अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को घुटनों पर लाने के लिए इसकी नेवल नाकेबंदी का ऐलान कर दिया है। डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से होर्मुज स्ट्रेट में समुद्री नाकाबंदी शुरू हो गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर ईरान को धमकी दी। उन्होंने कहा कि ईरान की नौसेना समुद्र की सतह में पड़ी है, पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। हमने उनके एक दो नहीं, 158 जहाजों को निशाना बनाया है। ट्रंप ने चेतावनी दी कि अगर कोई भी ईरानी जहाज अमेरिकी नाकाबंदी के पास आता है, तो उसे तुरंत खत्म कर दिया जाएगा। इसके लिए वही तरीका इस्तेमाल होगा, जिससे समुद्र में ड्रग तस्करों के जहाज रोके जाते हैं, यानी तेजी और सख्ती से।
धमकी के बीच अकेले पड़े ट्रंप
वहीं ट्रंप के धमकी से पहले अमेरिका के सबसे करीबी सहयोगियों ब्रिटेन, फ्रांस, जापान, नीदरलैंड, इटली, जर्मनी और कनाडा ने एक संयुक्त बयान जारी किया। इन देशों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि वे होर्मुज की इस नाकेबंदी में अमेरिका का हिस्सा नहीं बनेंगे। विशेष रूप से ब्रिटिश प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर और ट्रंप के बीच संबंध बेहद तल्ख हो गए हैं। ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वह समुद्री रास्तों की आजादी का पक्षधर है, न कि उन्हें बंद करने का।
फिर से मंडराने लगे तबाही के बादल
इससे पहले ट्रंप ने रविवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा था कि नाकेबंदी जल्द शुरू होगी और इसमें अन्य देशों के शामिल होने की भी उम्मीद है। वहीं, तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाना चाहिए, न कि टकराव का। कुल मिलाकर, कई देश इस मामले में सैन्य कार्रवाई से दूरी बनाते हुए बातचीत और शांति के रास्ते पर जोर दे रहे हैं।
ईरान ने भी दिखाए अपने तेवर
इस बीच, ईरान के सशस्त्र बलों के केंद्रीय मुख्यालय ने कड़ी चेतावनी दी है कि ईरानी बंदरगाहों पर किसी भी तरह के हमले का मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। यह बयान ऐसे समय में आया है, जब होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका की प्रस्तावित नौसैनिक नाकेबंदी को लेकर तनाव लगातार बढ़ रहा है। इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान ब्रॉडकास्टिंग के मुताबिक, जारी बयान में कहा गया है कि फारस की खाड़ी और ओमान सागर में सुरक्षा या तो सभी देशों के लिए होगी या फिर किसी के लिए भी नहीं। बयान में यह भी साफ कहा गया है कि अगर ईरान के बंदरगाहों को किसी तरह की धमकी दी जाती है, तो इस पूरे क्षेत्र में कोई भी बंदरगाह सुरक्षित नहीं रहेगा।