शुक्रवार को अमेरिका और इजरायल ने ईरान में कई परमाणु ठिकानों और स्टील प्लांट्स पर बमबारी की। इसकी वजह रही कि ईरान ने फारस की खाड़ी में हमले जारी रखे हैं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की संघर्ष खत्म करने की मांगों को ठुकरा दिया है। ईरानी सरकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शुक्रवार को हुए हवाई हमलों में ईरान के अराक परमाणु परिसर के हैवी-वॉटर रिसर्च रिएक्टर और यज्द प्रांत में स्थित येलो केक प्रोडक्शन प्लांट को निशाना बनाया गया।
ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने कहा कि इन हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ और न ही किसी तरह के रेडियोएक्टिव प्रदूषण का खतरा है। अमेरिका और इजरायल के हमले में ईरान की दो सबसे बड़ी स्टील कंपनियों को भी निशाना बनाया गया।
ब्लूमबर्ग के मुताबिक, ईरान ने खाड़ी के पड़ोसी देशों पर कई ड्रोन और मिसाइलें दागीं, जिससे कुवैत के दो बंदरगाह क्षतिग्रस्त हो गए और दोहा में मिसाइल अलर्ट जारी किया गया। ईरान ने खाड़ी और इजरायल में स्थित स्टील प्लांट्स पर जवाबी कार्रवाई की चेतावनी दी है। सऊदी अरब के अधिकारियों ने राजधानी रियाद को निशाना बनाकर दागे गए कई ड्रोन और मिसाइलों को रोकने की सूचना दी। इजराइली रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने भी कहा कि नागरिकों को निशाना बनाए जाने के जवाब में देश की सेना ईरान पर अपना हमला तेज करेगी।
एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह ईरान के एनर्जी प्लांट्स पर हमले और 10 दिनों के लिए रोक रहे हैं। हमले सोमवार, 6 अप्रैल 2026 को रात 8 बजे (ईस्टर्न टाइम) तक नहीं किए जाएंगे। इससे पहले 23 मार्च को ट्रंप ने ईरान के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों को लेकर 5 दिन का विराम दिया था। यह शनिवार को खत्म होने वाला था।
कच्चे तेल की कीमत 111 डॉलर प्रति बैरल पर
इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष गहराने और महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग होर्मुज स्ट्रेट से रुकी आवाजाही के चलते शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 3% बढ़कर लगभग 111 डॉलर प्रति बैरल हो गई। तेल की कीमत इस साल अब तक 82% बढ़ चुकी है। इस संघर्ष के कारण प्रमुख और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में ईंधन की कमी और महंगाई बढ़ने के खतरे पैदा हो गए हैं। ईरान, ट्रंप प्रशासन का युद्धविराम को लेकर 15 सूत्रीय शर्तों वाला प्रस्ताव ठुकरा चुका है और अपनी 5 शर्तें रखी हैं। इनमें होर्मुज स्ट्रेट पर उसका एकाधिकार बरकरार रखना शामिल है।
इसके अलावा ईरान ने कुछ विशिष्ट गारंटियों की भी मांग की है। इनमें यह शर्त शामिल है कि भविष्य में अमेरिका और इजरायल दोबारा हमला नहीं करेंगे। साथ ही युद्ध की क्षतिपूर्ति यानि हर्जाने का भुगतान किया जाएगा। वहीं ट्रंप ने कहा है कि किसी भी शांति समझौते में ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने या नागरिक उद्देश्यों के लिए रेडियोएक्टिव मैटेरियल को समृद्ध बनाने से हमेशा के लिए प्रतिबंधित किया जाना चाहिए। अमेरिकी योजना में यह भी शर्त है कि ईरान के पास केवल आत्मरक्षा के लिए ही सीमित मिसाइल भंडार हो सकता है। इसके बदले में ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिलेगी।
दोनों पक्ष किसी भी समझौते पर पहुंचने से फिलहाल तो दूर दिख रहे हैं लेकिन ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ बातचीत बहुत अच्छी चल रही है। वहीं वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन मध्य पूर्व में 10,000 अतिरिक्त सैनिक भेजने पर विचार कर रहा है। ये नए सैनिक उन 5,000 मरीन और 1000 से अधिक पैराट्रूपर्स के अलावा होंगे, जिन्हें पहले ही इस क्षेत्र में तैनात करने का आदेश दिया जा चुका है।
लंबी नहीं चलेगी यह लड़ाई: मार्को रूबियो
शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने फ्रांस में 'ग्रुप ऑफ सेवेन' (G7) की बैठकों के बाद कहा कि ईरान के खिलाफ युद्ध कोई लंबा चलने वाला संघर्ष नहीं होगा। अमेरिका जमीनी सैनिकों का इस्तेमाल किए बिना भी अपने उद्देश्य हासिल कर सकता है। ईरान सरकार का मानना है कि इस बात की प्रबल संभावना है कि ट्रंप 'खर्ग द्वीप' पर कब्जा करने का प्रयास करेंगे। यह फारस की खाड़ी में स्थित वह स्थान है, जहां से ईरान अपने अधिकांश तेल का निर्यात करता है।इसके अलावा अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट के ईरानी हिस्से पर नियंत्रण करने का प्रयास कर सकता है, ताकि तेल और गैस टैंकरों, कंटेनर जहाजों के लिए इस जलमार्ग को फिर से खोला जा सके। इसके अलावा, वह ईरान के लगभग 440 किलोग्राम हाइली एनरिच्ड यूरेनियम को बरामद करने के लिए विशेष बल भी भेज सकता है।