US Iran War: अगर 2 हफ्तों में खत्म भी हुई ईरान जंग, तब भी हालात पटरी पर लौटने में लग सकता है लंबा वक्त! समझें पूरा गणित

US Israel Iran War: ट्रंप ने ये भी इशारा दिया कि वो बिना किसी बड़े समझौते के भी हालात संभाल सकते हैं। यहां तक कि उन्होंने कहा कि अब अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मामले में ज्यादा दखल नहीं देगा, जिससे ऐसा लग रहा है कि अमेरिका इस लड़ाई से थोड़ा पीछे हट सकता है

अपडेटेड Apr 01, 2026 पर 2:04 PM
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US Iran War: अगर 2 हफ्तों में खत्म भी हुई ईरान जंग, तब भी हालात पटरी पर लौटने में लगेगा लंबा समय! (FILE PHOTO)

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि ईरान में चल रहा युद्ध "अगले दो हफ्तों के भीतर" खत्म हो सकता है। हालांकि, युद्ध रुकने का मतलब यह नहीं है कि दुनिया भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत कम हो जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि हालात सामान्य होने में अभी लंबा वक्त लग सकता है।

ट्रंप ने ये भी इशारा दिया कि वो बिना किसी बड़े समझौते के भी हालात संभाल सकते हैं। यहां तक कि उन्होंने कहा कि अब अमेरिका होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के मामले में ज्यादा दखल नहीं देगा, जिससे ऐसा लग रहा है कि अमेरिका इस लड़ाई से थोड़ा पीछे हट सकता है।

हकीकत यह है कि जंग खत्म होने के बाद भी हालात तुरंत सामान्य नहीं होंगे। अगर लड़ाई जल्दी रुक भी जाती है, तब भी तेल की सप्लाई, प्रोडक्शन और समुद्री रास्तों को पहले जैसा होने में कम से कम 6 से 8 हफ्ते लग सकते हैं। इसकी वजह यह है कि अभी काफी तेल स्टोर में जमा है, जिसे पहले जहाजों में भरना होगा, और फिर धीरे-धीरे सप्लाई चेन पटरी पर आएगी


जंग रुकी तो भी 2 महीने का 'वेटिंग पीरियड'

अगर ट्रंप की बात सच साबित होती है और युद्ध 14-15 दिनों में रुक जाता है, तब भी तेल की सप्लाई और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' (Hormuz) में टैंकरों की आवाजाही सामान्य होने में 6 से 8 हफ्ते लगेंगे।

ऐसा इसलिए क्योंकि फिलहाल कई तेल टैंकर समुद्र में फंसे हैं। पहले जमा हुआ तेल जहाजों पर लादना होगा, फिर प्रोडक्शन शुरू होगा। इसमें कम से कम एक महीना लगेगा।

बुनियादी ढांचे की मरम्मत में लगेगा वक्त

ईरान, अमेरिका और इजरायल के हवाई हमलों में तेल रिफाइनरियों और पाइपलाइनों को भारी नुकसान पहुंचा है। ड्रोन हमलों से हुई छोटी-मोटी टूट-फूट कुछ दिनों या हफ्तों में ठीक हो सकती है। अगर मेन 'प्रोसेसिंग यूनिट' तबाह हुई है, तो उसे ठीक करने में कई महीने या एक साल तक लग सकता है।

समुद्र में बिछी 'माइंस' का खतरा

ईरान ने होर्मुज के संकरे रास्ते (मात्र 33 Km चौड़ा) में Maham-3 और Maham-7 जैसी समुद्री माइंस बिछा दी हैं।

युद्ध रुकने के बाद भी इन खदानों को साफ करना एक खतरनाक और समय लेने वाला काम है। जब तक रास्ता सुरक्षित नहीं होगा, बड़े टैंकर (VLCCs) वहां से नहीं गुजरेंगे।

शिपिंग और बीमा का भारी खर्च

युद्ध की वजह से तेल लाने वाले बड़े जहाजों का किराया आसमान छू रहा है:

  • नॉर्मल रेट: 1 लाख डॉलर प्रतिदिन।
  • मौजूदा रेट: मार्च की शुरुआत में एक भारतीय टैंकर ने 7.70 लाख डॉलर (लगभग ₹6.4 करोड़) प्रतिदिन का किराया चुकाया।

इसके अलावा इंश्योरेंस और सुरक्षा कारणों से जहाजों को अफ्रीका (केप ऑफ गुड होप) के रास्ते घूमकर आना पड़ रहा है, जिससे लागत और बढ़ गई है।

हूती विद्रोहियों का नया मोर्चा

संकट तब और गहरा सकता है, जब यमन के हूती विद्रोही इस जंग में पूरी तरह कूद पड़ें। वे 'बाब अल-मंदाब' (Strait No. 2) को बंद करने की धमकी दे रहे हैं। अगर यह रास्ता भी बंद हुआ, तो रिकवरी में लगने वाला समय दोगुना हो सकता है।

भारत और दुनिया पर क्या पड़ेगा असर?

  • भारत में हालात फिलहाल स्थिर हैं। सरकार ने टैक्स घटाकर और पुराने स्टॉक (Reserves) से कीमतों को काबू में रखा है।
  • अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें $4 प्रति गैलन के पार (करीब ₹99/लीटर)।
  • यूरोप में फ्रांस और जर्मनी में तेल की कीमतें 15-17% तक बढ़ीं।
  • पड़ोसी देश पाकिस्तान, श्रीलंका और बांग्लादेश में 'फ्यूल इमरजेंसी' और राशनिंग शुरू।
  • चीन ईरानी तेल का बड़ा खरीदार होने के नाते कीमतों में 20% की बढ़ोतरी।

संकट की शुरुआत कैसे हुई?

यह संकट 28 फरवरी 2026 को शुरू हुआ, जब अमेरिका-इजरायल ने ईरान पर हमले किए। जवाब में ईरान ने 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को ब्लॉक कर दिया, जहां से दुनिया का 20-25% कच्चा तेल गुजरता है। इसके चलते कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमत $119.5 प्रति बैरल तक पहुंच गई थी।

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