US Iran War: सस्ती तकनीक और थोड़ी सी फिजिक्स... क्या ईरान के हाथ लग गया F-35 का तोड़? 'गायब' होने की ताकत ही बनी सबसे बड़ी दुश्मन!

US F-34 Down: पेंटागन ने अभी पायलट के गायब होने या पकड़े जाने की पुष्टि नहीं की है। यह घटना 19 मार्च को हुए एक और F-35 के “इमरजेंसी लैंडिंग” के बाद हुई है, जो ईरानी हमले से क्षतिग्रस्त हो गया था। इन लगातार घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या स्टेल्थ यानी अदृश्य होने की तकनीक का दौर अब अचानक और हिंसक तरीके से खत्म हो रहा है

अपडेटेड Apr 03, 2026 पर 9:06 PM
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US Iran War: क्या ईरान के हाथ लग गया F-35 का कोड? 'स्टेल्थ' ताकत ही बनी उसकी सबसे बड़ी दुश्मन!

ईरानी मीडिया एजेंसी तस्नीम ने शुक्रवार को जो दावा किया है, उससे पश्चिमी देशों की सेनाओं में खलबली मच गई है। रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका का एक F-35 लाइटनिंग II फाइटर जेट ईरान के पश्चिमी हिस्से में IRGC की एयरोस्पेस फोर्स ने मार गिराया और उसका पायलट अभी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) की हिरासत में है। हालांकि, ईरान के सरकारी टीवी पर पायलट को पकड़ने वालों को इनाम देने के ऐलान किया गया है।

पेंटागन ने अभी पायलट के गायब होने या पकड़े जाने की पुष्टि नहीं की है। यह घटना 19 मार्च को हुए एक और F-35 के “इमरजेंसी लैंडिंग” के बाद हुई है, जो ईरानी हमले से क्षतिग्रस्त हो गया था। इन लगातार घटनाओं ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- क्या स्टेल्थ यानी अदृश्य होने की तकनीक का दौर अब अचानक और हिंसक तरीके से खत्म हो रहा है?

क्या स्टेल्थ तकनीक अब ‘मर चुकी’ है?


दुनिया का सबसे एडवांस्ड और महंगा स्टेल्थ फाइटर F-35 का काथित तौर पर मार गिराया जाना यह बताता है कि “कम दिखाई देने या गायब होने वाली” तकनीक अब पहले जितनी अजेय नहीं रही। स्टेल्थ तकनीक, प्लेन के रडार क्रॉस-सेक्शन (RCS) को बहुत कम कर देती है, जिससे हाई-फ्रीक्वेंसी रडार उसे आसानी से “लॉक” नहीं कर पाते। लेकिन फिजिक्स के नियम कहते हैं कि प्लेन रडार से छिप सकता है, लेकिन अपनी गर्मी से नहीं छिप सकता।

सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान स्टेल्थ की रणनीति में मौजूद “ब्लाइंड स्पॉट” का फायदा उठा रहा है। पारंपरिक एक्टिव रडार (जो सिग्नल भेजता है और अपनी जगह बता देता है) की बजाय ईरान अब पैसिव ट्रैकिंग की तरफ जा रहा है। इससे F-35 की अपनी स्टेल्थ तकनीक ही उसके खिलाफ हो रही है।

अगर किसी लड़ाकू विमान को उसके हीट सिग्नेचर यानी गर्मी से या “मल्टीस्टैटिक रडार” जैसी तकनीक से ट्रैक किया जा सकता है- जो मोबाइल टावर जैसे आसपास के सिग्नल का इस्तेमाल करती है- तो फिर रडार से बचने के लिए जो महंगी कोटिंग (स्टेल्थ तकनीक) लगाई जाती है, उसका फायदा अब पहले जैसा नहीं रह गया है।

ईरान ने किस ‘अज्ञात देसी सिस्टम’ का इस्तेमाल किया?

IRGC ने 3 अप्रैल की इस घटना में इस्तेमाल किए गए हथियार के बारे में कुछ खास नहीं बताया है। उन्होंने सिर्फ “अज्ञात, देसी एयर डिफेंस सिस्टम” कहा है। लेकिन खुफिया जानकारी के अनुसार, यह संभवतः Bavar-373 या Khordad-15 का बेहतर वर्जन है, जिसमें पैसिव कोहेरेंट लोकेशन (PCL) और इंफ्रारेड सर्च एंड ट्रैक (IRST) सेंसर्स लगे हैं।

पारंपरिक सिस्टम के उलट यह “अदृश्य रडार” कुछ भी नहीं छोड़ता। यह चुपचाप प्लेन के इंजन से निकलने वाली गर्मी और हवा में होने वाले बदलाव को सुनता है। यही वजह है कि पहले के मामलों में F-35 के पायलट को पता भी नहीं चला कि उन्हें टारगेट किया जा रहा है, क्योंकि उनका रडार वार्निंग रिसीवर (RWR) पूरी तरह चुप रहा, कोई रडार तरंगें प्लेन पर नहीं पड़ीं। जब तक हीट-सीकिंग मिसाइल दागी जाती है, तब तक स्टेल्थ का फायदा खत्म हो चुका होता है।

क्या एक गैर-परमाणु देश F-35 की तकनीक तोड़ सकता है?

$77 मिलियन का अमेरिकी जेट को ईरान जैसा देश गिरा सकता है- यह बात असंभव लगती है, लेकिन इतिहास में ऐसा होता रहा है। 1999 में एक सर्बियाई कमांडर ने 1960 के दशक के पुराने सोवियत रडार को थोड़ा बदलकर अमेरिका के F-117 नाइटहॉक को मार गिराया था। उसने ठीक उसी पल को पकड़ा जब प्लेन अपना बम दरवाजा खोल रहा था और उसका रडार सिग्नेचर पल भर के लिए बढ़ गया था।

2026 में ईरान 21वीं सदी की AI-बेस्ड सिग्नल प्रोसेसिंग का इस्तेमाल करके कुछ ऐसा ही कर रहा है। अपने 31 प्रांतों में सस्ते पैसिव सेंसर्स को नेटवर्क करके ईरान ने एक “मेश” बना लिया है, जो रेडियो और मोबाइल सिग्नल के बीच स्टेल्थ प्लेन से छोड़े गए छोटे “खाली स्थान” को पहचान लेता है। इसके लिए परमाणु बजट की जरूरत नहीं है- बस गर्मी को “महसूस और देख” सकने वाले पर्याप्त सेंसर्स चाहिए।

ईरान युद्ध के लिए इसका क्या मतलब है?

अगर तस्नीम का दावा सही साबित होता है कि पायलट IRGC की हिरासत में है, तो यह पहला मौका होगा जब अमेरिका का कोई 5th जेनरेशन का फाइटर पायलट युद्ध में पकड़ा गया हो। इससे ईरान को मस्कट में चल रही 15-पॉइंट (अमेरिका) और 5-पॉइंट (ईरान) शांति वार्ता में बहुत बड़ा दबदबा मिल जाएगा।

अमेरिका के लिए F-35 और उसके पायलट का नुकसान एक बड़ी रणनीतिक हार है। इससे उन्हें “स्टैंड-ऑफ” युद्ध की तरफ जाना पड़ सकता है- यानी सैकड़ों किलोमीटर दूर से मिसाइलें दागना, बजाय इसके कि “महंगे और एडवांस” जेट्स को खतरनाक इलाके में भेजा जाए।

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