50 PM
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बांग्लादेश ने बिना किसी सबूत के दावा किया था कि अवामी लीग के कार्यालय नई दिल्ली और कोलकाता में चल रहे हैं और उसने भारत से उन्हें तुरंत बंद करने का आग्रह किया था

MEA on Bangladesh: भारत ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के उन आरोपों को खारिज कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि अवामी लीग के सदस्य भारतीय धरती से बांग्लादेश विरोधी गतिविधियां चला रहे हैं। भारत ने कहा है कि, 'हमारी जमीन से किसी भी देश के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं है।' आपको बता दें कि बांग्लादेश की पार्टी अवामी लीग की प्रमुख और पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना इस समय भारत में निर्वासित जीवन जी रही हैं।

'ढाका का बयान बेबुनियाद': MEA

भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि नई दिल्ली को भारत में अवामी लीग के सदस्यों द्वारा किसी भी बांग्लादेश-विरोधी गतिविधि की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, 'सरकार भारतीय धरती से अन्य देशों के खिलाफ राजनीतिक गतिविधियों की अनुमति नहीं देती है। इसलिए, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार का प्रेस बयान गलत है।' दरअसल MEA का यह बयान तब आया जब बांग्लादेश ने बिना किसी सबूत के दावा किया था कि अवामी लीग के कार्यालय नई दिल्ली और कोलकाता में चल रहे हैं और उसने भारत से उन्हें तुरंत बंद करने का आग्रह किया था।


बांग्लादेश ने भारत पर लगाए थे गंभीर आरोप

बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय ने एक बयान में आरोप लगाया कि 'किसी भी बांग्लादेशी नागरिक द्वारा बांग्लादेश के हितों के खिलाफ किसी भी तरह की राजनीतिक गतिविधि, विशेष रूप से एक प्रतिबंधित राजनीतिक दल के फरार कार्यकर्ताओं द्वारा, जो कानूनी या अवैध रूप से भारतीय धरती पर रह रहे हैं, और कार्यालयों की स्थापना, बांग्लादेश के लोगों और राष्ट्र के खिलाफ एक स्पष्ट अपमान है।' बयान में विशेष रूप से नई दिल्ली और कोलकाता में कथित तौर पर स्थापित अवामी लीग से जुड़े कार्यालयों का उल्लेख किया गया था और भारत से उन्हें बंद करने का आग्रह किया गया था।

अतीत में बांग्लादेश पर भी लगे है आरोप

बांग्लादेश पर भी भारत विरोधी तत्वों को शरण देने के आरोप लगते रहे हैं, जिनमें पूर्वोत्तर के अलगाववादी आतंकवादी और कट्टरपंथी इस्लामी समूह शामिल है। 2000 के दशक की शुरुआत तक असम, त्रिपुरा और मेघालय के कई विद्रोही संगठनों ने कथित तौर पर बांग्लादेशी क्षेत्र के अंदर शिविर चलाए, जिसे स्थानीय नेटवर्कों का मौन समर्थन प्राप्त था। इस बात का उल्लेख भारतीय सुरक्षा आकलन और बर्टिल लिंटनर जैसे विद्वानों के 2012 की पुस्तक 'ग्रेट गेम ईस्ट' में भी किया गया है। पिछले दशक में बांग्लादेश पर हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश (HuJI-B) जैसे इस्लामी संगठनों को सुरक्षित पनाहगाह देने के आरोप भी लगे है, जो भारत में आतंकी साजिशों से जुड़े थे।

मई 2025 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य टकराव के बीच बांग्लादेश के सेवानिवृत्त मेजर जनरल ए.एल.एम. फजलुर रहमान ने एक भड़काऊ पोस्ट में कहा था कि अगर भारत, पाकिस्तान पर हमला करता है, तो बांग्लादेश को चीनी समर्थन से भारत के पूर्वोत्तर के सात राज्यों पर कब्जा कर लेना चाहिए।

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