US-ईरान का MoU साइन होने से पहले लीक! लेकिन होर्मूज स्ट्रेट पर नहीं बनी बात? ये 14 प्वाइंट हुए फाइनल

US Iran MoU: व्हाइट हाउस और ईरानी मीडिया दोनों ही इस लीक हुए ड्राफ्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मान रहे हैं, लेकिन G7 समिट में मौजूद राजनयिकों ने इसकी मुख्य बातों की पुष्टि की है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ पहले ही इस पर डिजिटल साइन कर चुके हैं

अपडेटेड Jun 17, 2026 पर 6:49 PM
US-ईरान की डील में होर्मूज स्ट्रेट पर नहीं बनी बात? लीक हो गया सीक्रेट MoU का ड्राफ्ट! 14 प्वाइंट हुए फाइनल (PHOTO-AI)

अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में एक ऐतिहासिक समझौते (MoU) पर दस्तखत होने वाले हैं। दोनों देशों ने भले ही इस डील की शर्तों को बेहद गुप्त रखा था, लेकिन अमेरिकी न्यूज चैनल सीएनएन (CNN) के हाथ इस समझौते का '14-पॉइंट वाला सीक्रेट ड्राफ्ट' लग गया है। चौंकाने वाली बात ये है कि इस MoU में दुनिया के सबसे अहम तेल रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मूज के भविष्य को लेकर कुछ भी तय नहीं हुआ है।

हालांकि, व्हाइट हाउस और ईरानी मीडिया दोनों ही इस लीक हुए ड्राफ्ट को पूरी तरह सटीक नहीं मान रहे हैं, लेकिन G7 समिट में मौजूद राजनयिकों ने इसकी मुख्य बातों की पुष्टि की है। इस ड्राफ्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ पहले ही इस पर डिजिटल साइन कर चुके हैं।

आइए बेहद आसान भाषा में समझते हैं कि दुनिया के इन दो कट्टर दुश्मनों के बीच हुए इस गुप्त समझौते के उन 14 पॉइंट्स में क्या लिखा है:

  1. हर मोर्चे पर तुरंत जंग का खात्मा: दोनों देश और उनके साथी (जैसे लेबनान) तुरंत युद्ध रोकने का ऐलान करते हैं। अब से कोई भी एक-दूसरे पर हमला नहीं करेगा या धमकी नहीं देगा।
  2. एक-दूसरे का सम्मान: अमेरिका और ईरान एक-दूसरे की सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे और एक-दूसरे के अंदरूनी मामलों में टांग नहीं अड़ाएंगे।
  3. 60 दिनों की समय-सीमा: दोनों देश इस शुरुआती समझौते के बाद अगले 60 दिनों के भीतर एक 'फाइनल एग्रीमेंट' तैयार करेंगे। आपसी सहमति से यह समय बढ़ाया भी जा सकता है।
  4. समुद्री नाकाबंदी खत्म और अमेरिकी सेना की वापसी: अमेरिका 30 दिनों के भीतर ईरान की समुद्री नाकाबंदी हटा देगा, ताकि पहले की तरह जहाजों की आवाजाही हो सके। फाइनल एग्रीमेंट के 30 दिनों के भीतर अमेरिका इलाके से अपनी सेनाएं भी हटा लेगा।
  5. समुद्री रास्तों से हटेंगे बारूदी माइंस: ईरान 30 दिनों के भीतर फारस की खाड़ी (Persian Gulf) से ओमान की खाड़ी तक मर्चेंट जहाजों का रास्ता साफ करेगा। इसके लिए ईरान समुद्र में बिछाई गई बारूदी सुरंगों को हटाएगा।
  6. ईरान के लिए $300 बिलियन का फंड: अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा खड़ा करने के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (करीब 25 लाख करोड़ रुपये) के फंड का इंतजाम करेगा।
  7. सभी पाबंदियों से आजादी: फाइनल एग्रीमेंट के तहत अमेरिका ईरान पर लगे अपने सभी तरह के प्रतिबंधों को हटाएगा। साथ ही संयुक्त राष्ट्र (UN) और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की पाबंदियां भी खत्म की जाएंगी।
  8. परमाणु हथियार कभी नहीं बनाएगा ईरान: ईरान ने एक बार फिर दोहराया है कि वह कभी भी न्यूक्लियर हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि, ईरान के पास पहले से मौजूद यूरेनियम का क्या होगा, यह फाइनल एग्रीमेंट में तय किया जाएगा।
  9. बातचीत तक 'जैसे थे' की स्थिति: जब तक फाइनल डील नहीं हो जाती, तब तक दोनों देश 'जैसे हैं वैसे ही रहेंगे'। यानी ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका कोई नया प्रतिबंध नहीं लगाएगा।
  10. ईरान को तेल बेचने की खुली छूट: जब तक पाबंदियां पूरी तरह नहीं हट जातीं, तब तक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरान को कच्चे तेल और पेट्रोकेमिकल प्रोडक्ट्स बेचने के लिए विशेष छूट (Waivers) देगा। बैंकिंग, इंश्योरेंस और ट्रांसपोर्ट की सुविधाएं भी मिलेंगी।
  11. ईरान का जब्त पैसा वापस मिलेगा: जैसे-जैसे बातचीत आगे बढ़ेगी, अमेरिका ईरान के जब्त किए गए पैसे और संपत्तियों को पूरी तरह आजाद कर देगा। ईरान का सेंट्रल बैंक इस पैसे का इस्तेमाल कर सकेगा।
  12. निगरानी के लिए बनेगी कमेटी: डील ठीक से लागू हो रही है या नहीं और दोनों देश अपनी बात पर टिके हैं या नहीं, इसकी निगरानी के लिए एक तालमेल तंत्र बनाया जाएगा।
  13. बची हुई शर्तों पर आगे बात: समुद्री रास्ते खोलने, तेल बेचने की छूट मिलने और पैसे जारी होने के बाद, दोनों देश बची हुई शर्तों को सुलझाने के लिए फाइनल बातचीत के दौर में कदम रखेंगे।
  14. संयुक्त राष्ट्र (UN) की पक्की मुहर: जब दोनों देशों के बीच फाइनल एग्रीमेंट बन जाएगा, तो उसे कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में एक प्रस्ताव पास कराकर मंजूर किया जाएगा।


अधिकारियों का क्या कहना है?

अमेरिकी अधिकारियों ने CNN को बताया कि यह सिर्फ एक "राजनीतिक दस्तावेज" है। असली और महत्वपूर्ण वादे, खासकर ईरान के परमाणु कार्यक्रम के भविष्य को लेकर पर्दे के पीछे की गुप्त बातचीत (Back-Channel) में हुए हैं, जिनका जिक्र इस ड्राफ्ट में नहीं है। अब पूरी दुनिया की नजरें शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में होने वाले आधिकारिक हस्ताक्षरों पर टिकी हैं।

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