अमेरिका ने भारत सहित 60 अर्थव्यवस्थाओं में जांच शुरू की है। इसके पीछे मकसद यह पता लगाना है कि सरकारों ने जबरन मजदूरी (Forced Labour) से बने सामानों के आयात पर रोक लगाने के लिए क्या कदम उठाए हैं। यूनाइटेड स्टेट्स ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) के ऑफिस के अनुसार, यह जांच 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301(b) के तहत की जाएगी। यह वही कानून है, जिसका इस्तेमाल अमेरिका यह जांचने के लिए करता है कि क्या विदेशी सरकारों की नीतियां या तौर-तरीके अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं या उसे सीमित करते हैं।
इस कदम की घोषणा करते हुए, अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जेमिसन ग्रीर ने कहा कि यह जांच इस बात का मूल्यांकन करेगी कि क्या सरकारों ने ऐसे उपाय लागू किए हैं, जो जबरन काम करवाकर बनाए गए सामानों को उनके बाजारों में प्रवेश करने से रोकते हैं। ग्रीर ने कहा, "जबरन मजदूरी के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय सहमति के बावजूद, सरकारें जबरन मजदूरी से बने सामानों को अपने बाजारों में प्रवेश करने से रोकने वाले उपायों को लागू करने और उन्हें प्रभावी ढंग से लागू करने में विफल रही हैं।"
इस निर्देश में जिन देशों के नाम शामिल हैं, उनमें भारत भी एक है। जांच में शामिल अन्य अर्थव्यवस्थाएं एशिया, यूरोप, अमेरिका और मध्य पूर्व तक फैली हुई हैं। जांच के दायरे में आने वाली अर्थव्यवस्थाओं की पूरी लिस्ट इस तरह है...
दो दिनों में दूसरी जांच की घोषणा
एक दिन पहले ग्रीर ने धारा 301 के तहत एक और जांच की घोषणा की थी। इस जांच में भारत सहित 16 अर्थव्यवस्थाओं को टारगेट किया गया है। जांच यह निर्धारित करने के लिए है कि क्या इन अर्थव्यवस्थाओं के मैन्युफैक्चरिंग के तरीके, विशेष रूप से संरचनात्मक रूप से अतिरिक्त मैन्युफैक्चरिंग कैपेसिटी, अमेरिकी व्यापार पर बोझ डालते हैं या उसे सीमित करते हैं।
वह जांच भी 1974 के ट्रेड एक्ट के तहत ही की जा रही है। व्यापार अधिनियम की धारा 301 अमेरिका को विदेशी सरकारों की नीतियों की जांच करने और यह तय करने की इजाजत देती है कि क्या वे नीतियां अनुचित या भेदभावपूर्ण हैं, या क्या वे अमेरिकी व्यापार को बाधित करती हैं। ऐसी जांचों में सरकारों और हितधारकों के साथ परामर्श शामिल हो सकता है। अगर USTR को किसी उल्लंघन का पता चलता है, तो इसके परिणामस्वरूप व्यापारिक कार्रवाई भी की जा सकती है।