US Iran Deal: अगर इन 5 बातों पर बन जाए सहमति, तो ईरान अमेरिका की डील पक्की!

US Iran Peace Deal: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयानों और ईरान से मिल रहे संकेतों के बावजूद, अभी भी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश इस प्रस्तावित डील को अपने-अपने तरीके से अलग-अलग बता रहे हैं। 'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (NYT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारी इस बात पर एकमत नहीं हैं कि असल में किन बातों पर सहमति बनी है

अपडेटेड May 25, 2026 पर 3:50 PM
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US Iran Deal: अगर इन 5 बातों पर बन जाए सहमति, तो ईरान अमेरिका की डील पक्की!

अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों की कड़वाहट के बाद अब एक समझौते की उम्मीद जगती दिख रही है। अगर यह समझौता होता है, तो मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में चल रहा युद्ध थम सकता है और समुद्री व्यापार के सबसे महत्वपूर्ण रास्ते 'हॉर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) में जारी तनाव भी कम हो सकता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सकारात्मक बयानों और ईरान से मिल रहे संकेतों के बावजूद, अभी भी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं। सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों देश इस प्रस्तावित डील को अपने-अपने तरीके से अलग-अलग बता रहे हैं।

'द न्यूयॉर्क टाइम्स' (NYT) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के अधिकारी इस बात पर एकमत नहीं हैं कि असल में किन बातों पर सहमति बनी है। मुख्य विवाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम, हॉर्मुज जलमार्ग और पाबंदियों को हटाने को लेकर है।


इस पूरी बातचीत के केंद्र में 5 सबसे बड़े और संवेदनशील मुद्दे हैं, जो तय करेंगे कि यह बातचीत किसी स्थायी समाधान तक पहुंचेगी या फिर दोनों देश दोबारा आमने-सामने होंगे:

1. ईरान का परमाणु कार्यक्रम

यह इस समझौते का सबसे बड़ा रोड़ा है। अमेरिका चाहता है कि ईरान अपने पास मौजूद भारी मात्रा में संवर्धित यूरेनियम (Enriched Uranium) को सरेंडर कर दे, जिसका इस्तेमाल परमाणु बम बनाने में हो सकता है।

अमेरिका का दावा: अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देशों में शुरुआती सहमति बनी है कि ईरान इस यूरेनियम को हटाएगा, हालांकि तरीका अभी तय नहीं है।

ईरान का पलटवार: ईरान के अधिकारियों ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि अभी यूरेनियम हटाने पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अगले 30 से 60 दिनों में इस पर आगे बात होगी।

2. हॉर्मुज जलमार्ग पर नियंत्रण

यह दुनिया का वो समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का लगभग 20% तेल और गैस गुजरता है। युद्ध शुरू होने के बाद ईरान ने यहां जहाजों पर हमले किए, तो जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी (Blockade) कर दी।

ईरान की शर्त: ईरान का कहना है कि अगर अमेरिका अपनी नाकेबंदी हटा ले, तो वह जहाजों को बिना किसी टैक्स के अस्थायी रूप से गुजरने देगा।

ट्रंप का रुख: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ कर दिया है कि जब तक फाइनल समझौता नहीं हो जाता, तब तक अमेरिकी सेना की नाकेबंदी पूरी तरह लागू रहेगी।

3. ईरान के फ्रीज किए गए पैसे

ईरान चाहता है कि प्रतिबंधों के कारण दुनिया भर के बैंकों में फंसे उसके अरबों डॉलर उसे वापस मिलें। ईरान का दावा है कि इस समझौते से उसके करीब 25 अरब डॉलर (लगभग 2 लाख करोड़ रुपये) अनलॉक हो जाएंगे।

अमेरिका की हिचकिचाहट: अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने अभी तक पैसे जारी करने की कोई मंजूरी नहीं दी है। ट्रंप के लिए यह राजनीतिक रूप से भी संवेदनशील है, क्योंकि वे पहले भी ईरान को पैसे दिए जाने का विरोध करते रहे हैं।

4. ईरान समर्थित संगठन (जैसे हिजबुल्लाह)

ईरान का कहना है कि इस समझौते के बाद लेबनान सहित सभी मोर्चों पर लड़ाई रुक जाएगी, यानी वह अपने सहयोगी संगठनों को शांत रखेगा। लेकिन अमेरिका ने इस पर खुलकर कुछ नहीं कहा है। वहीं, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ किया है कि ट्रंप ने इजरायल को अपनी रक्षा के लिए हमले जारी रखने की छूट दी है।

5. ईरान की मिसाइलें

इजरायल की सबसे बड़ी चिंता ईरान की बैलिस्टिक मिसाइलें हैं। शुरुआत में ट्रंप प्रशासन ने इस पर रोक लगाने की मांग की थी, लेकिन अब आ रही खबरों के मुताबिक, मौजूदा समझौते के ड्राफ्ट से मिसाइल का मुद्दा गायब है। इससे इजरायल और खाड़ी के अन्य देश नाराज हो सकते हैं।

विशेषज्ञों का क्या कहना है?

जानकारों का मानना है कि भले ही तात्कालिक रूप से युद्ध रुक जाए और समुद्री रास्ता खुल जाए, लेकिन जब तक मिसाइल और परमाणु कार्यक्रम जैसे मुख्य मुद्दों पर पक्का फैसला नहीं होता, तब तक इलाके में दोबारा युद्ध भड़कने का खतरा बना रहेगा।

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