US attack Indian ship: होर्मुज के पास कमर्शियल जहाज पर अमेरिकी हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत, चीफ इंजीनियर लापता

US attack on an Indian ship: ओमान तट के पास एक पोत पर हुए अमेरिकी हमले में भारतीय नाविक आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया की मृत्यु हो गई। जबकि पटनाला सुरेश अब भी लापता हैं। बुधवार को ओमान के तट के पास 24 भारतीय क्रू सदस्यों वाले एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ था

अपडेटेड Jun 11, 2026 पर 12:25 PM
US attack on an Indian ship: होर्मुज में कमर्शियल जहाज पर अमेरिकी हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है

US attack on an Indian ship: फॉरवर्ड सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने गुरुवार (11 जून) को बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास एक कमर्शियल जहाज पर हुए अमेरिकी हमले में दो भारतीय नाविकों की मौत हो गई है। जबकि एक चीफ इंजीनियर लापता है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए FSUI के जनरल सेक्रेटरी मनोज यादव ने कहा कि हमले के बाद जहाज से संपर्क बुरी तरह बाधित हो गया है। यादव ने आगे कहा कि तीनों नाविक भारत के अलग-अलग राज्यों से थे। उन्होंने कहा, "ये तीनों हिमाचल प्रदेश, देवरिया (उत्तर प्रदेश) और आंध्र प्रदेश से हैं।" भारत ने इस हमले पर कड़ा विरोध जताया है।

सीमेन्स यूनियन ऑफ इंडिया ने समुद्री कंपनियों के हवाले से इस जानकारी की पुष्टि करते हुए बताया कि ओमान तट के पास एक पोत पर हुए अमेरिकी हमले में भारतीय नाविक आदित्य शर्मा और शिवानंद चौरसिया की मृत्यु हो गई। जबकि पटनाला सुरेश अब भी लापता हैं। यादव ने आगे आरोप लगाया कि अमेरिकी नौसेना को उन जहाजों पर सवार लोगों की राष्ट्रीयता के बारे में पता था। उन्होंने कहा कि अगर उनके निर्देशों का पालन नहीं किया जाता, तो वे उन्हें हिरासत में ले सकते थे।

यादव ने कहा, "मैं बिल्कुल भी यह मानने को तैयार नहीं हूं कि अमेरिका के पास उन जहाजों पर सवार लोगों की राष्ट्रीयता के बारे में जानकारी नहीं थी। ऐसा होना मुमकिन ही नहीं है। मुझे 101% यकीन है कि अमेरिकी नौसेना को ठीक-ठीक पता था कि उन जहाजों पर कितने भारतीय और विदेशी नागरिक सवार थे। अगर जहाज उनके निर्देशों का पालन नहीं करते, तो उन्हें हिरासत में लेना एक सही विकल्प था।" बुधवार को ओमान के तट के पास 24 भारतीय क्रू सदस्यों वाले एक कमर्शियल जहाज पर हमला हुआ।


केंद्रीय मंत्री ने की पुष्टि

केंद्रीय बंदरगाह, जहाजरानी और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मौत की पुष्टि करते हुए X पर लिखा, "पलाऊ के झंडे वाले जहाज MT सेटेबेलो पर हुई दुखद घटना के बारे में जानकर बहुत अफ़सोस हुआ। दुख की बात है कि शुरू में लापता बताए गए तीन भारतीय नाविकों में से दो के शव मिलने के बाद उनकी मौत की पुष्टि हो गई है। मैंने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि बचाए गए क्रू सदस्यों को तुरंत वापस लाया जाए और मृतकों के शवों को भी जल्द से जल्द वापस लाया जाए ताकि उनका अंतिम संस्कार किया जा सके।"

भारत ने जताया विरोध

भारत ने ईरान संघर्ष के बीच कमर्शियल जहाजों पर हमलों का कड़ा विरोध करते हुए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में कहा कि क्षेत्र में हुए हमलों के कारण उसके कई नागरिकों की मौत हो गई है या वे लापता हैं। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने बुधवार को कहा, "हमने ईरान और खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष पर गहरी चिंता व्यक्त की है, जिसकी शुरुआत दुर्भाग्यवश रमजान के पवित्र महीने में हुई। हमने सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ाने वाले कदमों से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने का आग्रह किया है।"

उन्होंने कहा, "क्षेत्र के देशों, वाणिज्यिक जहाजों और समुद्री संपर्क मार्गों पर हुए हमलों के कारण कई भारतीय नागरिकों की जान गई है या वे लापता हैं।" सुरक्षा परिषद में पर्वतनेनी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब भारत ने नई दिल्ली में अमेरिका के प्रभारी राजनयिक जेसन मीक्स को तलब करके ओमान तट के पास 24 भारतीय कर्मियों वाले वाणिज्यिक टैंकर ‘सेटेबेलो’ पर अमेरिकी हमले पर कड़ा विरोध दर्ज कराया।

हमले के बाद जहाज पर सवार चालक दल के 24 सदस्यों में से तीन लापता हो गए थे। वाणिज्यिक पोत ‘सेटेबेलो’ पर यह हमला तब हुआ, जब इसके दो दिन पहले ही पलाओ के झंडे वाले एक जहाज पर अमेरिकी नौसेना ने हमला किया था। उस जहाज पर 24 भारतीय सवार थे। जहाज ईरानी बंदरगाहों की अमेरिकी नाकेबंदी से बचने की कोशिश कर रहा था।

पर्वतनेनी ने कहा कि खाड़ी क्षेत्र में लगभग एक करोड़ भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं तथा उनकी सुरक्षा और कुशलक्षेम भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि ईरान संघर्ष के तेज होने और इसके अन्य देशों तक फैलने से व्यापक चिंता उत्पन्न हुई है।

शांतिपूर्ण समाधान की अपील

भारत ने एक बार फिर संवाद और कूटनीति की अपील करते हुए नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता में बाधा नहीं डालने, कमर्शियल जहाजों को सैन्य निशाना नहीं बनाने, नागरिक आबादी और बुनियादी ढांचे पर हमले नहीं करने तथा संघर्ष को शीघ्र समाप्त करने की अपील की।

नई दिल्ली ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए किए जा रहे सभी प्रयासों का समर्थन भी जताया। भारत ने पश्चिम एशिया में जारी संघर्षों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इससे जान-माल की भारी हानि, बड़ी संख्या में नागरिकों का विस्थापन, नौवहन की स्वतंत्रता में बाधा, वैश्विक व्यापार प्रवाह पर असर तथा स्थापित आपूर्ति शृंखलाओं और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में बड़े पैमाने पर व्यवधान उत्पन्न हुए हैं।

उन्होंने परिषद को बताया कि भारत अगले कुछ दिनों में यूनाइटेड नेशंस रिलीफ एंड वर्क्स एजेंसी फॉर फलस्तीन रिफ्यूजीस इन द नीयर ईस्ट (यूएनआरडब्ल्यूए) को 25 लाख अमेरिकी डॉलर की सहायता देगा। यह एजेंसी को भारत के वार्षिक 50 लाख डॉलर के योगदान की पहली किश्त होगी। लेबनान संकट के बीच भारत ने उसकी क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का सम्मान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

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भारत ने लेबनान में तैनात संयुक्त राष्ट्र शांति सैनिकों पर हुए हमलों की निंदा करते हुए दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने के लिए तत्काल और व्यापक जांच की मांग की। भारत ने यह भी कहा कि मध्यस्थता संबंधी ढांचे एक बार स्थापित हो जाने के बाद हमेशा प्रभावी नहीं बने रहते। भारत ने सुरक्षा परिषद से कहा कि दुनिया के विभिन्न हिस्सों में जारी संघर्ष और उससे पैदा हो रही अपार मानवीय पीड़ा के कारण संयुक्त राष्ट्र की वैधता, विश्वसनीयता और प्रभावशीलता पर सवाल उठ रहे हैं।

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