स्विट्जरलैंड में आज आमने-सामने बैठेंगे अमेरिका और ईरान, $6 अरब के फंड और परमाणु डील पर आर-पार
US Iran Talks Switzerland: यह ऐतिहासिक बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच जंग और कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की धमकी ने भारी तनाव पैदा कर दिया है। शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर भी इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं
कतर के साथ मिलकर पाकिस्तान इस बेहद जटिल कूटनीतिक गांठ को सुलझाने में जुटा है
US-Iran Talks Switzerland: अमेरिका और ईरान के बीच आज यानी रविवार से स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक में बेहद हाई-प्रोफाइल बातचीत का पहला दौर शुरू होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान के बीच हुए 60 दिनों के अंतरिम सीजफायर समझौते के बाद यह पहली बड़ी आमने-सामने की बैठक है।
हालांकि, यह ऐतिहासिक बातचीत ऐसे समय में हो रही है जब इजरायल-हिजबुल्लाह के बीच जंग और कूटनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की ईरान की धमकी ने भारी तनाव पैदा कर दिया है।
जेडी वेंस पहुंचे स्विट्जरलैंड, पाकिस्तान बना 'महा-मध्यस्थ'
इस हाई-स्टेक्स मीटिंग में भाग लेने के लिए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस स्विट्जरलैंड पहुंच चुके हैं। उन्होंने रवाना होने से पहले कहा कि चर्चा का मुख्य फोकस ईरान का परमाणु कार्यक्रम और लेबनान में सीजफायर का मुद्दा होगा।
इस वार्ता की सबसे दिलचस्प बात यह है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर भी मुख्य मध्यस्थ के तौर पर इस बैठक में हिस्सा ले रहे हैं। कतर के साथ मिलकर पाकिस्तान इस बेहद जटिल कूटनीतिक गांठ को सुलझाने में जुटा है।
ईरान की तरफ से इस बैठक में संसद अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालिबफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और सेंट्रल बैंक के गवर्नर अब्दोलनासर हेम्मती शामिल हो रहे हैं।
होर्मुज जलडमरूमध्य का नया संकट
बातचीत शुरू होने से ठीक पहले ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने शनिवार को होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने का ऐलान कर दिया। ईरान का आरोप है कि इजरायल लगातार लेबनान पर हमले कर के इस शांति समझौते की भावना का उल्लंघन कर रहा है, और अमेरिका उसे रोक नहीं रहा।
क्या थम गया है तेल का व्यापार?
ईरान की इस आक्रामक बयानबाजी के बावजूद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ किया है कि इस समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है। शनिवार को भी करीब 55 कमर्शियल जहाज 1.7 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चा तेल लेकर इस रूट से सुरक्षित गुजरे हैं। पूर्व अमेरिकी राजदूत डैनियल शापिरो के मुताबिक, ईरान की यह धमकी बातचीत की टेबल पर दबाव बनाने की सिर्फ एक कूटनीतिक रणनीति है।
नेतन्याहू पर अमेरिकी खुफिया एजेंसी की चेतावनी
लेबनान में जारी हिंसा इस शांति वार्ता के आड़े आ रही है। ईरान का कहना है कि लेबनान में इजरायल की हर सैन्य कार्रवाई के लिए सीधे तौर पर अमेरिका जिम्मेदार है। दूसरी तरफ, इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू अड़े हुए हैं कि जब तक हिज्बुल्लाह का खतरा खत्म नहीं होता, उनकी सेना दक्षिणी लेबनान में डटी रहेगी।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने एक आंतरिक आकलन में चेतावनी दी है कि पीएम नेतन्याहू पर अपनी घरेलू राजनीति के चलते हिजबुल्लाह के खिलाफ ऑपरेशन जारी रखने का भारी दबाव है, जो इस शांति प्रक्रिया को पटरी से उतार सकता है।
पहले दौर की बैठक में क्या है एजेंडा?
'एक्सियोस' की रिपोर्ट के मुताबिक, इस पहले दौर की बातचीत में अमेरिका और ईरान के बीच 'गिव एंड टेक' का एक बड़ा फॉर्मूला तैयार हो सकता है:
अमेरिका की मांग: वाशिंगटन चाहता है कि ईरान अपने उन परमाणु ठिकानों पर संयुक्त राष्ट्र (UN) के निरीक्षकों को जाने की इजाजत दे, जिन पर पहले इजरायल और अमेरिका ने हमले किए थे।
ईरान को क्या मिलेगा: अगर ईरान यूएन के इंस्पेक्टर्स को आने की मंजूरी देता है, तो अमेरिका कतर के बैंक खातों में फ्रीज (जब्त) पड़े ईरान के 6 अरब डॉलर को रिलीज करने की हरी झंडी दे सकता है।
तमाम विवादों और सुर्खियों के बीच अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने उम्मीद जताई है कि जमीनी स्तर पर हालात धीरे-धीरे सुधर रहे हैं और इस बैठक से परमाणु मुद्दे पर कोई ठोस रास्ता जरूर निकलेगा।