US-Iran Talks: सीजफायर की आड़ में ईरान को नए हथियार देगा चीन! US इंटेलिजेंसी एजेंसियों को मिला बड़ा सुराग
US Iran War: चीन जो सिस्टम ईरान को देने वाला है, वे MANPADs कहलाते हैं। ये कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले छोटे एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम हैं। ये कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी विमानों के लिए बड़ा खतरा हैं। पिछले 5 हफ्तों के युद्ध में भी इन्होंने अमेरिका को काफी नुकसान पहुंचाया था
US-Iran Talks: सीजफायर की आड़ में ईरान को नए हथियार देगा चीन! US इंटेलिजेंसी एजेंसियों को मिला बड़ा सुराग
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को पता चला है कि चीन अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नई एयर डिफेंस सिस्टम देने की तैयारी कर रहा है। यह जानकारी तीन ऐसे लोगों ने दी है, जो हालिया खुफिया रिपोर्ट्स से वाकिफ हैं। ये कदम काफी भड़कऊ माना जा रहा है, क्योंकि चीन ने खुद दावा किया था कि उसने अमेरिका और ईरान के बीच हुए कमजोर सीजफायर को बनाने में मदद की थी।
इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन का दौरा करने वाले हैं और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करेंगे। खुफिया जानकारी यह भी बताती है कि ईरान सीजफायर का फायदा उठाकर अपने हथियारों की कमी पूरी करने की कोशिश कर रहा है। इसमें उसके विदेशी दोस्त मदद कर रहे हैं।
हथियारों का असली सोर्स छिपाएगा चीन
CNN ने दो सूत्रों के हवाले से बताया कि चीन इन हथियारों को सीधे ईरान नहीं भेज रहा, बल्कि तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना रहा है, ताकि असली सोर्स छिपा रहे।
चीन जो सिस्टम ईरान को देने वाला है, वे MANPADs कहलाते हैं। ये कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले छोटे एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम हैं। ये कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी विमानों के लिए बड़ा खतरा हैं। पिछले 5 हफ्तों के युद्ध में भी इन्होंने अमेरिका को काफी नुकसान पहुंचाया था। अगर सीजफायर टूट गया तो फिर से ये खतरा बन सकते हैं।
चीन के वॉशिंगटन दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, “चीन ने इस संघर्ष में किसी भी पक्ष को हथियार नहीं दिए हैं। यह खबर पूरी तरह गलत है। चीन एक जिम्मेदार बड़ा देश है और अंतरराष्ट्रीय नियमों का पालन करता है। हम अमेरिका से अपील करते हैं कि बेबुनियाद आरोप लगाना, मनगढ़ंत कनेक्शन जोड़ना और सनसनी फैलाना बंद करे। हम चाहते हैं कि सभी पक्ष तनाव कम करने में मदद करें।”
इससे पहले भी चीनी दूतावास ने CNN को बताया था कि युद्ध शुरू होने के बाद से चीन सीजफायर कराने और लड़ाई खत्म कराने की कोशिश कर रहा था।
ट्रंप ने सोमवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पिछले हफ्ते ईरान के ऊपर गिराया गया F-15 लड़ाकू विमान एक “कंधे पर रखकर चलाए जाने वाले हीट-सीकिंग मिसाइल” से मारा गया था। ईरान ने भी कहा था कि उसने “नई” एयर डिफेंस सिस्टम का इस्तेमाल किया, लेकिन डिटेल नहीं दी। यह साफ नहीं है कि वो सिस्टम चीनी बना था या नहीं।
चाइनीज कंपनियों ने ईरान को बेची टेक्नोलॉजी
ईरान को MANPADs भेजना चीन की तरफ से ईरान को समर्थन देने में एक नया और बड़ा कदम होगा। फरवरी में युद्ध शुरू होने के बाद से चीन की कंपनियां ईरान को कुछ प्रतिबंधित टेक्नोलॉजी बेचती रही हैं, जिससे ईरान हथियार बना और सुधार सकता है। लेकिन चीन सरकार की ओर से सीधे हथियार भेजना एक नया स्तर होगा।
ट्रंप अगले महीने बीजिंग में शी जिनपिंग से मिलने वाले हैं। व्हाइट हाउस ने बुधवार को कहा कि ईरान सीजफायर की बातचीत के दौरान अमेरिका और चीन के बीच उच्च स्तरीय बातें भी हुई थीं।
एक सूत्र ने बताया कि चीन जानता है कि अमेरिका और इजरायल के खिलाफ खुलकर ईरान की तरफ लड़ना उसके लिए फायदेमंद नहीं है और वो लड़ाई जीतना नामुमकिन है। इसलिए चीन ईरान का “दोस्त” बना रहना चाहता है, क्योंकि उसे ईरान का बहुत तेल चाहिए, लेकिन बाहर से तटस्थ दिखना चाहता है ताकि बाद में इनकार कर सके।
सूत्रों के मुताबिक, चीन यह भी तर्क दे सकता है कि एयर डिफेंस सिस्टम “रक्षा करने के लिए” हैं, आक्रामक नहीं। इससे वो रूस से अलग दिखना चाहेगा। रूस ने पूरे युद्ध में ईरान को खुफिया जानकारी देकर मदद की थी, जिससे ईरान अमेरिकी सैनिकों और ठिकानों पर हमला कर सका।
ईरान का चीन और रूस दोनों के साथ पुराना सैन्य और आर्थिक रिश्ता है। ईरान ने रूस को यूक्रेन युद्ध में शाहेद ड्रोन दिए हैं और चीन को अपने प्रतिबंधित तेल का बड़ा हिस्सा बेचता है।